आईएमएफ़ ने भारत की विकास दर घटाई

 मंगलवार, 9 अक्तूबर, 2012 को 15:06 IST तक के समाचार
भारतीय अर्थव्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, आईएमएफ़, के मुताबिक वर्ष 2012 और 2013 में भारत की विकास दर पुर्वानुमानों की तुलना में कम होगी.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, आईएमएफ़ के मुताबिक वर्ष 2012 और 2013 में भारत की विकास दर पुर्वानुमानों की तुलना में कहीं कम होगी.

संस्था के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक 2012 में भारत की विकास दर 4.9 प्रतिशत और 2013 में 6 प्रतिशत रहेगी जबकि जुलाई में जारी हुए पूर्वानुमान के अनुसार ये आंकड़े 6.1 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत थे.

आईएमएफ़ ने कहा है आर्थिक मंदी का दौर अब भी जारी है क्योंकि सरकारी नीतियां विश्वास बहाल करने में असफल रही हैं. संस्था ने ये भी कहा है कि आर्थिक सुधार की संभावना कम होने का ख़तरा भी बढ़ गया है.

संस्था ने वर्ष 2013 के लिए वैश्विक विकास दर को घटाकर 3.6 प्रतिशत कर दिया है जबकि जुलाई में विकास दर का पूर्वानुमान 3.9 प्रतिशत था. बात अगर 2012 की करें तो जुलाई में 3.5 प्रतिशत विकास दर की तुलना में ताज़ा आंकड़ा 3.3 प्रतिशत ही रह गया है.

इस अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था का कहना है, "कुल मिलाकर विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक उत्पादन के धीमा रहने की आशंका है लेकिन कई उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में हालात बेहतर होंगे."

अमरीका और यूरोप

संस्था का कहना था कि बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि यूरोप और अमरीका के नीति-निर्धारक क्या कदम उठाते हैं.

अमरीका में अगले साल की शुरुआत में खर्च में कटौती और करों में बढ़ोतरी होनी है. लेकिन आईएमएफ़ के मुताबिक अमरीका में विकास के लिए इससे पैदा हुई वित्तीय स्थिति को टालने की ज़रूरत है.

लेकिन आईएमएफ़ का कहना है कि अगर अमरीकी नीतिनिर्धारक इस स्थिति को टालने के लिए किसी समझौते पर सहमत नहीं हो पाते और कर्ज़ की सीमा बढ़ जाती है, तो "वहां की अर्थव्यवस्था फिर से मंदी में चली जाएगी" जिसका असर सारी दुनिया पर पड़ेगा.

आईएमएफ़ ने बेरोज़गारी की समस्या से निपटने के लिए और कदम उठाने की भी बात कही है.

संस्था का ये भी कहना था कि दुनिया के विभिन्न देशों में आर्थिक संकट से निपटने के लिए अब तक उठाए गए कदम नाकाफ़ी रहे हैं. आईएमएफ़ ने बेरोज़गारी की समस्या से निपटने के लिए और कदम उठाने की भी बात कही. "विकसित अर्थव्यवस्थाओं में इस वक्त विकास इतनी कम है कि इससे बेरोज़गारी में कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ा है."

उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं

दूसरी ओर विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर विकास दर होने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की विकास संभावनाओं को भी कम कर दिया है.

संस्था का कहना है कि एशिया में पिछले सालों की तुलना में अल्प और मध्यमकालिक विकास संभावनाएं घटी हैं. साथ ही संस्था ने पश्चिम में उत्पादों की घटती मांग की वजह से इस क्षेत्र से कमज़ोर पड़ते निर्यातों की भी बात कही.

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, चीन, इस वर्ष 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी जबकि जुलाई में आईएमएफ़ का पूर्वानुमान 8 प्रतिशत था. इसी तरह संस्था ने वर्ष 2013 के लिए चीन की विकास दर 8.5 प्रतिशत से घटाकर 8.2 प्रतिशत कर दी है.

कमज़ोर निर्यात का असर लातिनी अमरीकी अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ेगा. साथ ही इन देशों में कड़ी सरकारी नीतियों का असर घरेलू मांग पर भी दिखेगा.

आईएमएफ़ का कहना है कि इन कारणों से ब्राज़ील की अर्थव्यवस्था जुलाई के पूर्वानुमान 2.5 प्रतिशत की जगह अब सिर्फ़ 1.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी.

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