ओबामा की जीत से कितनी बदलेगी दुनिया?

  • 7 नवंबर 2012

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा अगले चार साल के लिए एक बार फिर राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं, लेकिन ओबामा की जीत का उन देशों पर क्या असर पड़ेगा जिनका अमरीका से सीधा लेना देना रहा है?

एक नज़र बीबीसी संवाददाताओं के विश्लेषण पर.

मध्यपूर्व

बीबीसी के मध्यपूर्व संपादक जेरमी ब्राउन के मुताबिक जीत के बाद दिए गए अपने भाषण में ओबामा ने अमरीकियों से कहा कि अफगानिस्तान में दस साल तक चला युद्ध अब खत्म होने वाला है, हालांकि मध्यपूर्व में बिगड़ते हालात ये दिखाते हैं कि अमरीका के लिए ये आखिरी सैन्य अभियान नहीं होगा. उन्होंने कहा कि अमरीका को आगे भी कड़े फैसले लेने होंगे.

सीरिया में छिड़ा युद्ध पड़ोसी देशों तक पहुंच रहा है और मुमकिन है कि दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद ओबामा सीरिया में विद्गोहियों के समर्थन में सीधे तौर पर सामने आएं.

इससे भी बड़ा फैसला ईरान को लेकर किया जाना है. अगले साल गर्मियों तक अगर अमरीका और उसके सहयोगी देश यह मान लेते हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार हैं तो राष्ट्रपति ओबामा को यह फैसला करना होगा कि वो ईरान के परमाणु केंद्रों पर हमला करेंगे या इसराइल को ऐसा करने की हरी झंडी देंगे.

अमरीका को अरब देशों के साथ नए सिरे से अपने संबंध परिभाषित करने होंगे. राष्ट्रपति ओबामा को यह ध्यान रखना होगा उनके पास भले ही सैन्य ताकत हो लेकिन मध्यपूर्व में अमरीका की राजनीतिक साख गिर रही है.

यूरोप

Image caption ओबामा के दोबारा चुने जाने से अमरीका-यूरोज़ोन की विदेश नीति और अर्थनीति में बड़े फेरबदल होने से बचे रहेंगे.

ब्रसेल्स में मौजूद बीबीसी संवाददाता क्रिस मॉरिस के मुताबिक अमरीकी चुनावी नतीजों की घोषणा के बाद ओबामा सहित यूरोप ने भी राहत की सांस ली है.

सभी पूर्वानुमानों और चुनावी सर्वेक्षणों में बराक ओबामा के दोबारा चुने जाने की बात कही गई थी लेकिन अब जब नतीजे सामने हैं तो ब्रसेल्स में राहत की लहर दौड़ गई है जिसकी वजह साफ है.

यूरोज़ोन में छाई मंदी के बीच अमरीका से बातचीत जारी रही है और ब्रसेल्स में छाई गहमागहमी के बीच कोई नहीं चाहता था कि अमरीका में सत्ता परिवर्तन से और नए समीकरण बनें.

ओबामा के दोबारा चुने जाने से अमरीका-यूरोज़ोन की विदेश नीति और अर्थनीति में बड़े फेरबदल होने से बचे रहेंगे.

चीन

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है उन्हें किसी बड़े बदलाव की कोई उम्मीद नहीं लेकिन अखबार के मुताबिक पश्चिम की लोकतांत्रिक व्यवस्था अब समाज के नेतृत्व के बजाय वोटरों को छलने पर आधारिक हो गई है. अखबार के मुताबिक चीन की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था ही सबसे बेहतर है.

अखबार के मुताबिक नई व्यवस्था में चीन के खिलाफ़ की जाने वाली गलत बातों पर अब रोक लगनी चाहिए.

बीजिंग में मौजूद बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशेन्स के मुताबिक चीन में गुरुवार को एक दशक बाद सत्ता परिवर्तन होगा और इससे ठीक पहले आए हैं अमरीका के चुनावी नतीजे. यही वजह है कि चीन का ध्यान अंदरूनी राजनीतिक गतिविधियों पर केंद्रित है.

आर्थिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच संबंध खराब रहे हैं. और बीजिंग में इस बात को लेकर चिंता है कि ओबामा एक बार फिर एशिया पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे. चीन की चिंताएं आगे भी जारी रहेंगी.

अफगानिस्तान

Image caption अफगानिस्तान में अमरीका का अभियान खत्म होने को है.

काबुल में मौजूद बीबीसी संवाददाता क्वेंटिन सॉमरविल के मुताबिक अफगानिस्तान में अमरीका का अभियान खत्म होने को है और अफगानिस्तान पर अमरीका की नीति राष्ट्रपति के बदलने से नहीं बदलती.

हालांकि ओबामा के सामने अब ये सवाल है कि अफगानिस्तान से सैन्य बलों को कितनी जल्दी निकाला जा सकता है. माना जा रहा है कि ओबामा 2014 तक अफगानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की संख्या कम करने की दिशा में और भी तेज़ी से काम करेंगे.

ईरान

ईरान में मौजूद बीबीसी संवाददाता मोहसिन असगारी के मुताबिक ईरान में लोगों को इस बात की आशंका थी कि मिट रोमनी की जीत का मतलब होगा ईरान के साथ युद्ध लेकिन ओबामा की वापसी के बाद लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

हालांकि ईरान के कुछ नेताओं का मानना है कि ओबामा की जीत से ईरान पर दबाव बढ़ेगा और वो इसराइल को बढ़ावा देने की नीति जारी रखेंगे.

पाकिस्तान

इस्लामाबाद में मौजूद बीबीसी के इलियास खान के मुताबिक पाकिस्तान की सेना का राजनीति पर खासा दबदबा है और रिपब्लिकन पार्टी के साथ लेना के हमेशा से सहज सबंध रहे हैं.

जबकि लोकतंत्र, आज़ादी और परमाणु ऊर्जा के मुद्दे पर डेमोक्रेट पार्टी के नेता बराक ओबामा की नीतियां उसे रास नहीं आई हैं.

विश्लेषकों का मानना है कि ओबामा की जीत के बाद पाकिस्तान पर दबाव बढ़ेगा और अमरीका चाहेगा कि पाकिस्तान अफगानिस्तान में अमरीका की नीति को समर्थन दे.

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