क्यों बना मैं बागी....

 सोमवार, 15 अक्तूबर, 2012 को 08:01 IST तक के समाचार

सीरिया में आम नागरिक विद्रोही बनते जा रहे है.

सीरिया में 18 महीने पहले शुरु हुए संघर्ष में ज्यादा से ज्यादा नागरिक शामिल होने के मुजबूर हो रहे हैं.एलेप्पो में बीबीसी संवाददाता इयन पैनल की मुलाकात एक ऐसे व्यापारी से हुई जिसे हिरासत में रख यातना दी गई और उसने विद्रोहियों का कमांडर बनने की ठान ली.

“सवाल ये नहीं है कि क्या हमें यातना दी गई, सवाल ये है कि हमें यातना कब नहीं दी गई”

डॉक्टर अब्दुल राऊफ़ एलेप्पो के एक सफल और अमीर व्यापारी परिवार से ताल्लुक रखते थे और उनकी गितनी उच्च वर्ग में होती थी.

लेकिन जैसे ही सीरिया में क्रांती तेज़ हुई उन्होंने अपना ध्यान राजनीति की ओर लगाया और बाकि लोगों के साथ गुप्त रुप से मुलाकात कर बदलाव की मांग की.

यही वो वक्त था जब उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया. मैंने एलेप्पो के बाहारी इलाके में इस गुप्त समुह से मुलाकात की.

कभी विरोध प्रदर्शनों के बीच मूक गवाह रहा सीरिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर एलेप्पो आज ख़ुद गृह युद्ध का केंद्र बिंदु बन चुका है

डॉक्टर राऊफ कहते हैं, “मेरे दोस्त अल खज़ाऊक से पूछिए”

बलात्कार देखने को मजबूर

"जब हमें छोड़ा गया तो हमने हर वो हथियार खरीदा जो हम खरीद सकते थे"

डॉक्टर राऊफ़, विरोधी कमांडर

अल खज़ाऊक बताते हैं कि किस तरह उनके शरीर में जबरन छड़ी घुसा दी गई. वहीं खड़े हुए एक और व्यक्ति ने हामी में सिर हिलाते हुए कहा, “हर सीरियाई जानता है कि अल खज़ाऊक क्या कह रहे हैं.”

फिर उन्होंने बताया कि कैसे उनकी छाती और गुप्तांगों पर करंट लगाया गया और कैसे पीट-पीटकर उनकी पसलियां तोड़ दी गई.

ये बर्ताव एक आम आदमी के लिए इतने डरावने है लेकिन ये सब इन लोगों ने बड़े सहज तरीके से मुझे बताए. असल में उन्होंने ये डरावनी बाते बताते हुए हुक्के के कश भी लगाए.

उन्होंने ये भी बताया कि कैसे उन्हें कैद में रखी गई महिलाओं का बलात्कार देखने के लिए मजबूर किया गया और पुलिस ने कहा, “हम तुम्हारी पत्नियों के साथ भी ऐसा ही करेंगे, अगर तुमने वो नहीं बताया जो हम जानना चाहते है.”

डॉक्टर राऊफ़ ने बताया कि जब उन्हें गिरफ़्तार किया गया था तब उन्होंने आपस में चर्चा की, क्या उन्हें बचाव के लिए कुछ लाठियां खरीदनी चाहिए.

राऊफ कहते हैं, “जब हमें छोड़ा गया तो हमने हर वो हथियार खरीदा जो हम खरीद सकते थे.”

आज नागरिक विद्रोह एक गृह युद्ध का रुप ले चुका है, जिसमें विरोधियों के अनुसार अब तक 30000 लोग मारे जा चुके हैं.

जब हम ये बात रिकार्ड कर रहे थे तभी एक वायुसेना का लड़ाकू विमान हमारे उपर से गुज़रा. हमने मकान के पीछे जाकर विमान का वीडियो बनाने की कोशिश की लेकिन विरोधियों ने हमें ऐसा करने से इंकार कर दिया.

बाकी विद्रोही एक विदेश पत्रकार को वहां देख खुश नहीं हुए और वो नहीं चाहते थे कि हम वहां मौजूद हों.

इस्लामी चरमंपथियों का सहारा

एक अनुमान के मुताबिक विद्रोहियों में दस प्रतिशत जिहादी है.

हमें बाद में पता चला कि वो लोग जो नहीं चाहते थे कि हम वहां मौजूद ना हो, वो हथियारबंद इस्लामिक गुट जबात-अल-नुसरा के सदस्य थे. इस संगठन के अल कायदा से संबध रहे हैं. उनका दावा रहा है कि सीरिया में बड़े स्तर पर हुए बम विस्फोट उन्होंने ही किए है.

कितने विदेशी जिहादी इस समय सीरिया में प्रवेश कर चुके हैं ये अभी स्पष्ट नहीं है. लेकिन कुछ अनुमानों के अनुसार विद्रोहियों की संख्या का 10 प्रतिशत जिहादी हैं जो सीरिया पहुंचे है.

डॉक्टर राऊफ़ कहते हैं, “इस्लामिक संगठन हमें अपने अधिकार हासिल करने में मदद कर रहे हैं जबकि पश्चिमी देश सिर्फ स्थिती को देख रहे हैं.”

डॉक्टर राउफ कहते हैं कि उन्होंने चरमपंथियों से समझौता किया कि जब संघर्ष ख़त्म होगा तो वो हथियार डाल देंगे. लेकिन कई लोगों इस समझौते पर शक करते हैं.

हमसे मुलाकात करने के बाद डॉक्टर राऊफ मोर्चे पर लड़ रहे अपने लोगों से मिलने के लिए निकल गए.

जैसे ही वो एक खुली सड़क पर पहुंचे, एक लड़ाकू विमान ने उनके वाहन पर जानलेवा हमला किया और वो बुरी तरह घायल हो गए.

भविष्य में परिणाम की चिंता के कारण पश्चिमी देशों ने सीरिया के विद्रोहियों को हथियार मुहया नहीं करवाए है.

लेकिन इस सोच के पीछे जो डर था वो सच हो चुका है. नागरिकों को बड़े स्तर पर विस्थापित होना पड़ा है, बड़े स्तर पर लोगों की जान गई है और विदेशी लड़ाके सीरिया पहुंच चुके है.

जैसे-जैसे ये संघर्ष लबां खिंच रहा है वैसे वैसे ये और ज़्यादा खू़नी होता जा रहा है और पहले से ही अंशात क्षेत्र को और ज़्यादा ख़तरे का सामना करना पड़ रहा है.

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