आई अरब हसीनाओं की बहार

 रविवार, 30 दिसंबर, 2012 को 07:43 IST तक के समाचार
हना बेन अब्देलसलेम

जानकार कहते हैं कि साहिल और हना जैसी महिलाएं अरब जगत में बदलाव का प्रतीक हैं

दुनिया की धारणा बदलते हुए अरब देशों की महिलाएं फैशन उद्योग में सुपर-मॉडल के रूप में नाम कमा रही हैं.

ऐसी ही महिलाओं में से एक हैं हिंद साहली जो मार्क ज़ैकब, केन्ज़ो और वेरा वांग जैसे नामचीन लोगों के साथ काम कर चुकी हैं.

वे कहती हैं, ''फैशन में नई चीज़ों को पसंद किया जाता है. नया कुछ भी हो, अच्छा है.''

साथ ही अरब जगत की सांस्कृतिक विविधता भी ऐसी महिलाओं को फैशन उद्योग की ओर आकर्षित कर रही है.

वे कहती हैं, ''हमारी संस्कृति विशाल है, दूसरों से अलग है. हम कई चीजों से प्रेरणा ले सकते हैं.''

आप इस पेशे में कैसे आईं, ये पूछने पर वे कहती हैं, ''कई लोगों का सोचना है कि मोरक्को का मॉडल बनना अच्छा है. फेसबुक पर कई लड़कियां मुझसे पूछती हैं कि मैंने ये सब कैसे किया.''

साहली को कुछ बुरे अनुभवों का भी सामना करना पड़ा जिनके बारे में वह कहती हैं कि मैं इन पर ध्यान नहीं देती, मुझे अपने काम से खुशी होती है.

पर्दे से परे

हिंद साहली

हिंद साहली को अपने पेशे पर गर्व है

हिंद साहली जैसी और भी महिलाएं फैशन जगत में हैं. जैसे ट्यूनीशिया की हना बेन अब्देलसलेम. उन्हें लेनकॉम जैसी कॉस्मेटिक कंपनी के साथ काम करने का मौका मिला.

'मुस्लिम वूमेंस नेटवर्क यूके' की निदेशक और महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करने वाली शाइस्ता गोहिर कहती हैं, ''ये वाकई एक क्रांति है और बोल्ड करियर का चयन है. खासतौर पर इसलिए क्योंकि वे दुनिया के उस हिस्से से आती हैं जो परम्परागत है.''

वे कहती हैं, ''धारणा है कि मुस्लिम महिलाएं बस पर्दे में रहती हैं और बेज़ुबान जैसी होती हैं. लेकिन आप हर साल आने वाली अरब की सौ ताकतवर महिलाओं की सूची पर नज़र डालें तो महिलाओं की दूसरी ही छवि आपको मालूम होगी.''

दिक्कतें तो हैं...

"इन महिलाओं को यूरोपीय महिलाओं की तर्ज पर ही दिखाया जा रहा है और मुझे लगता है कि ये बड़ी सकारात्मक बात है."

लौरेटा रॉबर्ट्स

हिंद साहली का कहना है कि उन्हें अपने परिवार से दूर रहना पड़ता है जो एक समस्या है, लेकिन उन्हें माता-पिता उनका उत्साह बढ़ा देते हैं.

वे कहती हैं, ''मेरी अम्मी हिजाब पहनती हैं, ये उनकी पसंद है. मेरा पूरा परिवार मुसलमान है और मज़हब के हिसाब से ही काम करता है.''

फैशन जगत से जुड़ीं लौरेटा रॉबर्ट्स का मानना है कि अरब महिलाओं की मौजूदगी फैशन जगत में अहम भूमिक निभा रही है.

वे कहती हैं, ''इन महिलाओं को यूरोपीय महिलाओं की तर्ज पर ही दिखाया जा रहा है और मुझे लगता है कि ये बड़ी सकारात्मक बात है.''

अरब जगत की महिलाओं की फैशन उद्योग में संख्या क्यों बढ़ रही है, लौरेटा रॉबर्ट्स इसका कारण भी बताती हैं. वे कहती हैं कि मेहनताना के मामले में इन महिलाओं के साथ दिक्कत नहीं है और मध्य एशिया में बाज़ार भी बढ़ रहा है.

लौरेटा रॉबर्ट्स कहती हैं, ''आजकल आप देखिए तमाम फैशन शो में अरब उपभोक्ताओं को आकर्षित किया जा रहा है क्योंकि अब वो खर्चा कर सकते है.''

अरब जगत में सत्ता के परिवर्तन की लहर से अन्य क्षेत्रों में भी बदलाव की बयार बही है, महिलाएं और फैशन उद्योग भी इसमें शामिल है. हिंद साहली को इस बदलाव का हिस्सा होने पर गर्व है.

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