लव, सेक्स और फिर ग़ुलामी

  • 19 अक्तूबर 2012
सोफी
Image caption सोफी ने डर के मारे कई साल तक अपनी आपबीती को लोगों से छिपाए रखा

ताजा सरकारी आँकड़ों में कहा गया है कि ब्रिटेन में मानव तस्करी की घटनाओं में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है. तस्करी के बाद इन लोगों से वेश्यावृत्ति कराई जाती है और घरेलू दास बनाकर रखा जाता है.

अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल इस तरह के 946 मामले सामने आए हैं, जबकि वर्ष 2010 में ये संख्या 710 थी.

मानव तस्करी की शिकार सोफी नामक एक ब्रितानी युवती ने एक साक्षात्कार के दौरान विस्तार से बताया कि किस तरह वो अपने कथित प्रेमी के चंगुल में फँस गई और फिर उससे जबरन वेश्यावृत्ति कराया गया.

एक अभिनेता को दिए साक्षात्कार में सोफी ने जो कहानी बयाँ की उससे पता चलता है कि कैसे लड़कियां इस साजिश में फँस जाती हैं.

खुद सोफी पर इस घटना का खौफ इतना था कि उसे अपनी कहानी लोगों को बताने में पाँच साल लग गए, वो भी तब जब उसका कथित प्रेमी ब्रिटेन में सजा काटकर अल्बानिया वापस चला गया.

मुलाकात

सोफी बताती हैं कि कैस नामक इस अल्बानियाई युवक से उनकी मुलाकात लीड्स के एक नाइटक्लब में हुई थी.

वो कहती हैं, “उसने मुझे बताया कि वो एक आईटी कंसल्टेंट है. वहीं से हम एक-दूसरे के दोस्त बन गए. उसके बाद कैस इटली चला गया लेकिन हम लोग फोन पर एक-दूसरे के संपर्क में बने रहे. चार साल बाद उसने मुझे छुट्टियां मनाने के लिए इटली बुलाया.”

सोफी कहती हैं कि चूंकि मेरे मित्र ने मुझे बुलाया था, इसलिए मैं वहां चली गई. “दरअसल जिससे आप प्रेम करते हैं, उसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं. इसी वजह से मैं वहां चली गई, लेकिन तीसरे दिन ही कैस ने सच्चाई बयान कर दी और बताया कि वो आईटी कंसल्टेंट नहीं, बल्कि एक ड्रग तस्कर है.”

सोफी बताती हैं कि कैस ने उसे धमकाते हुए कहा कि उसके ऊपर एक लाख यूरो का कर्ज है और मुझे अपना शरीर बेचकर उसका ये कर्ज चुकाना था.

उसका कहना था कि ये काम वो और किसी से भी करा सकता है, लेकिन चूंकि सोफी एक ब्रितानी लड़की है, इसलिए वो उसके लिए सोने की खान है.

सोफी कहती हैं, “मजबूरन मुझे ये सब करना पड़ा. उसने मेरा पासपोर्ट छीन लिया. मेरे पास वहां से भागने का कोई रास्ता नहीं था. हर जगह मेरा पीछा किया जाता था.”

सोफी बताती हैं कि इसके लिए उसे हर रात 20-30 लोगों के साथ संबंध बनाना पड़ता था ताकि वो एक लाख यूरो की राशि जुटा सके.

धमकी

वो कहती हैं, “विरोध करने पर मेरे छोटे भाई को गायब करने की धमकी देता था. मैं ऐसा नहीं होने देना चाहती थी क्योंकि मेरा छोटा भाई मेरे लिए सब कुछ था.”

विरोध करने पर उसके सिर पर मारा जाता था और तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता था.

सोफी कहती हैं, “मैं अपने से कुछ भी नहीं कर सकती थी, सोच नहीं सकता थी. मुझे वही करना होता था जो मुझसे कहा जाता था. इस बीच मैं काफी बीमार हो गई थी.”

करीब छह महीने तक ये यातना सहने के बाद उसने किसी तरह से अपनी माँ को वहां फोन करके बुलाया और उन लोगों ने कूट भाषा में एक-दूसरे से बात की.

तब कहीं जाकर पुलिस की मदद से उस अल्बानियाई युवक के चंगुल से सोफी को छुड़ाया जा सका.

संबंधित समाचार