चीन की राजनीति में कहां हैं महिलाएं?

Image caption शिक्षा और काबिलियत के बावजूद लिन को राजनीति में जाने की इच्छा नहीं

आकर्षक जूते पहने और करीने से संवारे बालों वाली 22 वर्षीय लिन शुआंग चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में निर्णायक भूमिका निभाने वाले नेताओं जैसी बिल्कुल नहीं लगतीं. लेकिन वो पिछले चार साल से अपने करियर को बेहतर बनाने की उम्मीद पाले पार्टी की सदस्यता हासिल करने के लिए प्रयासरत हैं.

लिन फर्राटेदार अंग्रेज़ी बोल सकती हैं और बीजिंग के फॉरेन अफ़ेयर्स यूनिवर्सिटी में अध्ययन कर रही हैं. वो कम्युनिस्ट पार्टी के यूथ लीग की सक्रिय सदस्य हैं और राजनीति को लेकर बहुत उत्साही नज़र आती हैं.

इसी साल एक सेमेस्टर के लिए जब वो न्यूयॉर्क के कोलंबिया विश्वविद्यालय में थीं तो अपने परिसर में राष्ट्रपति बराक ओबामा को देखकर बहुत रोमांचित हो गई थीं. वो हंसते हुए बताती हैं, "राष्ट्रपति को इतने क़रीब से देखना बेहद सुखद अनुभूति थी."

लिन जैसी प्रतिभावान और योग्य लड़की अगर किसी दूसरे देश में होती तो वो सरकार में काम करने के लिए एक प्रमुख उम्मीदवार होती या सत्ता के संचालन में अहम भूमिका निभा रही होती लेकिन चीन में लिन ऐसे विकल्पों के बारे में सोच भी नहीं सकतीं.

वो कहती हैं,"मैं चीन में राजनीति की संस्कृति के बारे में ज़्यादा नहीं जानती, लेकिन मुझे लगता है कि वहां पुरुषों का ही वर्चस्व है."

इसीलिए लिन घरेलू हिंसा के खिलाफ़ संघर्ष कर रही एक संस्था के लिए काम करना चाहती हैं.

पुरुष प्रधान समाज

ये केवल लिन की कहानी नहीं, चीन की सभी महिलाएं राजनीति के बारे में आमतौर पर यही धारणा रखती हैं.

परंपरागत रूप से चीन के पुरुष प्रधान समाज में महिला राजनेता होना विलक्षण बात ही है.

चीन के इतिहास में अब तक जो महिलाएं सबसे ताकतवर रही हैं उनमें एक थीं महारानी डोवाजर सिक्शी और दूसरी थीं माओत्से तुंग की पत्नी जियांग क़िंग.

चीन की राजनीति का ये सच फिलहाल तो बदलता नज़र नहीं आता. और इस बार भी जब चीन में सत्ता परिवर्तन होगा तो माना जा रहा है कि नई पोलित ब्यूरो की स्टैंडिंग कमेटी जो कि चीन के शासन को चलाती है, उसमें पूरी तरह पुरुषों का ही बोलबाला रहेगा.

वैसे ऐसी अफ़वाहें हैं कि लियू यान्डोंग एक ऐसी प्रखर राजनेता हैं जिन्हें स्टैंडिंग कमेटी में जगह मिल सकती है लेकिन विश्लेषक ऐसी संभावना से इनकार ही करते हैं.

लेकिन अगर वो स्थाई समिति की सदस्यता हासिल करने में क़ामयाब हो भी जाती हैं तो लिन शुआंग इससे बहुत प्रभावित होने वाली नहीं हैं."लियू यान्डोंग आज जो कुछ भी हैं, अपने पिता की वजह से हैं क्योंकि वो पार्टी के शक्तिशाली व्यक्ति थे."

लिन इस बात से दुखी हैं कि एक बार फिर चीन की सबसे ताकतवर महिला की क़ामयाबी उनकी काबिलियत की वजह से नहीं बल्कि उनके पिता लियू रुईलॉन्ग की वजह से है जो कि चीन की सांस्कृतिक क्रांति के समय देश के बड़े कृषि अधिकारी थे.

