अमरीकी छात्रों पर खरबों रुपए का कर्ज़!

Image caption पीएचडी की डिग्री हासिल करने बाद भी मैकवेडिट के पास कमाई का जरिया नहीं

27 साल की जिल मैकडेविट काफी पढ़ी लिखी हैं और अपने विषय की जानकार के तौर पर मशहूर भी हो रही हैं लेकिन वे कर्ज़ें में डूबी हुई हैं.

उनपर करीब डेढ़ लाख डॉलर यानी लगभग 81 लाख रुपये का कर्ज़ है.ये वो कर्ज़ है जो उन्होंने स्टुडेंट लोन के नाम पर लिया था.

मैकडेविट फिलाडेल्फिया में अपने पार्टनर के साथ रहती हैं. 800 वर्ग फ़ीट के फ्लैट में कपड़े धोने की सुविधा नहीं है. वे कहती हैं, “मेरे पास पीएचडी की डिग्री है लेकिन घर में कपड़े धोने की जगह नहीं.”

मैकडेविट को अपनी पढ़ाई करने के लिए ऋण लेना पड़ा. इस ऋण को चुकाने के लिए उन्हें हर महीने 1600 डॉलर का भुगतान करना है. लेकिन वे ऋण चुकाने में समर्थ नहीं हैं.

उन्होंने कहा,“मैं यह ऋण नहीं चुका रही हूं.” मैकडेविट ने कई दूसरी जगहों से पैसों के लेकर इस ऋण को चुकाने की कोशिश भी की लेकिन उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिली.

वह कहती हैं, “मेरी साख पूरी तरह से खत्म हो चुकी है. अगर मैं पूरी तरह से तबाह हो गई तब अगर मुझे कोई मदद भी मिलती है तो उसका क्या फ़ायदा?”

ये अकेले मैकडेविट की कहानी नहीं है. बल्कि अमरीका में स्टुडेंट लोन नहीं चुकाने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

कर्ज़ में डूबे छात्रों की बढ़ती संख्या

अमरीकी अर्थव्यवस्था का आकलन बताता है कि स्टुडेंट लोन के नाम पर करीब एक खरब डॉलर यानी लगभग 54 खरब रुपयों की रकम दी गई है, जिसकी वापसी होने की उम्मीद धूमिल होती जा रही है.

विभिन्न विश्वविद्यालयों से लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां छात्र अपने ऋण का भुगतान नहीं कर रहे हैं.

मोटे तौर पर एक आकलन यह बताता है कि अमरीका में 50 लाख से ज़्यादा छात्रों ने अपना ऋण नहीं चुकाया है.

अमरीकी शिक्षा विभाग के मुताबिक अकेले इसी साल तीन लाख पचहत्तर हज़ार छात्रों ने ऋण नहीं चुकाया है.

हालांकि इन छात्रों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.

गंभीर परिणाम

अमरीका की फेडरल सरकार ने ऐसे ऋण की उगाही के लिए कड़े प्रावधान किए हुए हैं.

शैक्षणिक आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ और फाइन एड और फास्टवेब जैसी वेबसाइटों के प्रकाशक मार्क कंट्रोविट्ज के मुताबिक सरकार इन छात्रों के वेतन में से हर महीने 15 फ़ीसदी रकम काटी जा सकती है और रिटायरमेंट के पैसों का भुगतान रोका जा सकता है.

मार्क कंट्रोविट्ज कहते हैं, “यह स्थिति किसी अंधेरी सुरंग में आगे बढ़ने जैसी है, जिसमें कहीं रोशनी की किरण नजर नहीं आती.”

स्टुडेंट लोन नहीं चुकाने वालों को कोई दूसरा ऋण नहीं मिल सकता. उनकी साख खत्म हो जाती है और उन्हें ना तो किराए का मकान मिल पाता है और ना ही कोई नौकरी.

ऐसे छात्रों की मदद करने वाले एक समूह कैंपस प्रोग्रेस के निदेशक एनी जॉनसन कहते हैं, “इस मसले में हम चरम की स्थिति तक पहुंच चुके हैं.”

