जलवायु परिवर्तन बातचीत: क्योटो प्रोटोकॉल 2020 तक बढ़ा

 रविवार, 9 दिसंबर, 2012 को 01:26 IST तक के समाचार
दोहा जलवायु

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है

क़तर में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन को लेकर चल रही बातचीत में क्योटो संधि को वर्ष 2020 तक बढ़ाने पर सहमति हो गई है.

इस समझौते पर करीब 200 देशों ने सहमति जताई है. इस समझौते की मदद से जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए बने क्योटो प्रोटोकॉल को बचाने में मदद मिलेगी.

लेकिन ये समझौता सिर्फ विकसित देशों पर लागू होगा जो दुनिया के कुल ग्रीनहाउस गैसों का 15 प्रतिशत उत्सर्जन करते हैं.

अमरीका जो ग्रीनहाउस गैसों का सबसे बड़ा उत्सर्जक है, उसने अभी तक क्योटो प्रोटोकॉल को मंजूरी नहीं दी है.

वर्ष 1997 में क्योटो समझौते पर दुनिया के कई देशों ने हस्ताक्षर किए थे, और इसका मकसद था ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना.

इस साल के आखिर में क्योटो प्रोटोकॉल का अंत होना था.

कतर की राजधानी दोहा में 12 दिनों तक चलने वाला ये सम्मेलन कई घंटों लंबा खिंच गया. इसका कारण गरीब और अमीर देशों के बीच उभरे मतभेद थे.

अमीर देशों पर दबाव था कि वो गरीब देशों को जलवायु परिवर्तन के लिए हर्जाना दें.

समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक शनिवार को कॉर्बन डॉई ऑक्साइड के उत्सर्जन के कटौती वाले इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वालों में 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया सहित दूसरे कई औद्योगिक देश शामिल थे.

क्योटो प्रोटोकॉल में अमरीका, चीन और भारत सहित दुनिया के बड़े प्रदूषक देश शामिल नहीं हैं.

दोहा में हुई सभा में इस बात पर भी फैसला हुआ कि 2015 में क्योटो प्रोटोकॉल को बदले एक दूसरे समझौते पर भी सहमति बने जो दुनिया के सभी देशों पर लागू हो.

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