क्या सीरियाई विद्रोहियों ने सैनिकों की 'हत्या' की?

  • 2 नवंबर 2012
सीरिया में विद्रोहियों द्वारा सैनिकों की हत्या का तथाकथित विडियो
सीरियाई विद्रोही गुटों द्वारा भी सैनिकों की हत्याओं के सबूत अब सामने आ रहे हैं.

इंटरनेट पर एक वीडियो पोस्ट किया गया है, जिसमें सीरियाई विद्रोही लड़ाकों पर सरकारी सैनिकों की हत्या का आरोप लगा है. मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसकी निंदा की है.

संस्था का कहना है कि गुरुवार को हुई इन हत्याओं की अगर पुष्टि हो जाती है तो ये "युद्ध अपराध" होगा.

विद्रोहियों द्वारा राजधानी दमिश्क और एल्लपो के बीच सेना के नाकों पर हमले के बाद ये तथाकथित हत्याएं की गई.

इस बीच सरकारी हेलिकॉप्टरों और जेट विमानों ने दमिश्क के नज़दीक और कई और जगहों पर हवाई हमले किए.

पिछले कुछ हफ़्तों में सेना ने उन इलाकों में हवाई हमले तेज़ कर दिए हैं जहां से थल सेना विद्रोहियों को हटा नहीं पाई है.

ब्रिटेन-स्थित सीरियन ऑबज़र्वेटरी फॉर ह्मूमन राइट्स गुट के मुताबिक गुरुवार को सीरिया में लड़ाई में 150 से ज़्यादा लोग मारे गए.

संगठन का कहना है कि मार्च 2011 में राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ शुरु हुए प्रदर्शनों में 36 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं. इनमें से 25,667 नागरिक, 9,044 सुरक्षाबल और 1296 विद्रोही लड़ाके शामिल हैं.

वीडियो

इंटरनेट पर डाले गए वीडियो में दिखाया गया है कि कुछ लोग अपने कब्ज़े वाले नाके के अंदर लगभग एक दर्जन सैनिकों को ज़मीन पर धक्का दे रहे हैं और ठोकरें मार रहे हैं. इसके बाद सैनिकों को गोलियों से भून दिया जाता है.

एक वक्तव्य में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, "ये स्तब्ध करने वाली फ़ुटेज एक संभावित युद्ध अपराध होते हुए और इस गुट की ओर से अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून की पूरी तरह से अवहेलना दर्शाती है."

अब तक किसी भी समूह ने इन तथाकथित हत्याओं की ज़िम्मेदारी ली है.

लेकिन लेबनान में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर के मुताबिक ये कहा जा रहा है कि इन हत्याओं के लिए अल-नुसरा नाम का एक चरमपंथी इस्लामी गुट ज़िम्मेदार है.

कई महीनों से सीरियाई विद्रोही लगभग हर दिन बशर प्रशासन के हाथों ऐसी हत्याओं की बात कहते रहे हैं. लेकिन अब कुछ विद्रोही गुटों की ओर से इसी तरह के कदम उठाने के सबूत भी सामने आ रहे हैं.

अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कुछ समय पहले चेतावनी दी थी कि चरमपंथी इस्लामी लड़ाके सीरियाई आंदोलन को अगवा करने की कोशिश कर रहे हैं.

क्लिंटन की इन टिप्पणियों पर कुछ विपक्षी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया की है. इन नेताओं का कहना है कि बशर अल-असद की सरकार के खिलाफ़ विद्रोह को बाहरी दुनिया से मदद नहीं मिल पाने की वजह से चरमपंथियों को संघर्ष में हस्तक्षेप करने का मौका मिल गया है.

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