मलाला पर हमले से टूटा एक और परिवार

 गुरुवार, 11 अक्तूबर, 2012 को 19:34 IST तक के समाचार
मलाला यूसुफ़ज़ई

पाकिस्तान में हिम्मत की मिसाल क्लिक करें मलाला यूसुफ़ज़ई किसी पहचान की मोहताज़ नहीं हैं, लेकिन क्या आप उनके व्यक्तित्व के अनछुए पहलुओं के बारे में जानते हैं.

क्या आपको क्लिक करें आरफ़ा करीम रंधावा का नाम याद है, जो महज़ नौ साल की उम्र में 'माइक्रोसॉफ़्ट सर्टीफ़ाइड प्रोफ़ेशनल' बनकर पाकिस्तान की होनहार लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई थी.

इस वर्ष जनवरी में लंबी बीमारी के बाद लाहौर में मौत हो गई.

यहां आरफ़ा का ज़िक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि उनकी मौत पर मलाला ने आरफ़ा के पिता अमजद करीम को ढांढस बंधाया था और अब जब मलाला, ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं, आरफ़ा के पिता अमजद को मलाला में आरफ़ा का चेहरा नज़र आ रहा है.

तालिबान की बर्बरता का शिकार बनी मलाला की ज़िंदगी के लिए दुआ कर रहे अमजद से बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने बात की.

अमजद ने अपनी यादों को ताज़ा करते हुए बताया, ''वो मुझसे हमेशा कहती थी कि आप अफ़सोस नहीं करें, मैं आपकी बेटी हूं, अगर आरफ़ा नहीं है तो मैं हूं. वो मुझे बाबा कहती थी. हमारे पूरे परिवार का मलाला से गहरा लगाव है.''

वो कहते हैं, ''हमें जबसे मलाला के बारे में पता चला, तभी से हमें वो वक्त याद आ रहा है कि कैसे आरफ़ा कोमा में चली गई थी और डॉक्टर हमें कभी भरोसा दिला रहे थे, कभी अपनी लाचारी ज़ाहिर कर रहे थे.''

'ना मुसलमान ना पाकिस्तानी'

आरफ़ा करीम रंधावा

अरफ़ा करीम पाकिस्तान में डिजीकॉन वैली स्थापित करना चाहती थीं

मलाला के साथ तालिबान ने जो सुलूक किया, उससे पाकिस्तान के समाज में क्या संदेश गया है, ये पूछे जाने पर अमजद कहते हैं, '' पूरा पाकिस्तान, हर बच्चा, हर बड़ा इससे बड़े रंज में है. सब लोग कह रहे हैं कि ऐसा पाकिस्तान की रवायत में, ख़ास तौर पर पख़्तून इलाकों की रवायत में नहीं है, ऐसा करने वाले ना मुसलमान हो सकते हैं ना ही पाकिस्तानी हो सकते हैं. सबको ऐसा लग रहा है जैसे उनकी अपनी बेटी के साथ ऐसा हुआ है.''

मंगलवार को तालिबान ने मलाला को स्वात घाटी में गोली मार दी थी. उनकी हालत पहले काफी नाज़ुक बनी हुई थी लेकिन बाद में उनके सिर में लगी गोली को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया गया. मलाला अभी भी बेहोश हैं.

बीबीसी संवाददाता अलीम मकबूल का कहना है कि अब प्रशासन को देखना होगा कि वो मलाला की रक्षा कैसे करे. संवाददाता के मुताबिक मलाला के परिवार ने पहले सुरक्षा लेने के बारे में नहीं सोचा क्योंकि उन्हें कभी नहीं लगा कि चरमपंथी इतना नीचे गिर सकते हैं.

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