चीन में राजनीतिक क़ामयाबी के आठ नुस्ख़े

  • 22 अक्तूबर 2012
चीन में कामयाबी की सीढ़ी

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी नई पीढ़ी के नेताओं के नाम उजागर करनेवाली है. इनमें से सभी ऐसे पेशेवर राजनेता होंगे जिन्होंने राजनीति की लंबी पारी खेली है. लेकिन दुनिया के सबसे कठोर सत्तावादी तंत्र में क़ामयाबी की कुंजी आखिरकार क्या है?

जल्दी शुरुआत

चीन में उम्र का बहुत महत्व है. अगर आप अपनी उम्र के 25वें साल तक पार्टी में किसी ऊंचे पद तक नहीं पहुंचते हैं तो समझ लीजिए देर हो गई है.

इस बार देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के रूप में जिन दो लोगों के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं यानि ज़ी जिनपिंग और ली केक़ियांग, इन दोनों ने ही 21 साल की उम्र में पार्टी की सदस्यता स्वीकार कर ली थी और उसके बाद कभी पार्टी से बाहर कोई काम नहीं किया.

आजकल तो बच्चे और पहले राजनीति की ओर उन्मुख हो जाते हैं. इसकी शुरुआत छह साल की उम्र में ही हो जाती है जब बच्चे खास तरह का लाल रुमाल गले में बांधने लगते हैं.

हालांकि चुनींदा छात्रों की औपचारिक राजनीतिक शिक्षा 14 साल की उम्र में कम्युनिस्ट यूथ लीग में शामिल होने से पहले शुरू नहीं होती और मेधावी और होनहार छात्र पार्टी की पूर्ण सदस्यता के लिए 18 वर्ष की उम्र में योग्य हो जाते हैं.

पार्टी की सदस्यता लेने के लिए छात्रों को स्थानीय पार्टी कार्यालय में एक आवेदन देना होता है जिसकी अच्छी तरह जांच करने के बाद उनका प्रशिक्षु सदस्य के तौर पर अनुमोदन कर दिया जाता है.

उसके बाद पार्टी के झंडे के सामने आयोजित होनेवाले एक औपचारिक समारोह में नए सदस्य पार्टी की शपथ लेते हैं.

नाम न लेने की शर्त पर एक महिला पार्टी सदस्य ने बताया कि, "ये बेहद भावनात्मक अनुभव होता है. चीन में आप अपनी शादी में भी शपथ नहीं ले सकते इसलिए पार्टी की सदस्यता हासिल करते वक्त जो मैंने शपथ ली थी वही पहली और आखिरी थी."

पार्टी की सदस्यता हासिल करना आसान नहीं है. 2011 में 2.2 करोड़ लोगों ने इसके लिए आवेदन किया था लेकिन केवल 30 लाख लोगों का आवेदन ही स्वीकार किया गया.

इस समय पार्टी की सदस्यता 8 करोड़ 30 लाख की है जो तार्किक रूप से उसे दुनिया का सबसे बड़ा निजी संगठन बनाती है.

चीन में लोग कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता अलग-अलग वजहों से लेते हैं. पार्टी की सदस्यता उन्हें समाज में ऊंचा दर्जा दिलाती है और कई सुविधाएं भी जैसे कि प्रतिबंधित सूचनाओं तक पहुंच, सरकारी नौकरी और ऐसे लोगों से मिलने के अवसर जो आपको नौकरी में मदद पहुंचा सकते हैं.

जबकि दूसरे लोग पार्टी की सदस्यता इसलिए लेते हैं क्योंकि उनमें त्याग की भावना होती है और वो चीन के भविष्य निर्माण में अपना योगदान देना चाहते हैं.

संरक्षक का चुनाव

चीन में सफलता पाने के लिए अपने संरक्षक का वरदस्त हासिल होना ज़रूरी है

चीन में सफलता की कुंजी इस बात में है कि आप अपने संरक्षक यानि "काओशान" का कितना वरदहस्त हासिल कर पाते हैं.

क्लेरमॉन्ट मैक्केन्ना कॉलेज की मिनक्शिन पेई कहती हैं, "अगर आपका कोई ऐसा संरक्षक है जो आपको युवावस्था में ही नौकरियों की कतार में कईयों के मुकाबले आगे बढ़ा सकता है तो आपकी बड़ी हस्ती बनने की संभावना ज्य़ादा होती है."

बड़े अधिकारियों के बच्चों के लिए ये आसान होता है क्योंकि अपने माता-पिता की मदद और सुरक्षा और उनके रसूख का पूरा लाभ मिल पाता है.

लेकिन ऐसा नहीं है कि सामान्य पृष्ठभूमि के लोग चीन में शीर्ष पर नहीं पहुंच सकते. स्वयं मौजूदा राष्ट्रपति हू जिंताओ ऐसी ही पृष्ठभूमि से हैं जो कम्युनिस्ट यूथ लीग के ज़रिए देश के शीर्ष पद तक पहुंच सके. इस दूसरी व्यवस्था को "तुआनपाई" कहते हैं.

नैतिकता का पाठ

चीन के इतिहास में नेताओं से अपेक्षा रही है कि वो नैतिकता को ध्यान में रखते हुए शासकीय कर्तव्यों का निर्वाह करें.

चीन में ऐसे अधिकारियों की सराहना की लंबी परंपरा रही है जिनके कर्तव्यपालन और त्याग को सार्वजनिक मॉडल के रूप पेश किया जाता रहा है.

आजकल अधिकारियों को अपने वरिष्ठों को ये दिखाना पड़ता है कि वो ठीक तरह से शासन चलाने में सक्षम हैं.

