ओबामा और रोमनी की विदेश नीति

बराक ओबामा और मिट रोमनी

अमरीका में राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवार राष्ट्रपति बराक ओबामा और गवर्नर मिट रोमनी ने अपने बयानों में अपनी विदेश नीति की झलक पेश कर दी है.

आइए नज़र डालते हैं कि विदेश नीति के अहम बिंदुओं पर दोनों का रुख़ क्या है.

ईरान

  • ओबामा ने क्या कहा: "मज़बूत देश और मज़बूत राष्ट्रपति अपने विरोधियों से भी बात करते हैं" दृष्टिकोण: ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने सभी संभावित कार्रवाई से इनकार नहीं किया है, लेकिन स्पष्ट रूप से वे बातचीत के माध्यम से या फिर प्रतिबंध लगाकर मसले के लिए हल को प्राथमिकता देते हैं. हालाँकि शुरू में ईरानियों से संवाद की कोशिश नाकाम रही है, तो दूसरी ओर ऐसा लग रहा है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से उस तरह का नतीजा निकल रहा है, जैसा ओबामा सरकार सोच रही थी.

रोमनी ने क्या कहा: "....अगर आप मुझे अगला राष्ट्रपति चुनते हैं, तो उनके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे...." दृष्टिकोण: एक सख़्त रुख़ बरकरार रखा हुआ है. वे इस बात पर भी अड़े हुए हैं कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, लेकिन इससे आगे भी वे कह चुके हैं कि वे नहीं चाहते कि ईरान के पास परमाणु क्षमता भी हो. वे संवाद के पैरोकार नहीं हैं, लेकिन वे ये भी दावा करते हैं कि वे कड़े प्रतिबंधों का समर्थन करेंगे. हालाँकि उनका ये मानना है कि ईरान के सामने ये बात स्पष्ट कर देनी चाहिए कि सैनिक कार्रवाई की चेतावनी सच्ची है.

इसराइल

  • ओबामा ने क्या कहा: "इसराइल की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्धता पर कोई हिचक नहीं होनी चाहिए और न ही शांति की कोशिश में." दृष्टिकोण: इसराइल की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्धता पर दृढ़ता से क़ायम, लेकिन वे ये भी मानते हैं कि फ़लस्तीनियों के साथ मौजूदा स्थिति टिकाऊ नहीं. वे दो राष्ट्र वाले हल का समर्थन करते हैं. उन्होंने मांग भी की थी कि हमास इसराइल के अस्तित्व को स्वीकार करे और हिंसा छोड़े. अधिकृत क्षेत्र में इसराइली बस्तियों का विरोध. ये एक ऐसा मुद्दा है, जिसे लेकर उनके और इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच मतभेद हो गए थे. ओबामा इस पर ज़ोर देते हैं कि इसराइल के साथ रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान इसराइल का दौरा नहीं किया.

  • रोमनी ने क्या कहा: "स्थायी शांति के लिए बातचीत का मूल है एक इसराइल, जो ये जाने कि वो सुरक्षित है." दृष्टिकोण: इसराइल को वे अमरीका का सबसे क़रीबी सहयोगी मानते हैं. इसराइल से दूरी बनाने के लिए वे ओबामा की आलोचना करते हैं. वे यहूदी बस्तियों को लेकर उदार हैं. रोमनी उच्च राजनीतिक दर्जे की बजाए फ़लस्तीनी क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में सुधार पर ध्यान केंद्रित रखना चाहते हैं. दो राष्ट्र के सिद्धांत की व्यावहारिकता पर वे सवाल उठाते हैं. उन्होंने अपने प्रचार के दौरान इसराइल की भी यात्रा की. उन्हें ये कहते बताया गया कि 'फ़लस्तीनियों को शांति स्थापित करने में ज़रा भी रुचि नहीं.'

अरब / मुस्लिम जगत

  • ओबामा ने क्या कहा: "अमरीका और इस्लाम अलग नहीं है और इन्हें प्रतिस्पर्धा में नहीं रहना चाहिए." दृष्टिकोण: कार्यकाल के शुरू से ही ओबामा की सरकार ने अरब और मुस्लिम जगत के साथ बातचीत की कोशिश की. उन्होंने क्षेत्र में लोकतांत्रिक सुधार का समर्थन किया. साथ ही उन्होंने निवेश के लिए आर्थिक सहायता, आधारभूत क्षेत्र के लिए कर्ज और नौकरी के अवसर तैयार करने के लिए योजना भी तैयार की.

  • लीबिया में कर्नल गद्दाफी के ख़िलाफ़ नेटो गठबंधन में शामिल हुए, सीरिया में सख़्त प्रतिबंधों का समर्थन किया और राष्ट्रपति बशर अल असद से सत्ता छोड़ने के लिए कहा. उन्होंने इस्लाम विरोधी फिल्म के मामले में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का बचाव किया और हिंसा की आलोचना की.

