क्रिसमस से अपनी संस्कृति को बचाने की कोशिश

ग्रैंडफादर फ्रॉस्ट और स्नो मेडेन
Image caption अब उजबेकिस्तान में नजर नहीं आएंगे ग्रैंडफादर फ्रॉस्ट और स्नो मेडेन

उज़बेकिस्तान के टीवी दर्शकों के लिए क्रिसमस के जश्न की खु़शी फ़ीकी रह सकती है. इस साल टीवी स्क्रीन पर उज़बेकिस्तान के दर्शकों को फ़ादर क्रिसमस का दीदार करने का मौका नहीं मिलेगा. दरअसल यहां के सरकारी प्रसारकों ने ऐसे प्रसारण पर अनाधिकारिक प्रतिबंध लगाया है.

यह ताज़ा क़दम आधुनिक उज़बेक संस्कृति में सोवियत या रूसी विरासत के महत्व को कम करने के तौर पर देखा जा सकता है.

जब मुस्लिम बहुल मध्य एशिया, सोवियत संघ का एक बड़ा हिस्सा था उस वक्त क्रिसमस से जुड़े किरदार बेहद मशहूर थे.

यह आदेश किसने दिया अभी यह स्पष्ट नहीं है लेकिन इस मौके़ पर हमेशा दिखने वाले फादर क्रिसमस (वहाँ ग्रैंडफादर फ्रॉस्ट के नाम से मशहूर) और उनकी महिला सहयोगी स्नो मेडेन स्पष्ट तौर पर अब ऐसे विदेशी किरदार बन गए हैं जिन्हें पसंद नहीं किया जा रहा है.

क्या है मामला

Image caption ताशकंद में अब भी लोग स्नोमैन बना रहे हैं

ताशकंद में एक उज़बेक टीवी पत्रकार का कहना है, "हमें टीवी पर ग्रैंडफादर फ्रॉस्ट और स्नो मेडेन को नहीं दिखाने का आदेश मिला है. हम एक छोटा

क्रिसमस ट्री दिखा सकते हैं लेकिन वह भी पृष्ठभूमि में होना चाहिए. "

नाम न बताने की शर्त पर इस पत्रकार का कहना है कि उन्हें यह पता नहीं है कि यह आदेश सरकार या राष्ट्रपति किसकी ओर से आया है.

लेकिन उज़बेकिस्तान में प्रेस पर सख़्त नियंत्रण है और वहां सरकार की इजाज़त के बग़ैर यकीनन ऐसा कुछ नहीं हो सकता है.

उज़बेक पत्रकार का कहना है, "सभी टीवी कार्यक्रमों में सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि नया साल आ रहा है. हमें क्रिसमस शब्द का ज़िक्र भी नहीं करना चाहिए. हमारे बॉस के अनुसार हमारे लिए यह अहम है कि हम अपनी उज़बेक संस्कृति को विदेशी प्रभाव से बचाएं. "

उज़बेक टीवी के प्रमुख संपादक इस बात को खारिज करते हैं कि ग्रैंडफादर फ्रॉस्ट या नए साल से जुड़े दूसरे रुसी/सोवियत किरदारों पर प्रतिबंध है या उज़बेकिस्तान में नया साल नहीं मनाया जा रहा है.

कैसा है माहौल

Image caption ताशकंद में नए साल के मौके पर बनते हैं ऐसे क्रिसमस ट्री

उज़बेक शहरों के चौराहे पर क्रिसमस ट्री लगाया गया है और वहां के निवासियों का कहना है कि अब भी बच्चों के लिए नए साल पर मनोरंजन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. लेकिन अब इन कार्यक्रमों का आयोजन इतने बड़े पैमाने पर नहीं हो रहा है जितना कि सोवियत दौर में हुआ करता था.

मुस्लिम बहुल क्षेत्र में नए साल को एक बड़े पारिवारिक मौके के तौर पर मनाया जाता रहा है और इसे कभी धार्मिक नजरिए से कभी नहीं देखा गया.

वहीं सोवियत दौर में इसे एक ऐसे त्यौहार के तौर पर प्रचारित किया गया जो इस साम्यवादी साम्राज्य के बहु-नस्लीय और बहुधर्मी लोगों को एकजुट कर सके.

लेकिन अब ऐसा लगता है कि उज़बेक सरकार बड़े शांत तरीके से पुरानी सोवियत परंपरा को खत्म करने की कोशिश कर रही है.

इसके अलावा वहां पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव को भी नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है.

इस साल की शुरुआत में उज़बेकिस्तान में वैलेंटाइन डे पर भी प्रतिबंध लगाया गया था.

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