मो येन: विद्रोही लेखन ने दिलाया साहित्य का नोबेल

 गुरुवार, 11 अक्तूबर, 2012 को 20:15 IST तक के समाचार
मो येन

मो येन को बचपन में काफी मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा था.

चीन के एक सफल लेखक और दर्जनों छोटी कहानियां लिख चुके मो येन को साहित्य के क्षेत्र में साल 2012 के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया है.

मो येन का पहला लेखन साल 1981 में प्रकाशित किया गया था.

57 वर्षीय मो येन पहले चीनी लेखक है जिन्होंने ये पुरस्कार जीता है. इससे पहले चीन में पैदा हुए गाओ शिंगजिएन को वर्ष 2000 में नोबेल पुरस्कार दिया गया था लेकिन वे फ्रांसीसी नागरिक थे.

इन लेखक का नाम वैसे बॉर्न ग्वान मोए है और वो मो येन के उपनाम से लिखते है जिसका मतलब चीन में होता है 'मत बोलो.'

पिछले साल स्वीडन के कवि टॉमस ट्रांसट्रोमर को ये पुरस्कार दिया गया था

मो येन 109वें नोबेल पुरस्कार विजेता हैं .इससे पहले पिछले साल स्वीडन के कवि टॉमस ट्रांसट्रोमर को ये पुरस्कार दिया गया था.

बुरा दौर

लेकिन ये बात बहुत कम लोग ही जानते होगे कि लेखन के लिए नोबेल साहित्य पुरस्कार जीतने वाले मो येन को स्कूल छोड़ना पड़ा था और समाचार एजेंसी रॉयटर के मुताबिक उन्होंने चीन में सांस्कृतिक क्रांति के दौरान मवेशियों को चराया और इतनी गरीबी भी देखी है कि उन्हें भोजन में पेड़ो की छाल और घासफूस खाकर अपना पेट भरना पड़ा था.

लेकिन मो येन कहते है कि बचपन में उन्होंने जो दुख देखा था उसे देखकर ही उन्हें काम करने का प्रोत्साहन मिला और तभी वे भ्रष्टाचार से निपटने, चीनी समाज के पतन, ग्रामीण जीवन और चीन की एक बच्चा नीति के बारे लिख पाए.

उन्होंने एक बार कहा था कि अकेलापन और भूख उनके लेखन के अभिन्न अंग थे.

उन्होंने लेखन की शुरुआत उस वक्त की थी जब वे पीपल लिब्रेशन आर्मी येनी पीएलए में एक सैनिक थे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें अपने लेखन के लिए प्रसिद्धी अपने नॉवल रेड सोरगम के लिए मिली थी.ये नॉवल उन्होंने चीनी भाषा में लिखा था.

लेखन की शुरुवात

इसके अलावा उन्होंने रिपब्लिक ऑफ वाइन, लाइफ एंड डेथ आर वेयरिंग मी ऑउट और बिग ब्रेस्ट और वाइड हिप्स नाम की किताबे भी लिखीं जो काफी पसंद की गईं.

लेकिन इसमें से साल 1995 में प्रकाशित होने वाली बिग ब्रेस्ट और वाइज हिप्स काफी विवादास्पद रही क्योंकि इसमें सैक्स संबंधित सामग्री थी और इसके बाद पीएलए ने उनपर दबाव डाला कि वे इस प्रकाशन से वापस ले लें हालांकि इस किताब में छपी सामग्रियों की कई बार चोरी भी हुई थी.

लेकिन दशक बाद जब ये किताब अंग्रेजी में प्रकाशित हुई तो इसे 'मैन एशियन लिटरेरी' पुरस्कार के लिए नामंकित किया गया था.

उनका ताजा नॉवल 'फ्रॉग को मॉओ डुन' को भी साहित्यिक पुरस्कार दिया गया था. ये पुरस्कार चीन का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है. इस नॉवल में उन्होंने चीन की 'एक बच्चे की नीति' के बारे में लिखा था.

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