भ्रष्टाचार रोकने के लिए क्या कर रही है रक्षा कंपनियां?

बीएई
Image caption दुनिया की 129 रक्षा कंपनियों पर ये अध्ययन किया गया है

भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाली संस्था ट्रांस्पेरेंसी इंटरनेशनल का कहना है कि दुनिया की दो-तिहाई हथियार बनाने वाली कंपनियां इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं देती है कि भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए उन्होंने कौन से कदम उठाए है.

ट्रांस्पेरेसी इंटरनेशनल ने दस सबसे बड़े हथियारों के निर्यातक देशों ब्रिटेन, अमरीका, रुस, फ्रांस और चीन में हथियार बनाने वाली इन कंपनियों का अध्ययन किया है.

इस देशों की 129 कंपनियों का अध्ययन किया गया है जो हथियार बनाती है जिनकी पूंजी एक खरब डॉलर से ज्यादा है.

ये कंपनियां विश्व स्तर पर 90 फीसदी हथियारों की ब्रिकी करती है.

इस संस्था का कहना है कि इस उद्योग में भ्रष्टाचार की वजह से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बढ़ सकता है.

संस्था ने अपने इस अध्ययन में ये विश्लेषण किया है कि दुनियाभर की हथियार बनाने वाली कंपनियां भ्रष्टाचार को रोकने के लिए क्या करती है, या उसे रोकने में विफल रही हैं

सुरक्षा का खतरा

ट्रांस्पेरेंसी इंटरनेशल ने इन कंपनियों की रेटिंग भी की है. इन कंपनियों की रेटिंग दो तरह से की गई थी. रेटिंग का पहला आधार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में उन सूचनाओं को बनाया गया है जिन्हें इन कंपनियों ने खुद सार्वजनिक किया है.

वहीं 34 कंपनियां ऐसी भी शामिल थी जिन्होंने आंतरिक आचार को अपनाया था और इस सिलसिले में जवाब दिए थे.

इस अध्ययन के लेखक मार्क पाइमन का कहना है कि रक्षा उद्योग में इसलिए भ्रष्टाचार होता है क्योंकि हथियारों की ब्रिकी को लेकर इससे पहले जो भी सौदे हुए उन्हें गुप्त रखा गया था

वे कहते है, '' इस क्षेत्र में भ्रष्टाचार खतरनाक , बेकार और विभाज्य है.''

उनका कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और गलत तरीके से किए गए हथियारों की ब्रिकी से अरबों डॉलर बर्बाद हो सकते हैं.

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