अकेले हैं तो क्या ग़म है...

  • 12 नवंबर 2012
सिंगल फीमेल
Image caption समाज में अविवाहित महिलाओं को भी सम्मानजनक स्वीकृति नहीं मिल पायी है

हम सब एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां जीवन की सबसे बड़ी खुशी और संतुष्टि उस इंसान को पाने में है जो हमें लगता है कि सिर्फ हमारे लिए बना हो.

और इसी दुनिया में उन लोगों के प्रति असंवेदनशील होने का भी रिवाज है जो अकेले हैं. इसका मतलब ये हुआ कि यहां किसी को भी अकेले या सबसे अलग रहने की अनुमति नहीं है.

अगर मैं अपने पूरे जीवन के सफर पर नज़र डालूं तो ये कह सकता हूं कि मैंने प्रेम में हार और जीत, दोनों का स्वाद चखा है.

कई बार बिल्कुल ही अंजाने लोगों ने मेरा साथ दिया है और तब मैंने खुद को 'सिंगल' भाग्यशाली व्यक्ति के रूप में देखा है.

मैंने कभी इन बातों को गंभीरता से नहीं लिया है. लेकिन कई बार दूसरों के कारण आप सोचने पर मजबूर हो जाते हैं. खासकर तब जब वे आपसे पूछते हैं कि क्या आपका कोई साथी नहीं है? और ऐसे सवाल अक्सर वो लोग पूछते हैं जो शादीशुदा हैं.

और तब मैं उन्हें जवाब देने का विफल प्रयास करता हूं. मसलन मुझे अब तक सही साथी नहीं मिला या मैं असामान्य हूं.

मैं जानता हूं कि वे लोग मेरे किसी भी जवाब से संतुष्ट नहीं होते और मैं केवल अपने अकेलेपन को ढंकने की कोशिश कर रहा हूं.

मैं जानता हूं कि ऐसे पति-पत्नी दांपत्य के सबसे ऊंचे किले में बैठे होते हैं. लेकिन फिर भी मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि वे क्यों एक दूसरे से साथ हैं?

क्या वे अकेले रहने से डरते हैं?

मैं जानता हूं कि मेरा इस तरह से सवाल करना अभद्रता कहलाएगा.

असफलता

पिछले सप्ताह मेरी एक दोस्त डेट पर गईं. जिस व्यक्ति से वो मिलने गई थी वो पहले तीन बार शादी कर चुका था और तीनों पत्नियों से उसे एक-एक बच्चा था.

हद तो तब हो गई जब उसने मेरी दोस्त से पूछा कि वो जीवन में असफल क्यों है?

और 'सिंगल' लोगों के बारे में पूर्वाग्रह पालने वालों में अन्य सिंगल लोग भी शामिल हैं. क्योंकि ऐसा माना जाता है कि हम सब हमारी कमियों के लिए ज़िम्मेदार हैं.

हाल में छपी एक किताब में यहां तक कहा गया है कि आज के समय में सबसे ज्य़ादा यौन संबंधों से वंचित वो लोग हैं जो अकेले हैं.

उदाहरण के तौर पर आप 'स्पिंस्टर' शब्द को लें. ये बहुत ही अपमानजनक शब्द है.

कुछ साल पहले उपन्यासकार कैरोल क्लयूलो ने अपनी ही पीढ़ी की एक 'स्पिंस्टर' महिला पाठक की कल्पना करते हुए उस पर एक किताब लिखी थी और उसको नाम दिया था 'स्पिंस्टा'.

उन्होंने ये किताब अपने प्रकाशकों को दी जो इसे पाकर काफी खुश हुए. किताब की कई स्तरों पर चर्चा हुई उसका काफी स्वागत भी किया गया.

बहुत सारे स्तंभकारों और प्रसिद्ध लोगों ने 'स्पिंस्टा' शब्द की काफी सराहना की और इसका प्रचार करने को एकमत हुए लेकिन किताब के लिए कुछ बातें उसके प्रकाशकों ने भी कही...और वो शब्द था 'नहीं.'

अंत में उस किताब का नाम बदलकर 'नॉट मैरिड' किया गया और तब उसे प्रकाशित किया गया.

स्पिंस्टर

जब मैं इस विषय पर औरतों से बात करता हूं तो उनके पास इससे जुड़ी कई बातें होती हैं, जो कई बार मज़ेदार भी होते हैं. लेकिन अगर इसी विषय पर अविवाहित या समलैंगिक पुरुषों से चर्चा की जाती है तो उनकी कहानी थोड़ी दुखद होती है.

