हामिद करजई अमरीका पहुंचे, सैनिकों की वापसी पर होगी चर्चा

 बुधवार, 9 जनवरी, 2013 को 05:56 IST तक के समाचार
हामिद करजई-बराक ओबामा

अफगानिस्तान से विदेशी सेनाओं की वापसी साल 2014 के अंत तक होनी है

अमरीका ने पहली बार कहा है कि ये हो सकता है कि साल 2014 के बाद अफगानिस्तान से अमरीकी सेनाएं पूरी तरह से हट जाएं.

अमरीका का ये बयान अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई की अमरीका यात्रा के दौरान आया है.

करजई अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ बातचीत के लिए तीन दिन की यात्रा पर वॉशिंगटन पहुंचे हैं.

अमरीकी रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बेन रोड्स ने संवाददाताओं को बताया कि अमरीकी प्रशासन अभी भी कई विकल्पों पर विचार कर रहा था.

"दोनों के बीच साल 2014 के बाद अफगानिस्तान में अमरीकी सेना की उपस्थिति के बारे में चर्चा होनी है. अफगान सरकार इसके विरोध में नहीं है. हम आने वाले तीन दिनों में इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे."

एमाल फ़ैज़ी, हामिद करज़ई के प्रवक्ता

हामिद करजई चाहते हैं कि उनके देश के शहरों और गांवों से अमरीकी सेना वापस चली जाए.

हामिद करजई के प्रवक्ता एमाल फ़ैज़ी का कहना था, “दोनों के बीच साल 2014 के बाद अफगानिस्तान में अमरीकी सेना की उपस्थिति के बारे में चर्चा होनी है. अफगान सरकार इसके विरोध में नहीं है. हम आने वाले तीन दिनों में इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे.”

वहीं अमरीकी रक्षा विभाग पेंटागन के प्रेस सचिव जॉर्ज लिटिल का का कहना था, “मैं इस बारे में किसी निजी सहमति पर बात नहीं करना चाहूंगा कि साल 2014 के बाद अमरीकी सेनाओं की उपस्थिति की क्या स्थिति होगी. ये प्रक्रिया चल रही है और इस पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति को करना है. मुझे उम्मीद है कि गुरुवार को राष्ट्रपति करजई और अमरीकी रक्षा मंत्री के बीच व्यापक मुद्दों पर सहमति बन सकेगी.”

सेना वापसी

वैसे अफगानिस्तान से ज्यादातर विदेशी सेनाएं 2014 के अंत तक वापस आ जाएंगी.

इससे पहले ह्वाइट हाउस के अधिकारियों ने कहा था कि इन सेनाओं की वापसी के बाद भी वो कुछ सैनिकों के वहां बना रहने के पक्ष में हैं.

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति की शुक्रवार को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की संभावना है. ओबामा के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से करजई की ये पहली अमरीका यात्रा है.

अफगानिस्तान में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उम्मीद है कि बराक ओबामा साल 2014 के बाद सैनिकों की संख्या के बारे में सलाह कर सकते हैं. साथ में इन सैनिकों की भूमिका के बारे में भी बातचीत होगी कि उन्हें तालीबान से लड़ना है या फिर मुख्य रूप से अल-क़ायदा से निपटने में ही मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करना है.

हामिद करजई की ये यात्रा उस ड्रोन हमले के बाद हुई है जिसमें पाकिस्तान के चरमपंथी नेता मुल्ला नजीर की मौत हो गई थी. मुल्ला नजीर पर आरोप था कि उन्होंने तालीबान लड़ाकों को अफगानिस्तान में हथियार मुहैया कराते थे.

उम्मीद की जा रही है कि इस यात्रा के दौरान हामिद करजई अफगान सेना को हथियारों और दूसरे सामानों की खरीद को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिए कुछ माँग रख सकते हैं.

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