  • रोमनी ने क्या कहा: "रोमनी प्रशासन इसे सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा कि अरब बसंत के बाद अरब शरद न आ जाए." दृष्टिकोण: अरब क्रांति को बदलाव के लिए सकारात्मक बदलाव मानते हैं. लेकिन इससे चिंतित हैं कि इससे क्षेत्र में अमरीका के विरोधियों के लिए दरवाजा खुल सकता है. लीबिया में अमरीका के सैनिक दखल से सहमत लेकिन उसके समय से असहमत. सीरिया में ओबामा की 'निष्क्रियता' की आलोचना.

  • वे चाहते हैं कि अमरीका और उसके सहयोगी देश सीरिया के विपक्षी गुटों को सुनियोजित करें और हथियार दें. वे तुरंत सैनिक कार्रवाई के पक्षधर नहीं, लेकिन उनका कहना है कि अमरीका को रासायनिक हथियारों के प्रसार और उसकी सुरक्षा के लिए दखल देना होगा. अमरीकी राजनयिक मिशनों पर हमले को लेकर राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया के आलोचक.

चीन

  • ओबामा ने क्या कहा: "अमरीका चीन को रोकना नहीं चाहता. एक मज़बूत और संपन्न चीन कई राष्ट्रों के लिए ताकत का स्रोत हो सकता है." दृष्टिकोण: ओबामा चीन के साथ सहयोगात्मक रिश्ता चाहते हैं. वे मैत्रीपूर्ण और व्यावहारिक रुख़ में भरोसा करते हैं. लेकिन उन्होंने अपनी मुद्रा की कथित हेराफेरी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार के लिए चीन की आलोचना भी की.

  • उन्होंने ऐसे उल्लंघन की जाँच के लिए व्यापार प्रवर्तन इकाई के गठन की घोषणा की. वे एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव से चिंतित हैं और उन्होंने इलाक़े में अमरीकी मरीन सैनिकों की बड़ी उपस्थिति की योजना भी तैयार की है. चीन के एक असंतुष्ट नेता के मामले में टकराव. इस असंतुष्ट नेता ने नज़रबंदी से भागकर अमरीका में शरण ली.

  • रोमनी ने क्या कहा: "अगर आप चीन के ख़िलाफ़ खड़ा होने के उत्सुक नहीं, तो चीन आपको कुचलकर निकल जाएगा." दृष्टिकोण: चीन के प्रति सख़्त रुख़ के पैरोकार. प्रशांत महासागर में मज़बूत सैनिक क्षमता चाहते हैं. भारत और क्षेत्र के अन्य देशों के साथ मज़बूत रिश्ते. मानवाधिकार का मज़बूती से समर्थन और उचित व्यापार नीति अपनाने के लिए चीन पर दबाव. चीन की व्यापारिक नीति को वे अनुचित बताते हैं.
  • उन्होंने डब्लूटीओ में चीन के ख़िलाफ़ ओबामा के अभियान को बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया क़दम बताया. वे मुद्रा के मामले में चीन की कथित हेराफेरी के साथ-साथ अमरीकी सरकार और कॉरपोरेट कंप्यूटर्स की हैकिंग पर खुल कर बोलते हैं. वे चीन को आर्थिक पावरहाउस मानते हैं, जिसके साथ व्यापार तो हो सकता है, लेकिन कड़े नियमों के साथ.

रूस

  • ओबामा ने क्या कहा: "....आप रूस को हमारा दुश्मन नंबर एक मत कहिए....न तो अल क़ायदा को ही. रूस को दुश्मन मानने की बात आप तभी करेंगे, जब आपका दिमाग़ अब भी शीत युद्ध की मानसिकता में फँसा हो." दृष्टिकोण: रूस के साथ रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित किया. स्टार्ट संधि पर हस्ताक्षर, जिसके तहत परमाणु हथियारों की संख्या कम करने की बात.

  • रूस को डब्लूटीओ में शामिल करने का समर्थन, जिसके कारण व्यापारिक रिश्ते सामान्य होंगे. ईरान के खिलाफ प्रतिबंध पर रूस के साथ समझौता, लेकिन सीरियाई संकट से निपटने के लिए रूस के साथ सहमति नहीं हो पाई.

  • रोमनी ने क्या कहा: "बिना किसी संदेह के रूस हमारा नंबर एक भू-राजनैतिक दुश्मन है. वे दुनिया के सबसे बुरी शख्सियतों के लिए लड़ते हैं." दृष्टिकोण: रोमनी का कहना है कि वे रूस के साथ नए सिरे से अपनाए जा रहे रिश्ते को फिर से पुराने रास्ते पर लाएँगे. अपने अभियान के दौरान उन्होंने आक्रामक और विस्तारवादी व्यवहार को हतोत्साहित करने और लोकतांत्रिक और राजनीतिक आर्थिक सुधार को प्रोत्साहन देने की रणनीति तैयार की.