कानूनी तौर पर हमें मान्यता दिए जाने के बाद भी, अगर समलैंगिक पुरुष बिना किसी साथी के हैं तो उनसे सफाई की उम्मीद की जाती है. जबकि ये बिल्कुल बेतुका है.

कैरोल किल्यूलो ने मुझे अपनी किताब में जॉर्ज क्लूनी जैसा एक 'मेल 'स्पिंस्टर' यानि 'अधेड़ अविवाहित पुरुष' कहा है जो मुझे थोड़ी राहत देता है.

लेकिन जब आप गूगल पर सर्च करेंगे तो वहां 'मेल स्पिंस्टर' से जुड़ी ऐसी कहानियां आपको मिल जाएंगी जो आपको परेशान कर देगी.

जैसा लंदन की ईवनिंग स्टैंडर्ड किताब में लिखा है. इसमें कहा गया है, ''पुरुष 'स्पिंस्टर' वो व्यक्ति है जिसकी उम्र पैंतीस साल से ज्य़ादा है. और जिसके जीवन में कई तरह के अंतर्विरोध हैं. ऐसे लोगों को एक शब्द में मनोरोगी कहा जाता है. समाज को ऐसे लोगों से डर लगता है जैसे अब तक अविवाहित महिलाओं से लगता रहा है.''

ये सुनने में बहुत ही डरावना लगता है कि किसी को भी सिंगल रहने का अधिकार नहीं है क्योंकि सिंगल होने का मतलब अकेला होना है, लेकिन जिन लोगों को सिर्फ सिंगल रह जाने की सोच से भी डर लगता है उन्हें हम क्या कहेंगे.

किसी भी सिंगल व्यक्ति का पक्ष लेने के लिए हमें शादीशुदा जोड़ों की आलोचना करनी पड़ेगी. हमें दांपत्य जीवन, समाज, धर्म, परिवार और इनसे जुड़ी फिल्में और संगीत का विरोध करना पड़ेगा.

जैसा कि फ्यूड कहते हैं, ''प्रेम में हमसे खुद को पूरी तरह से झोंक देने की उम्मीद की जाती है. क्या ये सज़ा देने जैसा नहीं है?''

Image caption तकनीकी समृद्धि ने कहीं ना कहीं हमें अकेले रहना सिखा दिया है

माइकल कॉब ने अपनी किताब सिंगल में प्लेटो द्वारा प्रेम की गई परिभाषा का वर्णन किया है जिसमें उन्होंने प्रेम को ऐसी तलाश बताई है जो किसी व्यक्ति को संपूर्ण बनाता है.

शायद सिंगल रहने वाले लोगों कि कोशिश अपनी मूल स्थिति को दोबारा पा लेने का होता है. जिसका मतलब ये भी होता है कि हम अपने आप में संपूर्ण हैं.

शायद हम जैसे लोग किसी से झूठे वादे नहीं कर सकते, शायद हम किसी के साथ झूठे बंधन में बंधने को तैयार नहीं है.

मैं अपने आपको और अपने जैसे कई अन्य लोगों को ज्य़ादा सकारात्मक तरीके से पेश करना चाहता हुं. मैं सिर्फ ये कहना चाहता हूं कि ये मेरे स्वभाव में ही नहीं है.

मैं अपने बचाव में ये भी कहना चाहूंगा कि हम जैसे लोगों के मन में प्यार को लेकर एक अलग किस्म की अवधारणा है जो शायद आसानी से हासिल ना हो पाए.

हम जैसी दुनिया में रह रहे हैं वहां प्रेम टिकाऊ नहीं है.

और तकनीकी समृद्धि ने कहीं ना कहीं हमें अकेले रहना सिखा दिया है और आज ज्य़ादा से ज्य़ादा लोग अकेले रहना पसंद कर रहे हैं.

इसलिए अब ज़रुरत ये है कि हम दंपति बनने के नुस्खों पर नहीं बल्कि इस बात पर ज्य़ादा कहानियां लिखें कि हम 'सिंगल' कैसे रह सकते हैं.

और सिंगल रहते हुए हम कैसे सम्मानपूर्वक ज़िंदगी जीते हुए बहुत खुश और संतुष्ट रह सकते हैं.

हालांकि मैं दुनिया में भी अकेले आया था लेकिन मुझे ये नहीं पता था कि मैं ताउम्र 'अकेला' रहूंगा.

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