लिन कहती हैं कि लियू अगर एक साधारण पृष्ठभूमि से ऐसे राजनीतिक मुकाम पर पहुंची होतीं तो उन्हें ज्यादा अच्छा लगता और वो सोच पातीं कि वो भी राजनीति में आगे बढ़ सकती हैं.

'बाइजियू' संस्कृति

Image caption कुछ लोगों को लगता है कि लियू यांडोंग स्थायी समिति में स्थान बना लेंगी

चीन में अब तमाम महिलाएं कारोबार और शिक्षा के क्षेत्र में क़ामयाब हो रही हैं. कुछ महिलाएं सरकारी पदों पर भी काफी सफल रही हैं.

झेजियांग विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र और लोक प्रशासन के प्रोफेसर गुओ जियाजुआन के मुताबिक राजनीति में चीनी महिलाओं की भागीदारी के मामले में 1975 में चीन का स्थान विश्व में 12वां था जो कि आज खिसककर 64वें स्थान पर पहुंच गया है.

ऐसा निर्देश है कि चीनी संसद की कम से कम 22 फीसदी सीटें महिलाओं को दी जानी चाहिए. लेकिन हक़ीक़त में 21.3 फीसदी सीटों पर ही महिलाएं विद्यमान हैं.

प्रोफ़ेसर गुओ का कहना है कि महिलाओं की भागीदारी में गिरावट की वजह ये है कि उनका कोटा अनिवार्य नहीं है.

इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए प्रोफे़सर गुओ कहते हैं कि सरकार में आगे बढ़ने के लिए वरिष्ठों की अनुशंसा चीन में ज़रूरी होती है.

चीन में महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली लेता हॉन्ग फिन्चर कहती हैं कि चीन में शक्तिशाली बनने के लिए ये ज़रूरी है कि आप दावतों में शिरकत करें और जमकर नेटवर्किंग करें. इसके साथ ही चीन की खास शराब बाइजियू का भी सेवन करें.

समझौते

एक महिला के लिए ये सब कर पाना आसान नहीं होता. उनसे पारंपरिक रूप से यही उम्मीद की जाती है कि वो घर पर ही रहें और परिवार की देखभाल करें.

Image caption चीन में दावतों में शिरकत कर और नेटवर्किंग के ज़रिए ही आगे बढ़ा जा सकता है - प्रोफ़ेसर गुओ

और अगर कोई महिला अपने बॉस को प्रभावित करने के लिए घंटों प्रयासरत रहती है तो ये सिलसिला शराब पीने तक ही सीमित नहीं रह जाता. उन्हें और भी समझौते करने पड़ते हैं.

ये अब एक खुली सच्चाई है कि चीनी अधिकारी अपने रसूख के प्रतीक के रूप में ऐसी महिलाओं की एक फेहरिस्त रखते हैं जिनसे वो मर्यादा के बाहर भी संबंध रख सकते हैं.

पूर्व रेल मंत्री लियू शिजुन की भ्रष्टाचार के आरोप में पद से हटाए जाने से पहले ऐसी 18 उपपत्नियां थीं.

इसी महीने चीन के शक्तिशाली राजनेता बो शिलाई को कई महिलाओं के साथ अवैध संबंध रखने के आरोप में कम्युनिस्ट पार्टी से निकाल दिया गया था.

प्रोफेसर गुओ कहते हैं कि ऐसे राष्ट्रीय माहौल में लियू यांगडोंग अगर चीनी सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचती हैं तो ये इस बात का संकेत होगा कि देश की सरकार महिलाओं की स्थिति में सुधार लाना चाहती है.

लेकिन लिन शुआंग जैसी छात्राएं चीन में सांकेतिक नहीं वास्तविक बदलाव चाहती हैं. वो कहती हैं,"अगर पार्टी महिलाओं का कोटा बढ़ाती है या महिलाओं को और अधिकार देती है तो शायद कम्युनिस्ट पार्टी पर मेरा भरोसा थोड़ा और बढ़ जाएगा."

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