हेडली और राणा को जनवरी में होगी सज़ा

डेविड हेडली
Image caption डेविड हेडली ने कई बार भारत का दौरा किया था

मुंबई में 26 नवंबर को हुए हमले में शामिल होने के आरोप में लश्कर-ए-तैबा चरमपंथी डेविड कोलमैन हेडली को 17 जनवरी को सज़ा सुनाई जाएगी.

जबकि हेडली के साथी तहव्वुर राणा को 15 जनवरी, 2013 को सज़ा सुनाई जाएगी.

अमरीका में शिकागो की एक अदालत ने पाकिस्तानी मूल के अमरीकी नागरिक हेडली के बारे में ये फ़ैसला किया है. हेडली को 26/11 मुंबई हमलों में शामिल होने का दोषी पहले ही क़रार दिया जा चुका है.

तहव्वुर राणा को पहले चार दिसंबर, 2012 को सज़ा सुनाई जानी थी.

शिकागो अदालत के प्रवक्ता रैनडल सैमबॉर्न ने कहा कि शिकागो ज़िला न्यायधीश हैरी लेनिनवेबर दोनों को मुंबई हमलों की साज़िश में शामिल होने और डेनमार्क के एक अख़बार पर हमला करने की योजना बनाने के लिए सज़ा सुनाएंगे.

रैंडल का कहना था, ''राणा की सज़ा की घोषणा की तारीख़ में बदलाव किया गया है. उन्हें अब चार दिसंबर, 2012 की बजाए 15 जनवरी, 2013 को सज़ा सुनाई जाएगी. उन दोनों को सज़ा सुनाए जाने संबंधी सुनवाई डिर्कसेन संघीय अदालत के ज़िला न्यायाधीश हैरी लेनिनवेबर के समक्ष सुबह नौ बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी.''

52 वर्षीय हेडली ने चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तैबा के लिए मुंबई हमलों के दौरान निशाना बनाए गए सभी ठिकानों की रेकी की थी, यानी उन्होंने पहले जाकर उस योजना के कारगर होने का जायज़ा लिया था.

मुंबई हमला

भारत ये कहता रहा है कि पाकिस्तान की धरती से सक्रिय लश्कर-ए-तैबा ने ही मुंबई हमलों को अंजाम दिया था.

अमरीकी जांच एजेंसी एफ़बीआई ने इस केस की छानबीन के दौरान हेडली पर जो आरोप लगाए थे, हेडली ने अदालत में मुक़दमे की सुनवाई के दौरान उन सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया था.

हेडली को भारत में सार्वजनिक स्थानों पर बम हमलों की साज़िश रचने और भारत में अमेरीकी नागरिकों की हत्या से संबंधित छह आरोपों में सज़ा-ए-मौत मिल सकती थी, लेकिन उसने एफ़बीआई के साथ सज़ा में छूट संबंधी समझौता कर लिया.

इस समझौते के तहत हेडनी ने जांच में सहयोग करने और सरकारी गवाह बनने की बात स्वीकार की थी.

राणा को जूरी ने 10 जून, 2011 को दोषी ठहराया था।

हेडली के साथी तहव्वुर राणा पर भी मुंबई हमलों की साज़िश में शामिल होने और डेनमार्क के एक अख़बार पर हमले की साज़िश रचने का आरोप लगाया गया था लेकिन अदालत में सुनवाई के दौरान मुंबई हमलों की साज़िश में शामिल होने के आरोप से उन्हें बरी कर दिया गया था जबकि अदालत ने उन्हें डेनमार्क के अख़बार पर हमला की योजना बनाने का दोषी क़रार दिया था.

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