रिमशा मसीह के ख़िलाफ़ मामला ख़ारिज

रिमशा का फाइल फोटो
Image caption अदालत ने रिमशा को ईशनिंदा के आरोप से बरी कर दिया है.

पाकिस्तान में कथित रूप से क़ुरान जलाने की अभियुक्त 14 वर्षीय ईसाई किशोरी रिमशा मसीह के ख़िलाफ़ ईशनिंदा का मामला पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है.

रिमशा के वकील अकमल भट्टी ने बीबीसी को बताया कि इस मामले में क़ानून का दुरुपयोग किया गया और उनकी मुवक्किल रिमशा पूरी तरह से निर्दोष हैं.

रिमशा को इसी साल अगस्त में गिरफ़्तार किया गया था. एक मौलवी हफ़ीज़ मोहम्मद ख़ालिद चिश्ती ने उन पर क़ुरान जलाने का आरोप लगाया था.

लेकिन अब उन मौलवी पर रिमशा के ख़िलाफ़ कथित झूठे सुबूत देने का मुक़दमा चलाया जा रहा है.

कट्टरपंथी मुस्लिमों से संभावित ख़तरे के मद्देनज़र रिमशा को बेहद कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था वाली जेल में रखा गया था.

'रिमशा के साथ न्याय हुआ'

समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़, पाकिस्तान के संघीय मंत्रिमंडल में एकमात्र ईसाई मंत्री पॉल भट्टी ने पुष्टि की है कि हाईकोर्ट ने रिमशा को ईशनिंदा के आरोपों से बरी कर दिया है.

उन्होंने एएफ़पी से कहा, ''मैं इस फ़ैसले का स्वागत करता हूं. इस मामले में न्याय हुआ है और अदालत ने इस देश के क़ानून को बरक़रार रखा है.''

उन्होंने कहा, ''इससे अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में पाकिस्तान के लिए सकारात्मक छवि का संदेश जाएगा कि यहां सभी को न्याय मिलता है और समाज में सहिष्णुता है.''

रिमशा के परिवार को भी पुलिस ने एहतियातन हिरासत में लिया था और बाद में छोड़ दिया था.

इसके बाद रिमशा के परिवार को जान से मारने की धमकियां मिली थी जिसकी वजह से पूरे परिवार को कहीं छुपना पड़ा था.

मामला सामने आने के बाद रिमशा को पूरी दुनिया भर से भारी समर्थन मिला था.

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