  • रोमनी कहते हैं कि वे रूसी सरकार की दबंगई का सामना करने में स्पष्टवादी बनेंगे. वे ये भी मानते हैं कि ओबामा हथियार नियंत्रण पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित किए हुए हैं. रोमनी ने रूस को डब्लूटीओ में शामिल किए जाने का विरोध किया है. उन्होंने रूस पर ये भी आरोप लगाया है कि वो ईरान और सीरिया पर प्रतिबंधों में रुकावट डाल रहा है.

लैटिन अमरीका

  • ओबामा ने क्या कहा: "लैटिन अमरीका ऐसा क्षेत्र है, जहाँ आजकल काफी गतिविधियाँ चल रही है, जिसे प्रगति पर काफ़ी गर्व है और जो अंतरराष्ट्रीय मामलों में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है. ये अमरीका की सुरक्षा और संपन्नता को लेकर ज़्यादा अहम है." दृष्टिकोण: इस क्षेत्र के लिए ओबामा की नीति पर अन्य विदेशी और घरेलू संकट की ज्यादा हावी रहे हैं, हालांकि वो खुद लैटिन अमरीका के साथ "साझीदारी के एक नए उत्साह" के साथ रिश्ते मजबूत करना चाहते हैं. उन्होंने क्यूबा के लिए यात्रा पाबंदियों में ढील दी है, लेकिन इस द्वीपीय राष्ट्र पर लगे दशकों पुराने प्रतिबंधों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाए गए. उन्होंने राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के कार्यकाल में शुरू की गई 'मैरिडा योजना' को ही जारी रखा जिसके तहत मैक्सिको से लगने वाली सीमा के आरपार नशीले पदार्थों और हथियारों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए अमरीकी सुरक्षा बलों और संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

  • ओबामा प्रशासन ने कोलोंबिया और पनामा के साथ दो मुक्त व्यापार समझौते भी किए हैं. इस दिशा में भी काम राष्ट्रपति बुश के कार्यकाल में शुरू हो गया था. राष्ट्रपति ओबामा ने अमरीका और लैटिन अमरीका के बीच उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों की एक दूसरे के यहां आवाजाही को काफी प्रोत्साहन किया है. लेकिन ओबामा प्रशासन की तरफ से इस क्षेत्र के लिए न तो व्यापक नीति अपनाई गई और न ही अलबा (ALBA), उनासुर (UNASUR) और सेलाक (CELAC) जैसे उभरते समूहों से निपटने की कोई रणनीति दिखती है. ये समूह अमरीकी प्रभाव से स्वतंत्र हैं.

  • रोमनी ने क्या कहा: "मैं लैटिन अमरीका में आर्थिक अवसर को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष अभियान शुरू करूंगा. साथ ही लोकतंत्र, मुक्त व्यापार और मुक्त उद्यम के फायदों की तुलना क्यूबा और वेनेजुएला मॉडल के आर्थिक और नैतिक दिवालिएपन से की जाएगी." दृष्टिकोण: इस क्षेत्र के लिए रोमनी की नीति ओबामा की तरह ही है. अगर वो राष्ट्रपति चुने जाते हैं तो उनके कार्यकाल में भी इस क्षेत्र के हाशिए पर रहने की संभावना है. हालांकि रोमनी का कहना है कि वो लैटिन अमरीका में लोकतांत्रिक सहयोगियों को समर्थन देकर एक सक्रिय भूमिका निभाएंगे. उनका मानना है कि लैटिन अमरीका में सुरक्षा, लोकतंत्र और अमरीका के साथ आर्थिक संबंधों में हो रही प्रगति के लिए वेनेजुएला और क्यूबा की वजह से चुनौतियां पैदा हो रही हैं.

  • रोमनी के मुताबिक ये दोनों देश पूरे क्षेत्र में अमरीका विरोधी उग्र अभियान छेडे़ हुए हैं. रिपब्लिकन उम्मीवार इन दोनों देशों को ईरान और चरमपंथी संगठन हिज्बोल्लाह की तरह ही मानते हैं. रोमनी लैटिन अमरीका के लिए 'आर्थिक अवसर मुहिम' शुरू करने की योजना रखते हैं. लेकिन वो क्यूबा पर यात्रा संबंधी पाबंदियों को फिर से लागू करना चाहते हैं. साथ ही मैक्सिको को साथ लगने वाली अमरीका की दक्षिणी सीमा पर बाड़ लगाने का काम भी पूरा करने का इरादा रखते हैं.

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