चंद वोटों से होगा किस्मत का फ़ैसला

  • 6 नवंबर 2012
फ़ाइल
Image caption बराक ओबामा और मिट रोमानी में कांटे की टक्कर

मंगलवार को होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में बराक ओबामा और मिट रोमनी के बीच कांटे की टक्कर है. आखिरी समय तक किसी को स्पष्ट बढ़त मिलती नहीं दिखी. दोनों के बीच हार जीत का अंतर बेहद कम रहने वाला है और ऐसे में कुछ सौ मतदाता ओबामा और रोमानी की किस्मत का फ़ैसला कर सकते हैं.

इस से पहले 2000 में जॉर्ज बुश और अलगोर के बीच मुक़ाबला इतना कड़ा साबित हुआ था. तब कुछ सौ मत ने बुश को राष्ट्रपति बनाया था. इस से पहले 1960 में रिचर्ड निक्सन और जॉन एफ़. केनेडी के बीच भी सख़्त मुक़ाबला हुआ था़. तब मुक़ाबला इतना नज़दीकी था कि जॉन केनेडी को काफी घंटों की देरी के बाद विजयी घोषित किया गया था.

रविवार को जारी किये गए वाशिंगटन पोस्ट और एबीसी न्यूज़ के एक सर्वे के मुताबिक दोनों उम्मीदवारों को 48 प्रतिशत वोट मिलने की सम्भावना है. इसी लिए आख़िरी पलों तक दोनों नेता उन राज्यों के दौरे पर हैं जहाँ अधिकतर मतदाताओं ने अब तक फैसला नहीं किया है कि वो वोट किसे देंगे.

इलेक्टोरल वोट करेंगे फ़ैसला

लेकिन ये सर्वेक्षण आम मतदाताओं की राय के ऊपर आधारित है. अमरीका में राष्ट्रपति का चुनाव इलेक्टोरल वोट के ज़रिए होता है. जीतने वाले उमीदवार को 270 इलेक्टोरल वोट की दरकार होती है.

अगर आम वोट अधिक लाने वाला उमीदवार 270 इलेक्टोरल वोट न हासिल कर सका तो उसकी हार निश्चित है. जैसा की 2000 में हुआ जब अलगोर ने आम वोटों में बढ़त हासिल की लेकिन इलेक्टोरल वोट में बुश से कम वोट हासिल किये और बुश विजयी घोषित हुए.

देश के 50 राज्यों में हर को उसकी आबादी के हिसाब से इलेक्टोरल वोट दिए गए हैं. उदाहरण के तौर पर वर्जिनिया को ले लीजिये. इस राज्य के पास 16 इलेक्टोरल वोट हैं.

वर्जिनिया ऐसा राज्य है जहाँ बहुमत ने अब तक फैसला नहीं किया है कि वो अपना वोट किसे देंगे. इसी लिए दोनों उमीदवार यहां के वोटरों को लुभाने की कोशिश में कमर कस कर लगे गुए हैं.

मान लीजिये की ओबामा इस राज्य में रोमनी से आम मतों में एक मत भी अधिक हासिल कर लेते हैं तो जीत उनकी होगी क्यूंकि उन्हें राज्य के सभी 16 इलेक्टोरल वोट मिल जायेंगे. इलेक्टोरल वोट में ओबामा इस समय रोमनी से थोड़े आगे बताये जाते हैं.इसी तरह से ओहायो राज्य भी दोनों उमीदवारों की किस्मत का फैसला कर सकता है.

चंद वोटों से होगा किस्मत का फ़ैसला

Image caption चंद मुठ्ठी मतदाता करेंगे अमेरिका के नये राष्ट्रपति का फ़ैसला.

इस के इलावा देश में चुनाव के दिन से कई हफ़्ते पहले वोट डालने की परंपरा है. अब तक ढाई करोड़ से अधिक लोग अपने मतों का इस्तेमाल कर चुके हैं. फ़ैसला न करने वाले राज्यों के इलावा बाक़ी सभी राज्यों के लोगों ने मन बना लिया है कि वो वोट किसे देंगे.

मिसाल के तौर पर वर्जिनिया के पड़ोस वाले राज्य मेरीलैंड में बहुमत ने ओबामा के हक में वोट डालने का मन बना लिया है. यही वजह है कि ओबामा वर्जिनिया में चुनावी सभा तो कर रहे हैं लेकिन मेरीलैंड में नहीं.

देश के अंदर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के पक्के समर्थक हैं, वे हिमायत आसानी से नहीं बदलते. आप ऐसे बहुत कम लोगों से मिलेंगे जो पहले रिपब्लिकन थे लेकिन अब ओबामा को वोट देने की सोच रहे हैं.

जिन लोगों ने अब तक अपने समर्थन का फ़ैसला नहीं किया है, बराक ओबामा और मिट रोमनी की किस्मत का फ़ैसला वही करने वाले हैं.

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