मिस्र:शुरुआती रुझान में मोर्सी को बढ़त!

  • 16 दिसंबर 2012
Image caption मतदान करते हुए मिस्र के राष्ट्रपति मुहम्मद मोर्सी

मिस्र में संविधान के विवादित मसौदे को लेकर हुए पहले जनमत संग्रह की गिनती शुरू हो गई है.

मतदान के शुरुआती रुझानों को देखते हुए माना जा रहा है कि जनमत संग्रह में राष्ट्रपति मुहम्मद मोर्सी के मसौदे के प्रति लोगों का रुझान अधिक है.

मुस्लिम ब्रदर हुड के अधिकारियों ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर से कहा कि मिस्र की जनता ने पहले चरण में राष्ट्रपति के मसौदे के पक्ष में अधिक वोट किए हैं.

हालांकि, औपचारिक तौर पर अभी परिणाम घोषित नहीं किए गए हैं और इसके लिए अगले चरण के जनमत संग्रह का इंतज़ार है.

मिस्र में अगला जनमत संग्रह शनिवार को होना है. पहले चरण में मिस्र की जनता ने मतदान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया.

हालांकि जनमत संग्रह के दौरान कई जगहों से हिंसक घटनाओं की खबरें भी आई और लोगों ने मतदान की समय सीमा बढ़ाए जाने पर नाराजगी भी जाहिर की.

उधर,विपक्षी दल वफ्ड पार्टी के एक नेता का कहना था कि जनमत संग्रह के दौरान काहिरा में उनके मुख्यालय पर पेट्रोल बम से हमला किया गया.

दो चरण में मतदान

संविधान के इस मसौदे पर रविवार को राजधानी काहिरा, एलेक्जेंड्रिया और आठ अन्य प्रांतों में वोटिंग हुई.

देश के बाकी हिस्सों में एक हफ्ते बाद संविधान पर मतदान करेंगे.

इस जनमत संग्रह के लिए मतदान वाले क्षेत्रों में क़रीब ढाई लाख से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे.

संविधान के मसौदे पर मतदान के लिए पांच करोड़ 10 लाख से ज़्यादा मतदाताओं का पंजीकरण किया गया है.

मतदान को दो हिस्सों में कराने की वजह ये रही कि कुछ जजों ने जनमत संग्रह का निरीक्षण करने इच्छा जताई थी.

मानवाधिकार समूहों ने आशंका जताई है कि पहले चरण के मतदान के नतीजों का असर दूसरे चरण के जनमत संग्रह पर पड़ सकता है.

समर्थन और विरोध

इस जनमत संग्रह में लोगों से पूछा गया है कि वो अगले साल होनेवाले चुनाव से पहले अनिवार्य संविधान के मूल ढांचे में बदलाव का समर्थन करते हैं या नहीं.

काहिरा में बीबीसी संवाददाता जॉन लेन का कहना है कि संविधान के विरोधियों का तर्क है कि ये इस्लामिक क़ानून लागू करने की ओर अत्यधिक झुका हुआ है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उलझे सांविधानिक प्रावधानों पर जनमत संग्रह दरअसल मतदान से कहीं अधिक है. इससे मिस्र के भविष्य की दिशा तय होनी है कि उसे इस्लामिक राष्ट्र होना चाहिए या फिर धर्मनिरपेक्ष.

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