कॉक्स बाज़ार बन पाएगा बांग्लादेश का 'पटाया'?

 रविवार, 6 जनवरी, 2013 को 18:40 IST तक के समाचार
कॉक्स बाज़ार

कॉक्स बाज़ार का किनारा, पटाया और गॉल को चुनोती देने की तैयारी में है.

खूबसूरत समुद्री तट,करीने से सजी नारियल के पेड़ों की कतारें, सालभर खिली धूप और सुहाना मौसम, बांग्लादेश के दक्षिण पूर्वी इलाक़े में स्थित कॉक्स बाज़ार में वो सबकुछ है जो इस तट को छुट्टियां मनाने के लिए आदर्श जगह बनाता है.

लगभग 100 किलोमीटर तक बिखरी समुद्री रेत के साथ कॉक्स बाज़ार दुनिया का सबसे बड़ा खुला प्राकृतिक समुद्री तट है.

बंगाल की खाड़ी के इस लंबे समुद्री तट का बड़ा हिस्सा अब भी अनछुआ है. ऐसे में कई लोगों का मानना है कि कॉक्स बाज़ार में थाईलैंड के पटाया और श्रीलंका के गॉल जैसे लोकप्रिय पर्यटक स्थलों को चुनौती देने की क्षमता है.

संकट के बादल

बांग्लादेश सरकार ने देश को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए जो महत्वाकांक्षी योजना बनाई है, उसमें कॉक्स बाज़ार को प्रमुखता दी गई है.

बांग्लादेश सरकार को उम्मीद है कि अगले दस वर्षों में बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर पांच अरब डॉलर की कमाई की जा सकती है.

लेकिन कॉक्स बाज़ार के मुख्य समुद्री तट पर चहलकदमी से पता चलता है कि अगर सरकार ने जल्दी कदम नहीं उठाए तो विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने की उसकी योजना खटाई में पड़ सकती है.

कॉक्स बाज़ार में पर्यावरण संरक्षण के लिए अभियान चला रहे प्रोफेसर मुश्ताक अहमद कहते हैं, ''पूरे इलाक़े को बेहद बेतरतीब ढंग से विकसित किया जा रहा है. तटीय इलाक़े में अतिक्रमण करके वहां सैकड़ों इमारतें खड़ी कर दी गई हैं जिससे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है.''

वो कहते हैं कि हाल के वर्षों में बिना अनुमति के कई होटलों, सरकारी इमारतों और दुकानों का निर्माण किया गया है.

बेतहाशा निर्माण

"पहाड़ियों पर पेड़ों को बेतहाशा काटा गया और इमारतों को बनाने के लिए जगह साफ की जा रही है. नतीजतन मानसून के दौरान बार-बार भूस्खलन होता है जिसमें कई जानें चली जाती है."

प्रोफेसर मुश्ताक अहमद

कुछ दशक पहले तक कॉक्स बाज़ार एक अलसाया सा तटीय शहर था. यहां आने वाले अधिकांश पर्यटक घरेलू थे जो ढाका और चटगांव जैसे बड़े शहरों के शोर से बचने के लिए कॉक्स बाज़ार का रुख़ करते थे.

लेकिन अब यहां की फ़िज़ा पूरी तरह बदल चुकी है और जहां-तहां सैकड़ों की संख्या में बहुमंजिला होटल, इमारतें, अपार्टमेंट ब्लॉक तथा रेस्त्रां बन गए हैं.

मुख्य तट पर भी दर्जनों दुकानें खुल गई हैं जो तरह-तरह के सजावटी सामान, खिलौने, कपड़े और फास्ट फूड बेचती हैं.

शहर में निर्माण गतिविधियां चरम पर हैं और तटीय क्षेत्रों के आसपास के इलाक़ों में हर जगह होटलों और रेस्त्रां का निर्माण हो रहा है.

पर्यावरणविदों को आशंका है कि अगर मुख्य तट के आसपास बनी अवैध इमारतों को जल्द नहीं हटाया गया तो यह इलाक़ा हमेशा के लिए अपनी सुंदरता खो देगा.

उनका कहना है कि अदालत ने अवैध इमारतों को हटाने के लिए पिछले साल आदेश दिया था. लेकिन सैकड़ों इमारतें और दुकानें अब भी जस की तस बनी हुई हैं.

कॉक्स बाज़ार

कॉक्स बाज़ार का खूबसूरत तट

लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद सरकार ने एक समिति का गठन किया है जो ऐसी इमारतों और ढांचों की पहचान करेगी जिन्हें हटाया जाएगा.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी मोहम्मद मोनिरुल इस्लाम कहते हैं, ''समस्या यह है कि उस इलाक़े में बहुत सारी सरकारी इमारतें बनाई गई हैं. समिति जल्दी ही उन इमारतों की सूची जारी करेगी जिन्हें हटाया जाना है.''

लेकिन सरकार की सुस्त चाल से कई पर्यावरणविद ख़फ़ा है. उन्हें लगता है कि तटीय इलाक़े को अतिक्रमण और भू-माफियाओं से बचाने की लड़ाई में अहम समय यूं ही बर्बाद हो रहा है.

बांग्लादेश के पर्यटन मंत्री फ़ारुक ख़ान ने स्वीकार किया कि कॉक्स बाज़ार में कुछ बेतरतीब विकास हुआ है लेकिन साथ ही कहा कि सरकार उस इलाक़े को बचाने के लिए क़दम उठा रही है.

ख़ान ने बीबीसी से कहा, ''हम कॉक्स बाज़ार से तेकनाफ तक एक मरीन ड्राइव का निर्माण कर रहे हैं और हमने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मरीन ड्राइव के पूर्वी छोर पर किसी इमारत का निर्माण नहीं होना चाहिए. इस तरह हमने अतिक्रमण पर लगाम कसने की योजना बनाई है.''

चौतरफा प्रभाव

"मेरा मानना है कि तटीय इलाक़े में प्रदूषण रोकने के लिए कड़े क़ानून होने चाहिए. आप यहां कई स्थानों पर कूड़े के ढ़ेर देख सकते हैं. हमें इस खूबसूरत स्थान को गंदा नहीं करना चाहिए."

मारिया हुसैन, पर्यटक

यह समस्या समुद्र तट तक ही सीमित नहीं है बल्कि पास की पहाड़ियों को भी इससे ख़तरा है.

प्रोफेसर अहमद कहते हैं, ''पहाड़ियों पर पेड़ों को बेतहाशा काटा गया था और इमारतों को बनाने के लिए जगह साफ की जा रही है. नतीजतन मानसून के दौरान बार-बार भूस्खलन होता है जिसमें कई जानें चली जाती है.''

जून में भारी बारिश के कारण तटबंध टूटने से कई मकान तबाह हो गए थे और दर्जनों लोग मारे गए थे. पिछले चार वर्ष के दौरान यह भूस्खलन की दूसरी बड़ी घटना थी.

पर्यटकों की बढ़ती संख्या से भी समुद्री पर्यावरण पर असर पड़ रहा है.

कॉक्स बाज़ार और आसपास के इलाक़ों में प्रदूषण को साफ तौर पर देखा जा सकता है. हर साल लाखों दर्शक यहां आते हैं और अपने पीछे तटीय इलाक़े में छोड़ जाते हैं कूड़े और खाली बोतलों का ढ़ेर.

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