शादी और सफल जीवन को अलग-अलग मानती हैं लड़कियाँ

ब्रिटेन में लड़कियों से जुड़ा सर्वे हर वर्ष होता है (फाइल फोटो)

ब्रिटेन में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार शादी को लेकर लड़कियां की सोच में ज्यादा खुलापन आ रहा है. अब उनके लिए सफल जीवन की निशानी सिर्फ शादी नहीं है.

सर्वे में हिस्सा लेने वाली 46 प्रतिशत लड़कियों ने जहां माना कि शादी किसी संबंध का बेहतरीन स्वरूप है, वहीं लड़कों में ऐसी राय रखने वालों की तादाद 56 प्रतिशत है.

‘गर्ल्स एटीट्यूड सर्वे’ में 600 लड़कों और सात से 21 वर्ष की 1,200 लड़कियों की राय ली गई.

इस सर्वेक्षण से जुड़ीं गिल स्लोकॉम्बे का कहना है, “लड़कियों के लिए अब भी परिवार और शादी की अहमियत है लेकिन वे सिर्फ इसे ही सफलता की परिभाषा नहीं मानती हैं.”

बदलती सोच

इस सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि 2012 में ज्यादा से ज्यादा लड़कियां (56 प्रतिशत) अपनी कामयाबी की कसौटी आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को मानती हैं. वहीं 21 प्रतिशत लड़कियों के लिए अब भी शादी ही सबसे ज्यादा मायने रखती है.

ये आंकड़े दिखाते हैं कि लड़कियां शादी को लेकर सकारात्मक रुख रखती हैं लेकिन इस बारे में उनकी सोच में लगातार खुलापन आ रहा है.

ज्यादातर (72 प्रतिशत) लड़कियां इस बात से सहमत नहीं हैं कि शादी सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है. वहीं तीन चौथाई से ज्यादा (76 प्रतिशत) लड़कियां इस बात को भी सही नहीं मानती हैं कि शादी न करना ही बेहतर है.

लगभग आधी (46 प्रतिशत) लड़कियों की राय है कि अपनी शादी को बनाए रखने की कोशिश किए बिना ही लोग झटपट तलाक की तरफ बढ़ जाते हैं. ये सर्वे ब्रिटेन में 2009 के बाद से हर साल हो रहा है.

इस साल हुए सर्वेक्षण में पहली बार लड़कों को भी शामिल किया गया ताकि लैंगिक मामलों पर उनकी भी राय ली जा सके. सर्वेक्षण के दौरान परिवार और बच्चों की परवरिश के मुद्दों पर लड़कों और लड़कियों की सोच में स्पष्ट अंतर देखने को मिला.

लगभग 47 प्रतिशत लड़कों ने माना कि शादीशुदा जोड़े, गैर शादी शुदा जोड़े से बेहतर माता पिता साबित होते हैं. वहीं इस राय से सिर्फ 32 प्रतिशत लड़कियां ही सहमत हैं.

शक्ल सूरत से खुश

Image caption बचपन से ही लड़कियों की सोच को नया आधार मिल रहा है

ज्यादातर लड़कियां (85 प्रतिशत) और लड़के (82 प्रतिशत) इस बात से सहमत हैं कि बच्चों की परवरिश माता और पिता, दोनों मिल कर उठाएं.

रोजगार के मामलों में लड़कियों की उम्मीदें लड़कों से बेहतर पाई गई हैं. सिर्फ 19 प्रतिशत लड़कियों को लगता है कि उनके लिए रोजगार के अवसर उनकी मां से बदतर हैं जबकि 38 प्रतिशत लड़कों को लगता है कि पेशेवर तौर पर वे अपने पिताओं से कम से सफल रहेंगे.

वहीं 11 से 21 वर्ष की हर पांच लड़कियों में से एक की राय की है कि नौकरी देते समय लड़कियों को लड़कों से कमतर आंका जाता है.

सर्वेक्षण के अनुसार ज्यादातर यानी 78 प्रतिशत लड़के अपनी शक्ल सूरत से खुश हैं जबकि लड़कियों में सिर्फ 68 प्रतिशत को अपना चेहरा-मोहरा पसंद है. हर तीन में से एक लड़की कॉस्मेटिक सर्जनी करना चाहती है.

स्लोकोम्बे का कहना है, “आज की युवतियों की राय एकदम दृढ़ और स्पष्ट है, इसमें कहीं कहीं लड़कों से उनके साफ मतभेद दिखते हैं.”

लड़कियों को लगता है कि वे अपनी माओं की पीढ़ी से बेहतर स्थिति में हैं और वे ज्यादा शिक्षित और आत्मनिर्भर हैं.

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