युद्ध अपराध में नेपाली कर्नल गिरफ्तार

 शनिवार, 5 जनवरी, 2013 को 11:03 IST तक के समाचार

नेपाल में गृह युद्ध के दौरान 16 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

ब्रिटेन की पुलिस ने नेपाली सेना के एक कर्नल के खिलाफ देश के लंबे गृह युद्ध के दौरान 2005 में प्रताड़ना के दो मामलों में शामिल होने का अभियोग लगाया है.

46 वर्षीय अभियुक्त कर्नल कुमार लामा को गुरुवार को ईस्ट ससेक्स स्थित उनके घर से लंदन की मेट्रोपोलिटन पुलिस ने गिरफ्तार किया.

वो फिलहाल सूडान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक के रूप में तैनात हैं और गिरफ्तारी के समय ब्रिटेन की यात्रा पर थे.

उन्हें वेस्टमिन्स्टर के जज की अदालत में शनिवार को पेश किया जाएगा.

कर्नल लामा के खिलाफ ब्रितानी क़ानून के तहत युद्ध अपराध में शामिल होने का मुक़दमा चलाया जाएगा.

कर्नल लामा के खिलाफ आरोप है कि गृह युद्ध के दौरान उन्होंने जान-बूझकर दो लोगों को काफ़ी प्रताड़ित किया.

पुलिस के मुताबिक प्रताड़ना की ये घटनाएं दो अलग-अलग मामलों में अप्रैल से मई 2005 के बीच नेपाल के गुरुसिंघे सैन्य बैरक में हुई थीं.

लंदन की मेट्रोपोलिटन पुलिस ने एक तीसरे पक्ष द्वारा दी गई कथित प्रताड़ना की सूचना के आधार पर मामले की जांच शुरू की है.

नेपाल का विरोध

"संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए सूडान में काम कर रहे लामा को संबंधित सरकार को बताए बिना और बिना किसी सबूत के गिरफ्तार करना अंतरराष्ट्रीय क़ानून के सार्वभौम सिद्धांतों के खिलाफ़ है"

नारायण काजी श्रेष्ठा, नेपाल के विदेश मंत्री

उधर, नेपाल की सरकार ने काठमांडू में ब्रिटेन के राजदूत को बुलाकर गिरफ्तारी के खिलाफ अपनी नाराज़गी व्यक्त की है.
नेपाल के विदेश मंत्री ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए ब्रिटेन से कर्नल की रिहाई की मांग की है.

नेपाली विदेश मंत्री नारायण काजी श्रेष्ठा ने कहा,"संयुक्त राष्ट्र मिशन के लिए सूडान में काम कर रहे लामा को संबंधित सरकार को बताए बिना और बिना किसी सबूत के गिरफ्तार करना अंतरराष्ट्रीय क़ानून के सार्वभौम सिद्धांतों के खिलाफ़ है."

जबकि ब्रिटेन की पुलिस का कहना है कि ये अपराध सार्वभौम न्यायाधिकार के अंतर्गत आता है इसलिए उनके खिलाफ ब्रिटेन में मुक़दमा चलाया जा सकता है.

ब्रिटेन का कहना है कि कर्नल लामा नेपाल के गृहयुद्ध के दौरान युद्ध अपराध के दोषी हैं जिसमें 16,000 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

क्रिमिनल जस्टिस एक्ट की धारा 134 के मुताबिक ये मामला सार्वभौम न्यायाधिकार का है जिसके तहत सीधे तौर पर ब्रिटेन से न जुड़े होने के बावजूद ब्रिटेन की अदालत इसकी सुनवाई कर सकती है.

नेपाल का लंबा चला गृहयुदद्ध 2006 में समाप्त हुआ था और इस दौरान सेना और माओवादी विद्रोहियों पर बड़े पैमाने पर मानवाधिकार हनन के आरोप लगे थे.

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