जिन्हें था ओबामा की जीत का पता

Image caption क्या बराक-रोमनी के बीच नहीं थी कांटे की टक्कर!

डेमोक्रेट बराक ओबामा एक और कार्यकाल के लिए अमरीका के राष्ट्रपति बन गए हैं. लेकिन चुनाव और परिणाम घोषित होने के पहले भी तीन लोग थे जो ये जानते थे कि अमरीका के अगले राष्ट्रपति फिर से बराक ओबामा ही होंगे.

ड्रिव लिंज़र, नेट सिल्वर और सैम वांग की तिकड़ी ने पहले ही ये भविष्वाणी कर दी थी कि बतौर राष्ट्रपति अमरीका की पसंद इस बार भी ओबामा ही हैं.

वैसे, इन्हें भविष्यवक्ता तो कहना ठीक है लेकिन आप इन्हें पंडित नहीं कह सकते हैं क्योंकि लिंज़र, सिल्वर या फिर वांग इस शब्द से इत्तेफाक नहीं रखते.

इमोरी यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर लिंज़र खुद कहते हैं कि उन्होंने अपनी वेबसाइट ‘वोटामेटिक’ पर जून 2012 से ही ओबामा की जीत की बात लगातार रखी और वो किसी अंतर्मन की बात नहीं थी बल्कि ये सब सिर्फ तुलनात्मक आंकड़ों, तथ्यों और पुराने अनुभवों पर आधारित थे.

अब जरा एक नज़र लिंजर की वेबसाइट पर जून में डाले गए आंकड़ो पर डालते हैं. 23 जून की पोस्ट में उन्होंने ओबामा को 332 और रोमनी को 206 मत दिए थे.

ओबामा-332, रोमनी- 206

इसके कुछ महीनों बाद जब राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मादवार मिट रोमनी और बराक ओबामा पहली बार आमने-सामने हुए थे. सबसे महत्वपूर्ण बात ये थी कि इस पहली बहस में ओबामा का प्रदर्शन बेहद फीका था.

लेकिन जब लिंजर से उनकी भविष्यवाणी के बारे में दोबारा पूछा गया, तो उनका वही जवाब था. ओबामा-332 और रोमनी 206 ही रहा.

Image caption लोगों का अभिवादन करते अमरीकी राष्ट्रपति.

लिंजर कहते हैं, “चुनाव के दिन हमारे आंकड़े सही साबित हो रहे थे लेकिन हमें इससे जरा भी आश्चर्यचचकित नहीं होना चाहिए था.”

वो कहते हैं, “ये जीत साबित करता है कि आम लोगों की राय पर आधारित जो अध्ययन होता है वो काफी विश्वसनीय और सही होता है. इससे लोगों के मतदान वजहों को ठीक से जान पाते हैं और इसके लिए कोई भी दूसरी विधि जो आम तौर पर पंडित अपनाते हैं मसलन अंतर्मन की बाते कहना या फिर अंतर्ज्ञान से कुछ कहने की कोशिश करना, कारगर नहीं माना जा सकता.”

नेट सिल्वर जिन्होंने 'न्यूयॉर्क टाइम्स' में 538 ब्लॉग लिखे हैं और सैम वांग जो 'प्रिंसटन इलेक्शन' के संस्थापकों में एक हैं ने भी चुनाव की भविष्यवाणी के लिए आंकड़ों का सहारा लिया था.

सिल्वर मानते हैं कि जो लोग अभियान चला रहे होते हैं वो आंकड़ों पर ज्यादा भरोसा करते हैं बजाय भाषणबाजी और पंडित पोल के.

जीव विज्ञान के प्रोफेसर वांग कहते हैं, “कई सर्वेक्षकों की वेबसाइट्स पर ओबामा को जीतता हुआ दिखाया जा रहा था और इसके लिए हजार तरीके के मॉडल के इस्तेमाल हुए थे.”

वांग का मानना है कि तकरीबन हर वेबसाइट्स पर परिणाम दिखाने के लिए अलग फार्मूले का इस्तेमाल किया गया था बजाय इसके कि ऐतिहासिक प्रचलन और आर्थिक आंकड़ों और दूसरे कारणों पर केंद्रित करने के.

वैसे पत्रकारों और सर्वेक्षकों ने लिंजर, सिल्वर और वांग के काम को राजनीतिक तौर पर पक्षपातपूर्ण बताया था. बहरहाल, ओबामा की जीत ने इन सब बातों को खारिज कर दिया है.

टिप्पणीकार मानते हैं कि लिंजर, वैंग और सिल्वर के आंकड़े गणित पर आधारित थे जबकि ज्यादातर सर्वेक्षक राजनीतिक बंदिश से घिरे दिखे.

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