कंडोम ने दिलाई कुछ एचआइवी प्रभावितों को छूट

कंडोम
Image caption सुरक्षित यौन संबंधों के लिए कंडोम को अहम माना जाता है

कनाडा के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कम तीव्रता वाले एचआईवी संक्रमित जो लोग कंडोम का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें सेक्स के समय अपने पार्टनर को अपनी स्थिति के बारे में बताने की जरूरत नहीं है.

अदालत का कहना है कि एचआईवी होने की बात को उजागर करना सिर्फ तभी जरूरी है जब संक्रमण दूसरे व्यक्ति में पहुंचने की 'वास्तविक संभावना' हो.

अदालत के इस फैसले से 1998 के उस कानून में बदलाव होगा जिसके अनुसार एचआइवी संक्रमण के बारे में सेक्स पार्टनर को जानकारी न देना यौन हिंसा के बराबर माना जाता है.

एचआइवी/एड्स के क्षेत्र में काम करने वाले कई संगठनों का कहना है कि कंडोम का इस्तेमाल पर्याप्त है.

अहम फैसला

अदालत का फैसला इस तरह के दो मामलों में आया है जिनमें से एक मैनिटोबा प्रांत का है तो दूसरे का संबंध क्यूबेक प्रांत से है.

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को कम तीव्रता वाला एचआएवी संक्रमण है और वो कंडोम इस्तेमाल करता है तो इससे उसके पार्टनर को कोई खतरा नहीं है.

लेकिन अदालत ने साफ किया है कि भविष्य में इन मानकों को 'इलाज में होने वाली भावी प्रगतियों' या जोखिम के उन कारकों के अनुरूप बदला जा सकता है, जिन पर यहां प्रत्यक्ष रूप से ध्यान नहीं दिया गया है.

Image caption एचआईवी और एड्स से जुड़े संगठन इस कानून की आलोचना करते हैं

कई संगठनों का कहना है कि एचआइवी के बारे में मौजूद कानून संक्रमित लोगों को समाज में अलग थलग करते हैं जबकि वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि कंडोम का इस्तेमाल करने पर इस संक्रमण के प्रसार की संभावना नगण्य होती है.

वहीं अभियोजकों ने दलील दी थी कि अगर कोई एचआइवी संक्रमित व्यक्ति अपने बारे में नहीं बताता हैं तो संभावित पार्टनर को वो जानकारी नहीं मिल पाएगी जिसके आधार पर वो सहमति पर आधारित सेक्स के लिए सजग फैसला कर सके.

अदालत ने कहा कि कई देशों में सिर्फ एचआइवी संक्रमण के वास्तविक प्रसार को ही अपराध माना जाता है, इसके जोखिम को नहीं.

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