जिमी सेविल रिपोर्ट पर बीबीसी की आलोचना

जिमी सेविल
Image caption जिमी सेविल का पिछले साल 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था

एक जांच में पाया गया है कि जिमी सेविल यौन उत्पीड़न मामले में बीबीसी की मुल्तवी रिपोर्ट पर भ्रम की स्थिति थी लेकिन इसमें किसी तरह की लीपापोती नहीं की गई थी.

बीबीसी की स्वतंत्रता पर ज़ोर

जांच रिपोर्ट में इन दावों का सिरे से खारिज कर दिया गया है कि दिवंगत टीवी प्रस्तोता जिमी सेविल को बचाने के लिए न्यूज़नाइट कार्यक्रम की जांच-पड़ताल रोक दी गई थी.

एक अन्य रिपोर्ट में न्यूज़नाइट कार्यक्रम की आलोचना की गई है जिसमें टोरी पार्टी के लॉर्ड मैकएल्पाइन पर बाल शोषण मामले में गलती से अभियोग लगा दिया गया था.

बाल शोषण पर चुप्पी तोड़ना मुश्किल

इस सिलसिले में न्यूज़नाइट कार्यक्रम के संपादक और उप-संपादक को बदला जाना है.

पूरे मामले की पड़ताल के लिए बीबीसी ने 'पोलार्ड रिव्यू' नामक समिति बनाई थी ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि जांच के दौरान किसी तरह की कोताही तो नहीं बरती गई थी. न्यूज़नाइट कार्यक्रम ने दिसम्बर 2011 में इस मामले की पड़ताल बंद कर दी थी.

स्काई न्यूज़ के पूर्व प्रमुख निक पोलार्ड ने ये रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट में कहा गया है, ''शुरुआती जांच को बंद करने का फैसला दोषपूर्ण था और इसे गलत तरीके से लिया गया था लेकिन मेरा मानना है कि ऐसा करने के पीछे किसी तरह की दुर्भावना नहीं थी.''

रिपोर्ट में कहा गया है, ''ऐसा सेविल के बचाव में कतई नहीं किया गया था.''

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बीबीसी प्रबंधन इस मुद्दे से निपटने में पूरी तरह से विफल साबित हुआ और इस मामले में बहुत अधिक भ्रम की स्थिति थी.

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