कहाँ है मलाला का हमलावर?

मलाला के लिए दुआ
Image caption मलाला पर हुए हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों को पकड़ने के लिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान दोनो पर दबाव है

पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सरकारों पर मलाला युसुफजई के हमलावरों को गिरफ्तार करने का काफी दबाव है.

गौरतलब है कि मलाला पर तालेबान के हमले को एक हफ्ता हो चला है.

पाकिस्तान की सरकार के मुताबिक तालिबान के जिस गुट ने हमले के लिए जिम्मेदारी ली है, उसके नेता मुल्ला फजलुल्लाह अफगान सीमा के निकट पहाड़ी इलाकों में छिपे हैं. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से मांग की है कि फजलुल्लाह को उसे सौंप दिया जाए.

पाकिस्तानी सेनाएँ कई महीनों से फजलुल्लाह के लड़ाकों की तलाश में अफगान सीमा पर स्थित गाँवों पर गोलाबारी कर रही हैं.

पाकिस्तान फजलुल्लाह के लड़ाकों पर सीमा-पार हमले करने का आरोप लगाता है. हमले की एक घटना में फजलुल्लाह के चरपंथियों ने 17 पाकिस्तानी पुलिसकर्मियों का सर धड़ से अलग कर दिया था.

ऐसा संदेह है कि स्वात में तालिबान धड़े के नेता फजलुल्लाह के खिलाफ पाकिस्तान कार्रवाई करने से इसलिए कतरा रहा है क्योंकि इसका असर अफगानिस्तान से उसके संबंधों पड़ेगा.

ऐसी भी खबरें हैं कि अफगानिस्तान फजलुल्लाह को सौदेबाजी के लिए इस्तेमाल कर रहा है.

आधिकारिक तौर पर अफगानिस्तान इंकार करता है कि मुल्ला रेडियो के नाम से मशहूर ये व्यक्ति उसकी जमीन पर मौजूद नहीं है.

लेकिन निजी तौर पर कुछ और ही बात सामने आती है.

एक अफगान सुरक्षा सूत्र ने बताया कि फजलुल्लाह के नूरिस्तान और कुनार प्रांत के कमदेश या छपरा डारा जिलों में होने की रिपोर्टे हैं.

लेकिन सूत्र ने इस बात से इंकार किया कि अफगान गुप्तचर एजेंसी एनडीएस तालिबान नेता की मदद कर रही है.

फजलुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई

Image caption माना जाता है कि फजलुल्लाह लड़ाकों के साथ अफगानिस्तान के साथ सटे पहाड़ी इलाकों में छिपे हैं

ये पूछे जाने पर कि क्या फजलुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, सूत्र ने कहा कि फजलुल्लाह अफगान सुरक्षाकर्मियों पर हमला नहीं करते हैं और अगर वो कुनार औऱ नूरिस्तान के पहा़ड़ों में छिपे हैं तो वो छिपने की सबसे अच्छी जगह है.

ये इलाके दशकों से चरमपंथियों के छिपने की जगह रहे हैं.

अस्सी के दशक में सोवियत सेनाओं से युद्ध करने वाले अफगान मुजाहिद्दीन भी छिपने के लिए इन्हीं इलाकों का रुख करते थे.

सालों कोशिशें करने के बाद भी ये दो प्रांत अमरीकी और अफगान सेनाओं के प्रभाव से बाहर रहे हैं. गौरतलब है कि दो सालों में नेटो सेनाएँ अफगानिस्तान को छोड़ देंगी.

दर्जनों सैनिकों के मारे जाने के बाद सो साल पहले अमरीका ने इस इलाके में अपनी छावनियों को बंद कर दिया था.

नेटो महासचिव के साथ एक प्रेसवार्ता से जब अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजाई से मुल्ला फजलुल्लाह को लेकर पाकिस्तानी दावों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया.

हामिद करजाई ने उम्मीद जताई कि मलाला की घटना से पाकिस्तान को समझाने में मदद मिलेगी कि किसी के खिलाफ चरमपंथ का इस्तेमाल करना सही नहीं है.

राष्ट्रपति के एक सहयोगी ने कहा कि अफगानिस्तान के पास फजलुल्लाह का इस्तेमाल करने की ताकत नहीं है और अमरीका को फजलुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि उनके पास तकनीक है.

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