चार साल में पहली बार पाकिस्तान में फांसी

  • 15 नवंबर 2012
फांसी का फंदा
Image caption पाकिस्तान में चार साल में पहली फांसी हुई

पाकिस्तान में एक पूर्व सैनिक को फांसी पर लटकाया गया है. पिछले चार में ये पहला मामला है जब वहां किसी व्यक्ति को फांसी दी गई है.

मोहम्मद हुसैन को अपने एक वरिष्ठ अधिकारी की हत्या करने के लिए चार साल पहले मौत की सजा सुनाई गई थी.

जेल के उप अधीक्षक मोहम्मद मंशा ने बीबीसी को बताया कि मोहम्मद हुसैन को फांसी दिए जाते समय सेना और न्यायापालिका के अधिकारी भी मौजूद थे.

उन्हें गुरुवार को पंजाब प्रांत की एक जेल में फांसी दी गई. उनकी सभी दया याचिकाओं को खारिज कर दिया गया.

पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने एक सैनिक को फाँसी दिए जाने की आलोचना की है.

नियम का अपवाद

संवादताताओं का कहना है कि चार साल पहले पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सत्ता में आने के बाद से फांसी दिए जाने पर अघोषित तौर पर रोक लगाई गई थी.

हर तीन महीने में राष्ट्रपति कार्यालय से एक पत्र जारी होता है कि सभी मौत की सजाओं पर रोक है. पिछले कुछ सालों से नियमित रूप से ऐसा होता आया है.

संवाददाताओं का कहना है कि ये अभी स्पष्ट नहीं है कि हुसैन के मामले को क्यों इस नियम का अपवाद माना गया. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इसकी वजह हो सकती है कि उन पर एक सैन्य अदालत में मुकदमा चला था.

माना जाता है कि पाकिस्तान में लगभग ऐसे आठ हजार लोग हैं जिन्हें मौत की सजा मिली हुई है. मानवाधिकार समूहों का कहना है कि ये आंकड़ा दुनिया भर में सबसे ज्यादा मौत की सजा पाने वाले लोगों में से एक है.

पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों का कहना है कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने दिसंबर 2011 में हुसैन की दया याचिका खारिज कर दी थी.

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