मित्तल को फ़्रांस सरकार की 'धमकी'

 बुधवार, 28 नवंबर, 2012 को 12:08 IST तक के समाचार
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लक्ष्मी निवास मित्तल फ़्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद से मिले

फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने ये कहने के बाद भारतीय मूल के उद्योगपति लक्ष्मी निवास मित्तल से मुलाकात की है कि वो मित्तल से उनके एक संयंत्र के राष्ट्रीयकरण किए जाने पर बात करेंगे.

ओलांद और मित्तल की इस मुलाक़ात पर दुनिया भर की निगाहें लगी हुई थीं. ओलांद ने कहा कि संयंत्रों का राष्ट्रीयकरण मित्तल से उनकी बातचीत का एक अहम मुद्दा होगा.

मुलाक़ात से पहले राष्ट्रपति ओलांद ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, ''फ़्लोरेंज की स्थिति को लेकर हम लोग चिंतित है क्योंकि इस बात का बहुत ख़तरा है कि ये फ़र्नेस (भट्टी) बंद हो जाएंगी. लक्ष्मी मित्तल की यही मंशा है और हम लोगों का कहना है कि कुछ दूसरे प्रस्ताव भी हैं.''

राष्ट्रपति से मुलाक़ात करने के लिए लक्ष्मी मित्तल राष्ट्रपति भवन एलीज़े पैलेस के पिछले दरवाज़े से दाख़िल हुए और वहीं से निकल गए. बीबीसी संवाददाता क्रिश्चियन फ़्रेज़र के अनुसार दोनों की मुलाक़ात में क्या हुआ इसका कोई ब्यौरा अभी तक सामने नहीं आया है.

विवाद

"फ़्लोरेंज की स्थिति को लेकर हमलोग चिंतित है क्योंकि इस बात का बहुत ख़तरा है कि ये फ़र्नेस (भट्टी) बंद हो जाएंगे. लक्ष्मी मित्तल की यही मंशा है और हमलोगों का कहना है कि कुछ दूसरे प्रस्ताव भी हैं."

फ़्रांस्वा ओलांद, फ़्रांस के राष्ट्रपति

दरअसल इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब लक्ष्मी मित्तल की कंपनी आर्सेलर मित्तल ने अक्तूबर में ऐलान किया कि वो देश के उत्तर पूर्व के शहर फ्लोरेंज में स्थित कंपनी के इस्पात संयंत्र के दो फ़र्नेस (भट्टी) को बंद करना चाहते हैं.

कंपनी के अनुसार दोनों भट्टियाँ पहले से ही निष्क्रिय हैं और आर्थिक तंगी के इन दिनों में दोनों भट्टियों को चलाना मुश्किल है.

कंपनी ने सरकार को 60 दिनों के अंदर कोई ख़रीदार ढ़ूंढ़ने को कहा जिसकी मियाद शनिवार को ख़त्म हो रही है. मित्तल के इस फ़ैसले पर फ़्रांस की सरकार ने नाराज़गी जताई है क्योंकि इससे 629 मज़दूरों के बेकार हो जाने का ख़तरा है.

फ़्रांस सरकार का कहना है कि फ़र्नेस बेचने का फ़ैसला कर मित्तल 2006 में किए गए वादे का उल्लंघन कर रहे हैं. सरकार के अनुसार 2006 में आर्सेलर मित्तल कंपनी ने वादा किया था कि वो फर्नेस को चलाते रहेंगें.

आर्सेलर मित्तल का इनकार

लेकिन कंपनी ने सरकार के इस आरोप को नकार दिया है.

क्लिक करें फ़्रांस सरकार ने कहा है कि ये दोनों संयंत्र लाभ की स्थिति में हैं ऐसे में इसे नहीं बेचा जाना चाहिए.

इसके अलावा फ़्रांसीसी सरकार में औद्योगिक मामलों के मंत्री अर्नॉड मोंटेबर्ग ने इस पूरे मसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि अगर मित्तल अपने इन फ़र्नेस को बंद करते हैं तो उन्हें अपना पूरा प्लांट बेचना होगा.

मंत्री अर्नॉड मोंटेबर्ग ने आर्सेलर मित्तल कंपनी पर 'झूठ बोलने' और 'देश का अपमान' करने का आरोप लगाया.

मोंटेबर्ग ने मित्तल को देश से बाहर का रास्ता दिखाने की भी घोषणा की थी लेकिन बाद में उन्होंने अपना ये बयान वापस ले लिया था.

"आप लोग लंदन में आकर कारोबार करिए. लंदन दुनिया भर की व्यापारिक राजधानी है. लंदन स्टॉक एक्सचेंज में 73 भारतीय कंपनियां पंजीकृत हैं. भारतीय कंपनियां अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार में 53 फ़ीसदी हिस्सा लंदन से निकालती हैं. लंदन की बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था दुनिया भर में सबसे बेहतरीन है"

बोरिस जॉन्सन, मेयर, लंदन

लेकिन मित्तल ने पूरा प्लांट बेचने से इनकार किया है और कहा है कि इससे 20 हजार लोगों पर असर पड़ेगा. फ्रांसीसी सरकार के इस क़दम का काफ़ी विरोध हो रहा है.

विपक्ष के एक सदस्य ने बताया, ‘हम जानते हैं कि ओलांद अमीरों को पसंद नहीं करते. लेकिन अब उनकी सरकार कंपनियों को निशाना बना रही है और हमें धनी निवेशकों के जाने का नुकसान उठाना होगा.’

राष्ट्रपति ओलांद और लक्ष्मी मित्तल ऐसे समय में मिले हैं जब देश में बेरोज़गारी के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं. ताज़ा आंकड़े अप्रैल 1998 के बाद सबसे ज़्यादा बेरोज़गारी को दर्शाते हैं.

अक्तूबर में श्रम मंत्रालय के ज़रिए जारी किए गए आंकड़े के अनुसार लगभग 31 लाख लोग बेकार हैं और जिन्हें काम की तलाश है.

आर्थिक मंदी का सामना कर रहे यूरोप के सभी देश अपने यहां निवेशकों को आकर्षित करने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. लेकिन फ्रांस की सरकार इसके उलट राह पर चलती दिख रही है.

उधर दूसरी ओर लंदन के मेयर बोरिस जॉन्सन ने भारतीय कारोबारियों से दिल्ली में बातचीत करते हुए कहा, ‘आप लोग लंदन में आकर कारोबार करिए. लंदन दुनिया भर की व्यापारिक राजधानी है. लंदन स्टॉक एक्सचेंज में 73 भारतीय कंपनियां पंजीकृत हैं. भारतीय कंपनियां अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार में 53 फ़ीसदी हिस्सा लंदन से निकालती हैं. लंदन की बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था दुनिया भर में सबसे बेहतरीन है.’

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