स्पेन के राजा की भारत यात्रा का मकसद

Image caption साल 2012 की शुरुआत में बोत्सवाना में हाथी का शिकार करने को लेकर राजा जुआन विवादों में घिर गए.

स्पेन के राजा जुआन कारलोस प्रथम चार दिन की भारत यात्रा पर 24 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचे हैं. 26 अक्टूबर को उनका राजकीय स्वागत किया जाएगा, लेकिन क्या है राजा जुआन की शख्सियत और इस यात्रा के ज़रिए उनका असली निशाना किधर है?

स्पेन में तानाशाही के अंत के बाद राजा जुआन कारलोस प्रथम ने देश में लोकतंत्र स्थापित करने की पहल की और एक लोकतांत्रित नेता की अपनी छवि को लेकर वो हमेशा सजग रहे हैं.

1981 में हुई तख्तापलट की कोशिशों को नाकाम करने में राजा जुआन कारलोस की अहम भूमिका रही. संकट की घड़ी में मीडिया की नब्ज़ पकड़ते हुए उन्होंने राष्ट्र के नाम जो संदेश दिया उसने कुछ ही घंटो में हालात को काबू में कर लिया. जुआन कारलोस स्पेन के लोगों के बीच खासे लोकप्रिय रहे हैं और लोकतंत्र की पैरवी कर उन्होंने देश को इस दौर से बाहर निकाला.

हालांकि यूरोज़ोन में छाई आर्थिक मंदी के बाद स्पेन के बिगड़ते हालात को लेकर 2011 में हुए एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि शाही परिवार में लोगों का विश्वास कम हो रहा है.

हाथी का शिकार

साल 2012 की शुरुआत में बोत्सवाना में हाथी का शिकार करने को लेकर राजा जुआन पर कई सवाल उठे. ये वो वक्त था जब स्पेन में सरकारी खर्च में कटौती का मुद्दा गर्म था.

राजा जुआन कारलोस को आखिरकार इस मामले पर माफी मांगनी पड़ी.

24 से 27 अक्टूबर के बीच भारत की यात्रा पर आए राजा जुआन कारलोस प्रथम इस दौरान भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात करेंगे.

स्पेन के शाही परिवार की भारत में हमेशा से रुचि रही है. साल 2010 के मुकाबले भारत और स्पेन के बीच होने वाले व्यापार में 18 फीसदी से द्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है.

दोनों देशों को बीच आधारभूत संरचना, यातायात, ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाएं बढ़ रही है. इस यात्रा का मकसद भारत में पैदा हो रहे व्यापार के अवसरों के ज़रिए स्पेन की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है.