इसरायल पश्चिमी तट में करेगा निर्माण

 शनिवार, 1 दिसंबर, 2012 को 12:18 IST तक के समाचार
पश्चिमी तट पर यहूदी बस्ती के निर्माण की फाइल फोटो

फलस्तीनियों का कहना है कि शांति वार्ता शुरु करने के लिए कब्ज़े वाले इलाकों में यहूदी बस्तियों का बनना बंद होना चाहिए.

इसरायल ने कब्ज़े वाले पूर्व येरुश्लम और पश्चिमी तट में 3000 और रिहाइशी इकाइयां बनाने का फैसला किया है.

इसरायली अधिकारियों ने ये भी कहा है कि 1000 इकाइयों की योजनाओं को मंज़ूरी देने की प्रक्रिया भी तेज़ की जा रही है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में फलस्तीनियों को ग़ैर-सदस्य पर्यवेक्षक राष्ट्र का दर्जा मिलने के एक दिन बाद इसरायल ने ये कदम उठाया है.

इसरायली अख़बार हारेट्ज़ के मुताबिक नई रिहाइशी इकाइयों में से कुछ येरुशलम और माले अदुमिम बस्ती के बीच बनाई जाएंगी.

फलस्तीनी प्राधिकरण ने कहा है कि जब तक इसरायली बस्तियां बनाने पर रोक नहीं लगती, तब तक वो शांति वार्ता में शामिल नहीं होगा.

उधर,अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने अधिकृत फलस्तीनी भूमि पर 3000 रिहायशी मकान बनाने के फैसले की निंदा की है. उन्होंने कहा कि इसरायल के इस क़दम से शांति के प्रयासों को ठेस पहुंचेगी.

ई 1 नाम के इलाके में यहूदी बस्तियां बनाने की योजनाओं का फलस्तीनी कड़ा विरोध करते हैं. फलस्तीनियों का कहना है कि इससे पश्चिमी तट दो हिस्सों में बंट जाएगा और एक समूचे फलस्तीनी राष्ट्र के निर्माण में बाधा आएगी.

इसरायल की प्रतिक्रिया

येरुशलम में मौजूद बीबीसी संवाददाता केविन कॉनली कहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा फलस्तीनी प्राधिकरण का दर्जा बढ़ाए जाने के बाद ये कदम इसरायल के ग़ुस्से का पहला संकेत है. वो ये भी कहते हैं कि फलस्तीनियों को इस या इस जैसे ही किसी और कदम की पहले से ही उम्मीद रही होगी. लेकिन इसरायल का ये फैसला एक बार फिर दर्शाता है कि यहूदी बस्तियों के मामले पर दोनों पक्षों के बीच गहरी खाई है.

नवंबर की शुरुआत में इसरायली विदेश मंत्रालय के एक पत्र में कहा गया था कि फलस्तीनियों की संयुक्त राष्ट्र में पर्यवेक्षक राष्ट्र की मांग पर मतदान, "एक लाल पंक्ति पार करना है जिसके लिए सबसे कठोर इसरायली प्रतिक्रिया ज़रूरी होगी."

फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास

संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीनी प्राधिकरण को ग़ैर-सदस्य पर्यवेक्षक राष्ट्र का दर्जा हासिल हो गया है.

पश्चिमी तट और पूर्व येरुशलम पर इसरायली कब्ज़े के बाद से वहां बनाई गई 100 से ज़्यादा बस्तियों में पांच लाख यहूदी रहते हैं. अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत ये बस्तियां ग़ैरक़ानूनी हैं लेकिन इसरायल ने हमेशा इससे हमेशा इनकार किया है.

शांति वार्ता पर असर

नया दर्जा मिलने के बाद फलस्तीनी अब संयुक्त राष्ट्र में बहसों में हिस्सा ले सकते हैं और उनके अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय जैसी संस्थाओं में शामिल होने की संभावना भी बढ़ गई है.

फलस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा था कि ये कदम इसरायल के साथ "दो-राष्ट्र उपाय को बचाने का आखिरी मौका" था.

इस मुद्दे का स्थाई समाधान निकालने के लिए दोनों पक्षों के बीच दो दशकों से चल रही बातचीत का अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है. दोनों के बीच आखिरी बार वर्ष 2010 में हुई सीधी बातचीत भी बेनतीजा रही थी.

फलस्तीनी वार्ताकार इस बात पर ज़ोर डालते रहे हैं कि कब्ज़े वाले इलाकों में यहूदी बस्तियां बनना बंद होने के बाद ही वो सीधी बातचीत फिर से शुरु करने के लिए तैयार होंगे. लेकिन इसरायल का कहना है कि बातचीत बिना शर्त होनी चाहिए.

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