मिस्र में हिंसा जारी, टैंकों की तैनाती

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Image caption मिस्र में हिंसा को देखते हुए टैंकों की तैनाती

मिस्र में राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी के समर्थकों और उनके विरोधियों के बीच जारी हिंसक संघर्ष को देखते हुए राष्ट्रपति के महल के बाहर टैकों और सशस्त्र सैन्य वाहनों को तैनात कर दिया गया है.

राजधानी काहिरा में हिंसा के बाद फिलहाल सड़कों पर शांति है. इस हिंसा में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए.

मिस्र में विवादित संवैधानिक मसौदे को लेकर विवाद छिड़ गया है.

हालांकि सरकार इस बात पर जोर दे रही है कि इस महीने इस मामले पर जनमत संग्रह कराया जाएगा.

बीबीसी संवाददाता के मुताबिक विपक्षी दल हिंसा के लिए राष्ट्रपति मोर्सी की पार्टी मुस्लिम ब्रदरहुड को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

मोर्सी के समर्थकों ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन के बाहर एक रैली निकाली थी.

संविधान के मसौदे और मोर्सी के नए अधिकार ग्रहण करने के खिलाफ हज़ारों लोग राष्ट्रपति भवन के सामने धरना दे रहे हैं.

इस दौरान पेट्रोल बम फेंके गए और कई लोग घायल भी हो गए.

बाद में मुस्लिम ब्रदरहुड ने सभी लोगों से ऐसा न करने की अपील की और महल की गरिमा का ध्यान रखने को कहा.

राजधानी काहिरा के अलावा दूसरे शहरों में भी झड़पों और ब्रदरहुड के दफ्तरों पर हमले की खबरें हैं.

संवाददाता सम्मेलन

एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मोहम्मद अल बारदेई, अम्र मूसा और कुछ अन्य बड़े विपक्षी नेताओं ने इस पूरी घटना के लिए राष्ट्रपति मोर्सी को जिम्मेदार ठहराया.

अल बारदेई का कहना था, "हमारा मानना था और अभी भी मानना है कि यदि विशिष्ट अधिकार संबंधी आदेश को निरस्त किया जाता है तो हम बातचीत के लिए तैयार हैं. साथ ही संविधान के बारे में जनमत संग्रह को टाल दिया जाए."

उन्होंने कहा कि इन सबके लिए देश में क्रांति नहीं आई है बल्कि लोकतंत्र की स्थापना के लिए क्रांति आई है.

इससे पहले बुधवार को उप राष्ट्रपति महमूद मेकी ने कहा था कि संविधान के मसौदे पर 15 दिसंबर को ही मतदान होगा. लेकिन उन्होंने ये संकेत भी दिया कि संविधान में संशोधनों पर वोटिंग के बाद विपक्ष के साथ समझौता हो सकता है.

आलोचकों का कहना है कि ठीक तरीके से चर्चा किए बगैर संविधान का मसौदा संसद में रखा गया और अल्पसंख्यकों और महिलाओं के अधिकारों के लिए इसमें पर्याप्त अधिकार नहीं हैं.

नवंबर में राष्ट्रपति मोर्सी ने एक आदेश के तहत बहुत सारे अधिकार अपने अधीन कर लिए थे जिससे लोग पहले से ही नाराज़ थे. संविधान के मसौदे से लोगों की नाराज़गी और बढ़ गई है.

बुधवार को मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थकों ने राष्ट्रपति भवन के सामने रैली की थी. ये लोग मोर्सी के पक्ष में नारे लगा रहे थे.

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