Image caption ट्यूशन फ़ीस के बढ़ने से कर्ज़े में डूबी केनेडिक

जॉनसन के मुताबिक दीर्घकालीन अवधि वाले इन भारी भरकम ऋण का असर युवाओं के जीवन पर पड़ रहा है.

उन्होंने कहा, “इससे उनके भविष्य की पूरी आर्थिक दशा प्रभावित हो रही है. यह काफी बड़ी चुनौती है.”

जॉनसन के मुताबिक उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत इस समस्या की सबसे बड़ी वजह है.

कारण

बीते तीस सालों में अमरीका में ट्यूशन फीस एक हज़ार फ़ीसदी तक बढ़ गई है. किसी भी निजी विश्वविद्यालय में चार साल वाले डिग्री पाठ्यक्रम की फीस डेढ़ लाख डॉलर तक पहुंच चुकी है.

23 साल की केनेडिक वर्टोनी हाल ही में स्नातक हुई हैं और उन पर 67 हज़ार डॉलर का कर्ज़ है. केनेडिक न्यूयार्क में अपने माता-पिता के साथ रहती हैं और रोजाना अपनी मार्केटिंग की नौकरी के सिलसिले में एक घंटे से भी ज़्यादा देर तक सफ़र करके न्यू जर्सी जाती हैं.

जब केनेडिक ने कॉलेज में नामांकन लिया था, तब उन्हें इसका अंदाज़ा नहीं था कि उन पर इतना ऋण हो जाएगा. वे कहती हैं, “ईमानदारी से कहूं तो तब अगर मैं ने ऋण लेने से इनकार किया होता तो मैं अशिक्षित रह जाती.”

हालांकि तब उन्हें अंदाजा होता तो शायद वे अपेक्षाकृत सस्ते विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने का विकल्प चुनतीं.

वे कहती हैं, “उम्मीद करती हूं कि पांच साल बाद मैं अपने माता-पिता के घर से अलग रहने लगूंगी.”

हालांकि कई ऐसे छात्र भी हैं जो हालात से तालमेल बिठाने में कामयाब रहे हैं.

उपाय

36 साल के अनिल थॉमस ने अपनी स्नातक की पढ़ाई बिना किसी कर्जे के पूरी कर ली थी. इसके बाद 2007 में जब उन्होंने सुना कि पहले ही साल में वकीलों को छह अंकों वाली सैलरी मिलती है तो उन्होंने कानून की पढ़ाई करने का मन बनाया.

थॉमस कहते हैं, “हालांकि अब हालात पूरी तरह से बदल गए हैं.”

अब थॉमस पर करीब एक लाख तीस हज़ार रुपये का ऋण है. वे इस ऋण पर 8.25 फ़ीसदी ब्याज़ का चुका रहे हैं ताकि अपने लॉ स्कूल की ट्यूशन फीस और अपने रहने का इंतज़ाम कर सकें.

Image caption हालात से तालमेल बिठाने में कामयाब रहे हैं थॉमस

ऋण चुकाने के लिए उन्होंने अपनी वकालत भी शुरू कर दी. फिलहाल उन्होंने अपना दफ़्तर घर पर ही बनाया है.

वे अपना ऋण समय से चुका रहे हैं और यह कोई आसान काम नहीं है क्योंकि उन्हें इस मद में करीब एक हज़ार डॉलर हर महीने चुकाने होते हैं.

एक तो थॉमस के पास ऐसा घर है जहां से वे अपना दफ़्तर भी चला सकते हैं और दूसरी अहम वजह यह है कि थॉमस काफी सोच समझ कर खर्च करना जानते हैं.

वे कहते हैं, “ मैं कंजूसी की हद तक मितव्ययी हूं.” यही वजह है कि उन्हें उम्मीद है कि वे जल्द ही कर्ज़ मुक्त हो जाएंगे.

वे कहते हैं, “अगर मैं ने सावधानीपूर्वक खर्च रखा तो चार से पांच साल में कर्ज़ मुक्त हो जाऊंगा.मैं इस ऋण से छुटाकारा पाना चाहता हूं और मुझे उम्मीद है कि मैं ऐसा कर पाऊंगा.”

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