देर रात कॉल रेट में मिलने वाली छूट खत्म

Image caption पीटीए को रात में होने वाली बातचीत की कई शिकायतें मिली थीं

पाकिस्तान में देर रात कॉल रेट में दी जाने वाली छूट को खत्म कर दिया गया है.

पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी (पीटीए) का तर्क है कि इससे देश के युवाओं का नैतिक पतन हो रहा था.

अथॉरिटी ने उन शिकायतों का भी हवाला दिया है जिन्हें पाकिस्तान के कई रूढिवादी परिवारों ने दर्ज कराया है.

अथॉरिटी का कहना है कि इस सेवा को खत्म करने के पीछे की बड़ी वजह ये है कि इसका अधिकांश इस्तेमाल किशोर-वर्ग अपने प्रेम संबंधों के लिए कर रहे थे जो कि पाकिस्तान के रूढिवादी परिवारों को नागवार गुजर रहा था.

टेलिकॉम कंपनियों ने इस प्रतिबंध को इस्लामाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

मामला कोर्ट में

इस मामले में अब इस्लामाबाद हाई कोर्ट को फैसला सुनाना है कि आखिर देर रात की बातचीत नैतिकता के लिए खतरा है या नहीं.

पाकिस्तान में देर रात कॉल पैकेज किशोरों और युवाओं के साथ-साथ लंबे समय तक काम करने वाले लोगों के बीच खासा लोकप्रिय है.

पीटीए का कहना है कि ये कदम इसलिए उठाना जरूरी हो गया था क्योंकि इस बारे में काफी शिकायतें आने लगी थीं.

जबकि पाकिस्तान की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी 'टेलिनोर' के सीएफओ आमिर इब्राहिम का कहना है, 'युवाओं को शिक्षा देने का काम टेलिकॉम इंडस्ट्री का नहीं था.'

उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''युवाओं में आचार और नैतिकता उनकी परवरिश के साथ आती है, उनके माता पिता से आती है.''

अथॉरिटी पर उपभोक्ता अधिकारों के हनन का आरोप भी लग रहा है.

पीटीए ने अदालत को देर रात हुई आपत्तिजनक बातचीत के कई क्लिप्स सौंपे है.

हालांकि मौलिक बातचीत को सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन मोबाइल कंपनी को अपनी याचिका वापस लेनी पड़ सकती है.

इसके साथ ही दूससंचार नियामक एक बार फिर सवालों के घेरे में आ सकता है.

कटघरे में 'पीटीए'

ऐसा पहली बार हुआ है कि पाक टेलिकॉम अथॉरिटी ने सार्वजनिक तौर पर इस बात को स्वीकारा है कि आम लोगों की बातचीत को रिकॉर्ड किया गया.

पाकिस्तान में मोबाइल कंपनियां फोन कॉल्स और एसएमएस में सरकार के दखल को मंजूरी देने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य हैं.

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये कानूनी प्रावधान इस मामले में काम नहीं आएगा.

कानून विशेषज्ञ मलिक गुलाम साबिर ने बीबीसी से कहा, ''रात के वक्त होने वाली व्यक्तिगत बातचीत को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर रिकॉर्ड नहीं किया जा सकता''.

मलिक ने इसे उपभोक्ताओं की निजता का हनन करार दिया है.

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