अमरीका मगरूर है या उदार?

  • 2 नवंबर 2012
अमरीका में सैंडी तूफ़ान का बचाव कार्य
Image caption अमरीका में हाल के दिनों में सैंडी तूफ़ान से काफ़ी तबाही मची है.

दुनिया भर में अमरीका की छवि और पहचान अमरीकी फ़िल्मों और टीवी कार्यक्रमों से है. लेकिन ये कोई बहुत अच्छी छवि नहीं है.

ये छवि एक बेहद मगरूर और अहंकारी देश और लोगों की है.

अमरीका की जिस पहचान के साथ मैं बड़ा हुआ उसमें डालास, मियामी वाइस जैसे टीवी शो और स्टरास्की एंड हच जैसी हॉलीवुड फ़िल्में शामिल थीं जो एक हिंसक, स्वार्थी, व्यक्तिपरक और भड़कीले अमरीका को दर्शाते हैं.

और अब मेरे बच्चे जिन अमरीकी फ़िल्मों के साथ बड़े हो रहे हैं, वो एक ऐसी जगह है जहां लगभग हमेशा अंगभंग, धमाके और हिंसक मौते होती हैं.

लेकिन इस सबके बीच जिस अमरीका की मैं रिपोर्टिंग कर रहा हूं वो एक उदार, परोपकारी, मर्यादित और ज़्यादातर शांतिप्रिय जगह है.

अनुभव

वॉशिंगटन से मैंने टोलीडो और फिर डेट्रॉयट जाने के लिए आई-90 हाई-वे पकड़ी है. अमूमन यहां एक ट्रैफ़िक लाइट यातायात नियंत्रित करती है.

लेकिन सैंडी तूफ़ान की वजह से बारिश और तेज़ हवाओं के चलते आज कई ऐसी ट्रैफ़िक बत्तियां बंद हैं और यहां एक नाके से यातायात नियंत्रित हो रहा है.

इसलिए हर आने वाली गाड़ी रुकती है, दूसरी गाड़ी को जाने का रास्ता देती है और फिर निकलती है और ये सिलसिला चलता रहा.

सड़क पर आगे हालात इतने नियंत्रित नहीं थे लेकिन फिर भी सब कुछ सभ्य और व्यवस्थित था. कोई भी हॉर्न नहीं बजा रहा था, आगे बढ़ने के लिए सब अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे.

बाद में डेट्रॉयट हवाईअड्डे पर भी मैंने एक छोटी सी घटना देखी. हवाईअड्डे के कैफ़े में एक व्यक्ति का सूट बैग मेज़ पर से नीचे गिर गया था जिससे बाकी लोगों को चलने में असुविधा हो रही थी. जिस व्यक्ति का बैग गिरा था उसकी नज़र इस पर नहीं पड़ी थी.

एक व्यक्ति ने बिना एक भी शब्द कहे वो सूट बैग उठाकर वापिस मेज़ पर रख दिया और जिस व्यक्ति का बैग था उसे इस बारे में कुछ पता भी नहीं चला. इस सब में सिर्फ़ कुछ सेकंड का समय लगा.

छवि

ये हैं अमरीकियों की सभ्यता और उदारता के कुछ उदाहरण. वो अमरीकी जिनकी सार्वजनिक छवि इससे बहुत अलग है.

अगले सप्ताह होने वाले अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव से बहुत से ऐसे लोग प्रभावित होंगे जो अमरीका में नहीं रहते.

और ऐसे कई लोग मानते हैं कि बहुत से ऐसे मुद्दे हैं जिनपर इस चुनाव में बहस होनी चाहिए. जैसे सैंडी तूफ़ान के मद्देनज़र जलवायु परिवर्तन बहस का मुद्दा क्यों नहीं है.

लेकिन बाहर के लोग इस चुनाव के मुद्दे तय नहीं कर सकते. पहले ही अमरीकियों और दुनिया के बीच ग़लतफ़हमियों की एक खाई है.

इसलिए मैं वही मुद्दे रिपोर्ट करूंगा जो मेरे सामने है, चाहे उसमें कितनी भी कमियां क्यों न हो. और उसी अमरीका के बारे में बताऊंगा जिसे मैं देख रहा हूं.

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