कहीं मन रहा है 'कयामत के दिन' का जश्न भी

माया सभ्यता का एक मंदिर
Image caption माया सभ्यता के कई अवशेष अभी भी बचे हुए हैं

दुनिया के सबसे बेहतरीन रसोइयों के हाथों बना खाना, भव्य शामियाने, संगीत की थिरकती धुनें, लॉटरी का खेल, तरह- तरह की प्रदर्शनियां और कारों की खरीद पर भारी छूट.

इक्कीस दिसंबर को लेकर भले ही दुनिया भर में कयामत के दिन की आशंकाएं पसरी हों लेकिन माया सभ्यता के जिस कैलेंडर ने इन कयासों को जन्म दिया है उसके गढ़ में ज़िंदगी बेहद रंगीन है.

ज़िंदगी का जश्न

‘कयामत के दिन’ की खबरों ने मैक्सिको और मध्य अमरीका के उस इलाके को पर्यटन का गढ़ बना दिया है जहां माया सभ्यता के कुछ केंद्र और अवशेष मौजूद हैं.

फिल्मी शो, खेल-करतब, भूमिगत नदियों की सैर और इस तरह की तमाम सुख सुविधाएं वाली ये जगह अब पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है. यहां आने वाला हर व्यक्ति ज़िंदगी के भरपूर मज़े लेना चाहता है और जिन लोगों का व्यापार इस पर्यटन से जुड़ा है वो इस सपने को पूरा करने में मुस्तैद हैं.

पुरातत्ववेत्ताओं का कहना है कि माया सभ्यता ने कभी कयामत का ज़िक्र नहीं किया और उनके कैलेंडर में केवल नई सदी की शुरुआत का ज़िक्र है. लेकिन इन तर्कों का पर्यटकों की संख्या पर कोई असर नहीं दिखता.

दुनिया भर में माया सभ्यता के कैलेंडर को लेकर अचानक रुचि जगी है और मैक्सिको की सरकार ने इस मौके को गंवाया नहीं है.

कई महीने पहले से ही मैक्सिको की सरकार ने अमरीका और यूरोप के देशों में इस कैलेंडर को प्रचार का विषय बना दिया था.

मैक्सिको का पर्यटन विभाग भी ये मानता है कि उनकी रणनीति ने उम्मीद से बेहतर परिणाम दिखाए हैं. हालांकि कुछ लोग अब भी हैं जो मानते हैं कि प्रचार का काम बेहतर ढंग से हुआ होता तो और ज्यादा लोग आते.

पर्यटन परिषद के सदस्य सीजो एडुआर्डो सोलिस कहते हैं, ''हम जनवरी 2012 में सरकारी नुमाइंदों से मिले थे ताकि प्रचार का काम तुरंत शुरू किया जा सके. लेकिन साल की शुरुआत हो चुकी थी. असल में ये काम और जल्दी किया जाना चाहिए था.''

कई तरह के आयोजन

Image caption ये है वो कैलेंडर जिसके आधार पर दावा किया गया था कि 21 दिसंबर को दुनिया ख़त्म हो जाएगी

मैक्सिको के दक्षिणी इलाके युकातान में इन दिनों माहौल कुछ ऐसा है कि अगर दुनिया वाकई 21 दिसंबर को खत्म होने वाली है तो आखिरी वक्त का इंतज़ार जश्न में डूबा हुआ हो.

दुनिया भर के बेहतरीन खानसामों ने भी इस दिन के लिए खास तैयारियां की हैं. 'एंड ऑफ द वर्ल्ड' नाम के एक बैंक्वेट में उस दिन अंकों के आधार पर खास तरह के व्यंजन बनाए जाएंगे. इन व्यंजनों की कीमत 390 डॉलर प्रति व्यक्ति तक है.

ऐसे ही एक और दुकान पर ‘कयामत के दिन’ की निशानियां बिकती दिख जाएंगी. माया सभ्यता के कथन को दोहराता दुकान पर लगा विज्ञापन कहता है, 'मुझ पर विश्वास कीजिए मैं सब जानती हूं.'

दुकानों के अलावा कई तरह के आकर्षण और भी हैं. ग्वाटेमाला शहर से सटे तापाचूला इलाके में एक आयोजन के ज़रिए कैथलिक बाइबल और माया सभ्यता के बीच संबंध को समझाने की कोशिश की गई.

इसके अलावा मैक्सिको के कई इलाकों में इस दौरान माया सभ्यता पर कई तरह की फिल्में, डाक्यूमेंट्री और चित्रों की प्रदर्शनियां भी आयोजित की गई हैं.

सरकार की मानें तो शुरुआती लक्ष्य 18 महीनों में 52 लाख पर्यटकों को आर्कषित करना था लेकिन अगस्त महीने तक ही ये आंकड़ा रिकॉर्ड 62 लाख की संख्या पार कर गया. माना जा रहा है कि मामला खत्म होने तक 80 लाख लोग मैक्सिको आएंगे.

'कयामत के दिन' के इस व्यापार से कुछ लोग भले ही नाखुश हों लेकिन मैक्सिको की सरकार सहित ज़्यादातर लोग इसे ज़िंदादिली का नाम देते हैं.

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