इन उपायों के ज़रिए कम्युनिस्ट पार्टी को सार्वजनिक वैधता हासिल करने में मदद मिलती है.

अधिकारियों को इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है कि वो उदार नज़र आएं और हमेशा पार्टी के सूत्रवाक्य "लोगों की सेवा करो" को याद रखें.

देश के मौजूदा प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ आम लोगों से जुड़ने की अपनी क्षमता के कारण चीन के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक माने जाते हैं.

देश में कभी भी कोई भूकंप, भूस्खलन या बाढ़ के हालात पैदा होते हैं तो 'ग्रैंडपा' के नाम से मशहूर वेन मदद के लिए वहां ज़रूर पहुंचते हैं.

दिखावा न करें

चीन की अर्थव्यवस्था के मज़बूत होने के बाद शासन में उच्च स्तरीय जो भ्रष्टाचार फैला उसे पार्टी के खिलाफ लोगों के गुस्से की सबसे बड़ी वजह माना जाता है.

भ्रष्टाचार के पैमाने का अनुमान लगाना मुश्किल है लेकिन माना जाता है कि भ्रष्ट अधिकारियों ने 1990 के दशक के मध्य से लेकर अब तक क़रीब 120 अरब डॉलर देश से बाहर पहुंचा दिए हैं.

अधिकारियों को भोज, खर्च के लिए राशि और महंगे उपहार के लिए जो पैसे मिलते हैं वो उनके लिए अतिरिक्त आय का अच्छा ज़रिया बन जाता है.

पार्टी ने ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ़ अभियान चलाकर क़रीब 10 हज़ार लोगों को सज़ा दिलवाई है.

लेकिन आलोचकों का कहना है कि ऐसे अभियान असल में दुष्प्रचार होते हैं.

पुरुष होना ज़रूरी

कम्युनिस्ट पार्टी की केवल एक चौथाई सदस्य महिलाएं हैं.

आज तक कोई भी महिला कम्युनिस्ट पार्टी की फैसले लेनेवाली शीर्ष ईकाई पोलितब्यूरो की स्थाई समिति तक नहीं पहुंच सकी है.

24 सदस्यीय वृहत पोलितब्यूरो में केवल लियू यांगडोंग की एक सीट रही है.

विरोध की इजाज़त नहीं

आधुनिक चीन के निर्माता माओत्से तुंग और देंग जियाओपिंग करिश्माई नेता थे जिन्होंने अपनी दृष्टि के अनुरूप अकेले देश का भविष्य निर्धारित किया.

लेकिन आजकल नेताओं को नौकरशाही के पेचीदे पायदान चढ़ने होते हैं जिसके लिए पूर्ण आज्ञाकारिता की ज़रूरत होती है.

देश की राजनीति और मीडिया पर पार्टी के कठोर नियंत्रण का मतलब ये है कि कोई भी ग़लती आखिरी साबित हो सकती है.

इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण इसी साल पार्टी के पूर्व सचिव बो-शिलाई के मामले में देखने को मिला जिनके बारे में कहा जा रहा था कि वो ऊंचे पद के भी दावेदार हो सकते हैं.

भ्रष्टाचार और सत्ता के ग़लत इस्तेमाल के आरोप में उन्हें पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया और एक ब्रितानी कारोबारी की हत्या के आरोप में उनकी पत्नी को जेल की सज़ा सुना दी गई.

लेकिन कई पश्चिमी विश्लेषकों का मानना है कि बो-शिलाई का मुख्य अपराध ये था कि उन्होंने राजनीति के सुस्थापित तौर तरीकों को चुनौती दी जिसकी क़ीमत उन्हें चुकानी पड़ी.

गरीबों की चिंता

एक ऐसी पार्टी जिसे शासन करने के लिए कोई लोकतांत्रिक जनादेश नहीं मिलता, ये ज़रूरी हो जाता है कि उसके शीर्ष राजनेता आम लोगों की समस्याओं की समझ रखें.

पार्टी संगठन इस बात का पूरा ख़्याल रखता है कि पार्टी और नौकरशाही में शीर्ष पदों पर बैठे लोगों ने बीजिंग की आरामभरी ज़िंदगी से दूर के इलाकों में समय बिताया है या नहीं.

देश के मौजूदा राष्ट्रपति हू जिंताओ ने तिब्बत में चार साल बिताए हैं जिसे चीन में मुश्किल पोस्टिंग माना जाता है.

चीन के उभरते युवा नेताओं में से एक 49 वर्षीय चुन्हुआ इस समय भीतरी मंगोलिया में सेवारत हैं.

निष्ठुरता

दुनिया की सभी राजनीतिक व्यवस्थाएं निष्ठुरता से दूर रहने की बात करती हैं लेकिन चीन में ऐसा नहीं है.

मिनक्शिन पेई कहती हैं, "अगर आप सत्ता से बाहर हो जाते हैं तो वे सुनिश्चित करते हैं कि आपकी कभी वापसी न हो सके. आपकी केवल नौकरी नहीं जाती बल्कि वो आपके परिवार के पीछे पड़ जाते हैं और आपका नाम बर्बाद कर देते हैं."

महत्वाकांक्षी नेताओं को सलाह दी जाती है कि वो राजनीति के काली कारिस्तानियों की आदर्श किताब "थिक ब्लैक थिएरी" पढ़ें जिसे पिछली सदी में प्रकाशित किया गया था. इस किताब में कहा गया है कि आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी है कि आपकी चमड़ी मोटी हो, आप लज्जा या अपराधबोध से बेअसर रहते हों और आपका दिल काला हो ताकि अपने लाभ के लिए आप दूसरों को नुकसान पहुंचा सकें.

संबंधित समाचार