मिस्र: मुस्लिम ब्रदरहुड का जनमत संग्रह में जीत का दावा

मेकी
Image caption मोहम्मद मेकी को इसी साल अगस्त में उप राष्ट्रपति बनाया गया था

मिस्र में सत्तारूढ़ मुस्लिम ब्रदरहुड का कहना है कि देश के नए संविधान के मसौदे पर जनमत संग्रह के बाद मतों की गिनती के शुरुआती नतीजों से पता चलता है कि बड़ी संख्या में लोग मसौदे का समर्थन कर रहे हैं.

मुस्लिम ब्रदरहुड का कहना है कि मसौदे पर शनिवार को हुए दूसरे और आखिरी दौरे के मतदान में 70 प्रतिशत से अधिक लोगों ने नए संविधान के पक्ष में वोट दिया है.

मुस्लिम ब्रदरहुड का कहना है कि दोनों चरणों के मतदान के बाद लगभग 60 प्रतिशत लोग नए संविधान का समर्थन कर रहे हैं.

विपक्षी नेशनल साल्वेशन फ्रंट ने इन आंकड़ों से इनकार नहीं किया है लेकिन उसका कहना है कि मतदान के दौरान धांधली हुई है. मतगणना के आधिकारिक परिणाम सोमवार तक आने की उम्मीद है.

नतीजों की पुष्टि होने पर मिस्र में संसदीय चुनाव अगले वर्ष कराए जाएंगे. मिस्र में संविधान के मसौदे पर जनमत संग्रह का दूसरा और अंतिम चरण पूरा हो चुका है.

उपराष्ट्रपति का इस्तीफा

मिस्र के उप राष्ट्रपति महमूद मेकी ने इस्तीफा दे दिया है. वे इसी साल अगस्त में उप राष्ट्रपति नियुक्त किए गए थे. देश में चल रहे मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल पर उनका कहना था कि जज के रूप में काम करने के बाद वर्तमान भूमिका में वो खुद को फिट नहीं पा रहे थे.

मिस्र में नए संविधान के मसौदे को मंजूरी के लिए जनमत-संग्रह पर विवाद खत्म नहीं हुआ है. वहीं राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी और उनके समर्थकों का कहना है कि नया संविधान लोकतंत्र को सुरक्षित करेगा.

मोर्सी विरोधियों का आरोप है कि ये संविधान इस्लामवादियों का समर्थन करता है और पिछले साल होस्नी मुबारक की सत्ता उखाड़ फेंकने वाली क्रांति के साथ विश्वासघात है.

घोषणा और खंडन

शनिवार देर रात सरकारी टेलीविजन ने घोषणा की थी कि केंद्रीय बैंक के गवर्नर फारूख अल उकदाह ने भी इस्तीफा दे दिया है. हालांकि बाद में एक कैबिनेट मंत्री ने इस रिपोर्ट का खंडन कर दिया.

मेकी ने अपने इस्तीफे की घोषणा जनमतसंग्रह के दूसरे दौर के मतदान के ठीक पहले की थी. टेलीवजिन पर उन्होंने अपने इस्तीफे को पढ़ा, ''मैंने महसूस किया कि राजनीति मेरी पेशागत पृष्ठभूमि से मेल नहीं खाती है.''

58 वर्षीय मेकी ने कहा कि वे इससे पहले 7 नवंबर को भी इस्तीफे की पेशकश कर चुके थे, लेकिन तब परिस्थितियों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था.

मेकी के इस्तीफे के बाद पढ़े गए बयान से पता चलता है कि राष्ट्रपति मोर्सी द्वारा ज्यादा शक्तियां लेने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी.

काहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता शाइमा खलील का कहना है कि मेकी की नाराजगी साफ देखी जा सकती है कि उन्हें महत्वपूर्ण फैसलों में विश्वास में नहीं लिया जा रहा था.

यदि संविधान का मसौदा पारित हो जाता है और जिसकी कि काफी उम्मीद जताई जा रही थी, तो इसके बाद मेकी की कुछ खास भूमिका न रह जाती क्योंकि नए संविधान उप राष्ट्रपति के पद का जिक्र नहीं है.

पिछले एक महीने से राष्ट्रपति मोर्सी के सात करीबी लोग इस्तीफे दे चुके हैं और इनमें से ज्यादातर ने इसकी वजह वही बताई थी जो कि उप राष्ट्रपति मेकी बता रहे हैं.

मिस्र में पिछले कई दिनों से सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के समर्थक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

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