कहीं बम न बन जाएँ अनाथ बच्चे...

 शुक्रवार, 28 दिसंबर, 2012 को 12:06 IST तक के समाचार
इराकी बच्चा

मुस्तफा और मुर्तदा दोनों भाई है और लड़ाई में उनके माता पिता की मौत हो चुकी है

एक ताज़ा सर्वेक्षण में ये बात सामने आई है कि इराक में लगभग 10 लाख बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने अपने माता-पिता या दोनों में से किसी एक को खो दिया है.

हालांकि यहां काम करने वाले राहतकर्मियों का मानना है कि ऐसे बच्चों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है.

इराक़ जैसे देश में जहां बच्चों की सुरक्षा के लिए क़ानून नहीं है, वहाँ इन अनाथ बच्चों को बड़ी मानवीय समस्या के तौर पर देखा जा रहा है.

ऐसे ही 32 लड़के हिशम हसन के निजी अनाथालय में रहते हैं. हसन इन लड़कों का पिता की तरह ख्याल रखते हैं. इन लड़कों की देखभाल करने के लिए कोई नहीं हैं, उन्हें सड़कों और गलियों से उठाकर यहां लाया गया है.

वे कहते हैं, ''अगर ये यहां नहीं रहेंगे तो आतंकवादी इन्हें अपने समूह में शामिल कर लेंगे. अगर इन अनाथ लड़कों की देखभाल ठीक से नहीं की जाती है तो ये बम बन जाएंगे और इराक के भविष्य और सुरक्षा के लिए खतरा होंगे.''

डर का साया

12 साल के सैफ़ के माता-पिता बम हमले में मारे गए थे और वो घायल हो गया था. वो अब भी डरा हुआ है.

सैफ़ उस घटना के बारे में बताते हुए कहता है, ''मैं बहुत छोटा था. मुझे उन लोगों के बारे में याद नहीं है. एक आदमी आया और मुझे ले गया. उसने मुझे बताया कि मेरे माता-पिता के साथ क्या हुआ है. माता-पिता के बिना कोई जिंदगी नहीं होती है.''

"अगर ये यहां नहीं रहेंगे तो आतंकवादी इन्हें अपने समूह में शामिल कर लेंगे. अगर इन अनाथ लड़को की देखभाल ठीक से नहीं की जाती है तो ये बम जाएंगे और इराक के भविष्य और सुरक्षा के लिए खतरा बन जाएंगे.''"

हिशम हसन

वहीं 10 साल के मुस्तफ़ा और उसके 11 साल के भाई मुर्तदा ने भी अपने माता-पिता को इराक में हुई हिंसा में खो दिया है.

मुस्तफ़ा ने बताया कि उनके पिता मोहम्मद एक टैक्सी ड्राइवर थे. वह अपने पिता के साथ फुटबॉल खेलता था और उसे उनकी कमी खलती है.

पारंपरिक तौर पर इराक में अनाथ हुए बच्चों को उनके रिश्तेदार ले जाते हैं, लेकिन गरीबी और लड़ाई से इस देश का सामाजिक ढांचा इतना टूट गया है कि ऐसा हमेशा संभव नहीं हो पाता.

अपराधी बनने का खतरा

इराक़ के अनाथालयों में बच्चों के लिए पूरी सहूलियतें नहीं हैं

यहां अनाथ हुए हर बच्चे की कहानी बहुत ही ख़ौफनाक है. लेकिन इन अनाथ लड़कों की संख्या इराक के लिए एक सामाजिक संकट है.

सामाजिक मामलों के उपमंत्री दरा यारा का कहना है कि तेल समृद्ध देश में इन बच्चों के लिए कुछ करने को लेकर पैसे की कमी नहीं है, बस कहीं कमी है तो वो है इच्छा शक्ति की.

दरा यारा भी मानते है कि अगर इन अनाथ लड़कों की देखभाल ठीक से नहीं की गई तो वो आतंकवादियों का शिकार बन जाएंगे.

इराक में आए दिन बम हमले और हत्याएं होती रहती हैं और इनकी संख्या भी बढ़ रही है.

ऐसे में इराक के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि दुख का सामना कर रहे इन बच्चों की देखभाल सही तरीके से हो ताकि हिंसा के शिकार लोग अपराधी न बन जाए.

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