21 दिसंबर: दुनिया का अंत या नई शुरुआत?

 शुक्रवार, 21 दिसंबर, 2012 को 11:24 IST तक के समाचार
माया कैलेंडर

माया कैलेंडर के मुताबिक 21 दिसंबर 2012 को दुनिया खत्म हो जाएगी.

गूगल पर आप यदि ये टाइप करें कि 2012 में दुनिया खत्म हो रही है तो आपको इससे संबंधित करीब करीब दो अरब संदर्भ मिल जाएंगे.

यही नहीं हॉलीवुड और दुनिया भर में किताब की दुकानों में भी इससे संबंधित किताबें भरी पड़ी हैं.

आँधी, तूफान, बाढ़, ग्रहों की टकराहट, सौरमंडल की विनाशकारी घटनाएं इस तरह के सभी प्रमाण इन किताबों में मिल जाएंगे कि माया सभ्यता के लोगों को किन-किन चीजों की जानकारी थी.

और अब 21 दिसंबर 2012 की वो तारीख भी आ गई जब पाँच हजार साल पुराना माया कैलेंडर खत्म हो जाता है और प्रबल आशंका थी कि इस दिन दुनिया खत्म हो जाएगी और इसके बाद की तारीख को देखने वाला कोई नहीं होगा.

महाविनाश से निपटने की तैयारी

रॉबिन कोलोरेडो के एक छोटे से शहर में रहती हैं. उनके पास चार घर हैं. चार सुरक्षित घर. बत्तीस वर्षीया रॉबिन पांच बच्चों की मां हैं. वो जीन्स और ऊँची एड़ी के जूते पहनती हैं और वो एक बेहद जुझारू महिला हैं. आजकल वो एक तरह से तैयारी में हैं. वो इस तैयारी में हैं कि दुनिया खत्म हो जाएगी तो क्या किया जाएगा.

वो कहती हैं, "जब सभी लड़कियां अपने में मस्त रहती थीं, उस वक्त मैं अपने समुदाय के अस्तित्व के बारे में सोचा करती थी. जब मैं बच्चों के साथ खेला करती थी और उन्हें ये बताती थी कि हम लोग अस्तित्व की लड़ाई लड़ने वाले समुदाय के हैं तो बाकी लड़कियां मेरे साथ खेलना पसंद नहीं करती थीं."

आजकल रॉबिन ने दक्षिण-पश्चिमी कोलोरेडो में रॉकी पर्वत पर एक 'सर्वाइवल कम्युनिटी' बना रखी है. इस समुदाय में करीब तीन सौ लोग हैं. वो बताती हैं कि वो बहुत अच्छा समय व्यतीत कर रही थीं, लेकिन आखिर ये सब किस लिए, जब एक तय दिन दुनिया से चले ही जाना है.

"माया सभ्यता के लोग प्राचीन काल में मध्य अमरीका के बेहद प्रगतिशील और बौद्धिक लोग थे. करीब दो हजार साल पहले ये सभ्यता उभर कर आई थी लेकिन इस सभ्यता के लोग सबसे ज्यादा माया कैलेंडर की वजह से जाने जाते हैं"

ग्राहक हैंकॉक, लेखक

रॉबिन ऐसा नहीं सोचतीं कि 21 दिसंबर निश्चित रूप से अंतिम दिन होगा, लेकिन वो ये मानती हैं कि ऐसा हो सकता है. और ऐसा मानने वाली वो अकेली नहीं हैं. एक अनुमान के मुताबिक हर दस में से एक व्यक्ति ऐसा मानता है.

रूस में तो लोग इतना डरे हुए हैं कि वहां आपात स्थिति के मंत्री को ये बताना पड़ा कि इस दिन दुनिया खत्म होने नहीं जा रही है. वहीं फ्रांस के एक गांव बुगारक में लोगों ने खुद को बचाने के लिए एक पहाड़ी का सहारा लिया है जहां उन्हें विश्वास है कि वो बच जाएंगे.

अलग-अलग अर्थ

ग्राहम हैंकॉक माया सभ्यता पर आधारित सबसे ज्यादा बिकने वाली एक किताब फिंगरप्रिंट्स ऑफ गॉड के लेखक हैं.

वो कहते हैं, "माया सभ्यता के लोग प्राचीन काल में मध्य अमरीका के बेहद प्रगतिशील और बौद्धिक लोग थे. करीब दो हजार साल पहले ये सभ्यता उभर कर आई थी लेकिन इस सभ्यता के लोग सबसे ज्यादा माया कैलेंडर की वजह से जाने जाते हैं. ये कैलेंडर आश्चर्यजनक रूप से तकनीक का बहुत खूबसूरत उदाहरण है. ये एक चक्रीय कैलेंडर है. इस कैलेंडर के मौजूदा चक्र को लॉन्ग काउंट कहते हैं. यदि हम इसे आज की भाषा में पढ़ें तो इसकी शुरुआत ईसा पूर्व 3114 साल से होती है और ईसा से 2012 साल बाद 21 दिसंबर को मौजूदा युग समाप्त हो जाता है. इसमें एक बात और स्पष्ट है और वो ये कि इसके हिसाब से 22 दिसंबर 2012 से एक नए युग की शुरुआत होती है."

"ऐसी तमाम बातें हैं जिनसे लोग दुनिया के खात्मे की बातें कर रहे हैं. मसलन माया सभ्यता की भविष्यवाणी, या फिर आने वाले ग्रह निबिरू या फिर ध्रुवीय परिवर्तन. लेकिन ये सब बातें झूठी हैं. इनका कोई ठोस आधार नहीं है. ये सब महज फैंटेसी है और कुछ नहीं."

डेविड मॉरिसन, नासा वैज्ञानिक

माया कैलेंडर की कूट भाषा को समझने में अपना पूरा जीवन कुर्बान कर देने वाले जोस आर्गेल्स ने साल 1987 में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया था जिसने दुनिया भर के करोड़ों लोगों को आकर्षित किया था.

डेनियल पिंचबेक, '2012: माया सभ्यता की भविष्यवाणी का वर्ष' नामक किताब के लेखक हैं. पिंचबेक 21 दिसंबर 2012 को एक नए युग की शुरुआत का प्रस्थान बिंदु कहते हैं, न कि पूरी सभ्यता का अंत बिंदु. लेकिन उनके मुताबिक ये इतना आसान नहीं होगा.

वो कहते हैं, "हम देख सकते हैं कि हाल ही में कितनी आपदाएं आईं. हाल ही में हमने न्यूयॉर्क में सैंडी का कहर देखा. मैं न्यूयॉर्क में पिछले 46 साल से रह रहा हूं और मैंने इस शहर में ऐसा पहले कभी नहीं देखा था."

डेविड मॉरिसन नासा से जुड़े एक अंतरिक्षविज्ञानी हैं. वो कहते हैं, "ऐसी तमाम बातें हैं जिनसे लोग दुनिया के खात्मे की बातें कर रहे हैं. मसलन माया सभ्यता की भविष्यवाणी, या फिर आने वाले ग्रह निबिरू या फिर ध्रुवीय परिवर्तन. लेकिन ये सब बातें झूठी हैं. इनका कोई ठोस आधार नहीं है. ये सब महज फैंटेसी है और कुछ नहीं."

खैर, जो भी हो, चलिए देखते हैं कि 21 दिसंबर को या फिर उसके बाद क्या होता है?

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