मिलिए दुनिया के 'सबसे गरीब' राष्ट्रपति से

  • 16 नवंबर 2012
Image caption दुनिया के सबसे गरीब राष्ट्रपति के तौर पर जाने जाते हैं जोस मुजीका.

जोस मुजीका उरुग्वे के राष्ट्रपति हैं लेकिन उन्हें देखकर किसी को भी ये विश्वास नहीं होता. वजह साफ़ है वो एक गरीब किसान की तरह अपना जीवन जीते हैं.

एक फार्म हाउस में तीन टांग के अपने कुत्ते की रखवाली के भरोसे मुजीका अपना जीवन गुज़ार रहे हैं जो किसी भी राष्ट्रप्रमुख के लिए लगभग असंभव है.

एक पंक्ति में कहें तो, उनकी जीवन शैली कुछ इस प्रकार है, एक जीर्ण-शीर्ण फार्म हाउस में वो निहायत कम सुविधाओं के साथ रहते हैं, जहां कुएं से पानी भरा जाता है और कपड़े भी बाहर खुले में ले जाते हैं.

मुजीका राष्ट्रपति हैं लिहाज़ा सुरक्षा के नाम पर उन्हें दो पुलिस अधिकारी मिले हैं और निजी स्तर पर वो मनुएला नाम का एक कुत्ता अपने साथ रखते हैं.

‘मैं सनकी सही’

ऐसा नहीं है कि उरुग्वे में राष्ट्रपति को सुविधाओं के नाम पर कुछ दिया नहीं जाता बल्कि, जोस खुद अपनी मर्जी से इस तरह से रहते हैं.

उन्होंने, उरुग्वे की तरफ से दिए गए आलीशान घर को नकार कर अपनी पत्नी के छोटे से फार्म हाउस में रहना पसंद किया जो राजधानी मोनतेविडियो के पास है.

जोस अपनी पत्नी के साथ इस फार्म हाउस में रहते हैं और फूलों की खेती भी करते हैं.

वो कहते हैं, “मुमकिन है मैं पागल और सनकी दिखता हूं लेकिन ये तो अपने-अपने ख्याल हैं.”

जोस जो बोलते हैं उसे हूबहू अपनाने में विश्वास रखते हैं.

जोस, अपनी तनख्वाह का 90 फीसद दान कर देते हैं जो तकरीबन 12 हजार डॉलर के आस-पास है.

Image caption जोस की पत्नी का छोटा सा घर जहां दोनों पति-पत्नी रहते हैं.

अपने वेतन से 775 डॉलर वो उरुग्वे के गरीब और छोटे उद्दमियों को दान कर देते हैं.

फार्म हाउस में पुरानी सी कुर्सी पर बैठे जोस कहते हैं, “मेरे पास जो भी है मैं उसमें जीवन गुजार सकता हूं.”

जोस का जीवन

जोस 'क्यूबा क्रांति' से निकले हुए नेता हैं और 2009 में उरुग्वे के राष्ट्रपति चुने गए.

लेकिन 1960 और 1970 में वो उरुग्वे में गुरिल्ला संघर्ष के सबसे बड़े नेता भी हैं और उन्होंने अपने सीने पर छह बार गोलिया खाई हैं.

उन्होंने चौदह साल जेल में काटे हैं. जोस को 1985 में तब जेल से रिहा किया गया जब देश में लोकतंत्र की वापसी हुई.

उनकी जिंदादिली की एक मिसाल मशहूर है. वो कहते हैं, “मैं सबसे गरीब राष्ट्रपति कहलाता हूं, लेकिन मैं समझता हूं कि मैं गरीब नहीं हूं. गरीब तो वो होते हैं जो अपना पूरा जीवन खर्चीली जीवशैली के लिए काम करने में बिता देते हैं और अधिक से अधिक कमाने की इच्छा रखते हैं.”

वो कहते हैं, ''ये पूरा मामला आजादी का है. अगर आपकी बहुत ज्यादा जरूरतें नहीं है, तो कोई मतलब नहीं है कि जीवन भर काम ही करते रहें. अगर आपके अंदर इस तरह की भूख नहीं होगी तो आपके पास वक्त ही वक्त होता है.”

आलोचना

हालांकि इन सबके बावजूद जोस की आलोचना भी जमकर होती है.

खासतौर से उरुग्वे का विपक्षी दल ये मानता है कि हालिया वर्षों में देश के आर्थिक हालात खराब हुए हैं.

जोस के विरोधी मानते हैं कि सार्वजनिक सेवा, स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर में कोई सुधार नहीं हुआ है.

गर्भपात कानून में बदलाव के लिए भी जोस की काफी निंदा हो रही है.

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