चमकते चीन में क्या है गरीबों का हाल

  • 12 दिसंबर 2012
चीन में गरीबी
Image caption चीन में करोडों लोग अब भी गरीबी में जी रहे हैं

अगले दस साल तक चीन को चलाने वाले नेताओं के नामों की घोषणा पिछले महीने हो गई. उन्हें विरासत में ऐसी अर्थव्यवस्था मिली है जो सालाना सात प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है, लेकिन अमीर-गरीब की खाई पाटना उनके लिए एक बड़ी चुनौती है.

पिछले तीन दशकों के दौरान चीन में 40 करोड़ लोगों को गरीबी से निकाला गया है, और कुछ लोगों को तो बहुत फायदा हुआ है. लेकिन इससे असमानता भी बहुत बढ़ी है.

चीन के सबसे गरीब प्रांत कुईचोऊ के एक गांव में रहने वाले 70 वर्षीय लु चिखुआन इस असमानता को यूं बचान करते हैं, "मैंने टीवी पर देखा है कि अमीर कैसे अच्छे घरों में रहते हैं और फैंसी कारें चलाते हैं. मैं भी ऐसी जिंदगी का सपना देखता हूं, लेकिन मैं जानता हूं कि मैं तो बस सब्जियां उगा सकता हूं और गाय व सूअर पाल सकता हूं."

चीन और खास कर उसके तटीय शहरों में आर्थिक वृद्धि और उसकी चमकदमक लू से बहुत दूर है.

अमीरी-गरीबी की खाई

लु ता ई भी उन दस करोड़ चीनी ग्रामीणों में हैं जो गरीबी रेखा के नीचे जिंदगी बसर कर रहे हैं. गांव में रह कर ही वो जैसे जैसे अपनी गुजर बसर कर रहे हैं.

वो कहते हैं, "मैंने शहर देखे हैं, वहां लोगों को रोजाना फैंसी रेस्त्राओं में खाना खाते देखा है. वे लोग अमीर है. मेरी जिंदगी का उनसे कोई मुकाबला ही नहीं है."

चीन की आर्थिक वृद्धि का फायदा सब लोगों को नहीं पहुंचा है. इस समस्या से चीन से नए नेतृत्व को निपटना है. गरीब और अमीर लोगों के बीच फासला लगातार बढ़ रहा है.

ग्राणीण इलाकों से निकल कर राजधानी बीजिंग में जाएं तो वो एक अलग ही देश नजर आता है. वहां महंगे डिजाइनर बुटीक हैं जो चीन के नए शहरी धनाढ्यों को लुभाते हैं.

चीन में करोड़पतियों की तादात लाखों में है. कुछ लोग तो बहुत ही अमीर हैं. वो दुनिया के सबसे अमीर लोगों की फेहरिस्त में आते हैं. वो इतने महंगे कपड़े पहनते हैं कि गांव में रह कर लु ता ई पूरी जिंदगी में भी इतना नहीं कमा पाएंगे.

'बीच में फंसे हैं'

कुओ फेई चीन की एक मशहूर फैशन डिजाइनर हैं, वो कहती हैं, "अब हम अमीर हैं तो वो सब करना चाहते हैं तो फैशनेबल है और अमीरी की पहचान है. ये स्वाभाविक बात है."

Image caption पिछले महीने की शी जिनपिंग को चीन की सत्ता की कमान देने की घोषणा की गई

चिया चियाओ और छाओ फेंगफांग भी बीजिंग में रहते हैं और एक रीयल एस्टेट कंपनी में काम करते हैं.

इन लोगों का संबंध मध्यम वर्ग है लेकिन वो खुद को अमीर नहीं मानते हैं. वो लगातार महंगे होते बीजिंग में एक फ्लैट नहीं खरीद सकते हैं.

उनका कहना है, "हां, हमारी जिंदगी गरीबों से बेहतर है, लेकिन हम अमीर लोगों से बहुत पीछे हैं. बहुत अच्छा तो नहीं है. हम तो बस बीच में फंसे हैं."

गरीब लोग भी खुद को ग्रामीण इलाकों में फंसा पाते हैं. चीन में संपन्नता के साथ साथ असमानता बढ़ रही है. इसलिए कम्युनिस्ट शासक इससे निपटने को अपनी अहम चुनौतियों में से एक मानते हैं.

उन्हें डर है अगर ऐसा नहीं कर पाए तो उनकी खुद की पार्टी की वैधता पर ही सवाल उठेंगे.

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