सीरियाई सेना करेगी संघर्ष-विराम पर अमल

 शुक्रवार, 26 अक्तूबर, 2012 को 03:31 IST तक के समाचार
सीरिया में संकट

सीरिया का संकट विश्व समुदाय के कड़ी चुनौती बन रहा है.

सीरिया की सेना ने कहा है कि वो ईद अल-अज़ाह के मौके पर शुक्रवार से शुरू हो रहे चार दिन के संघर्ष-विराम का पालन करेगी.

सीरिया के सरकारी टीवी पर आए एक बयान के अनुसार सेना ने विद्रोहियों के हमलों का जवाब देने का अपना अधिकार सुरक्षित रखा है.

इस संघर्षविराम का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र और अरब लीग के दूत लख्दर ब्राहिमी ने रखा और उन्हें उम्मीद है कि इसके जरिए शांति प्रक्रिया की तरफ बढ़ा जा सकता है.

संघर्ष-विराम पर सेना के अमल की खबर एक ऐसे समय में आई है जब विद्रोहियों ने कहा है कि वो सीरिया के सबसे बड़े शहर एलप्पो के कुछ केंद्रीय इलाकों में आगे बढ़ रहे हैं. एलैप्पो हाल के महीनों में विद्रोहियों और सरकारी बलों के बीच लड़ाई का मुख्य केंद्र रहा है.

संघर्षविराम पर सहमति

ब्राहिमी ने संघर्षविराम की अपनी योजना पर समर्थन जुटाने के लिए पिछले दो हफ्तों में पूरे मध्यपूर्व का दौरा किया और बुधवार को उन्हें सुयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन मिल गया.

उनका कहना है कि ज्यादातर विपक्षी समूह संघर्षविराम का समर्थन करेंगे. हालांकि कुछ विद्रोहियों को इस बारे संदेह है कि युद्धविराम कारगर होगा.

गुरुवार को सीरिया के सरकारी मीडिया में सीरियाई सेना के एक बयान में कहा गया, “पूरे सीरियाई क्षेत्र में सैन्य अभियान 26 अक्टूबर को (स्थानीय समय के अनुसार) सुबह 6 बजे से बंद हो जाएंगे.”

दूसरी तरफ मुख्य सशस्त्र विद्रोही समूह फ्री सीरियन आर्मी की साझा कमांड के प्रवक्ता कासेम सादेद्दीन ने कहा है कि उनके लड़ाके संघर्षविराम का पालन करेंगे

सीरिया में संकट

इस संकट में हजारों की संख्या में लोग मारे गए हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने उनके हवाले से कहा है, “लेकिन सरकार को अपनी चौकियों पर मजबूत होने का कोई मौका नहीं देंगे.”

संकट से जूझता सीरिया

सीरिया में इससे पहले संघर्षविराम की कोशिशें नाकाम रही हैं और हिंसा लगातार बढ़ रही है.

सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार के खिलाफ मार्च 2011 से विद्रोह चल रहा है.

कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस संघर्ष में अब तक 35 हजार से ज्यादा लोग मारे गए हैं जबकि संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार मृतकों की संख्या 20 हजार के आसपास है.

इस बीच जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार जांचकर्ताओं की एक टीम ने कहा है कि वो राष्ट्रपति असद से मुलाकात करना चाहती है.

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