अफगान सैनिक संभालेंगे सुरक्षा की ज़िम्मेदारी: ओबामा

करज़ई -ओबामा
Image caption ओबामा और करज़ई के बीच तालिबान को लेकर भी बातचीत हुई.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अमरीकी फौज साल 2013 के अप्रैल महीने तक अफ़गानिस्तान में सुरक्षा की ज़िम्मेदारी अफ़गान सेना को सौंप देगी.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, "इस बसंत में ही हमारे सैनिकों का एक अलग मिशन होगा जिसके तहत हमारा काम होगा अफ़गान सैनिकों को प्रशिक्षण और सलाह देना और उनकी मदद करना. यह एक ऐतिहासिक क्षण होगा और अफ़्गानिस्तान की संप्रभुता की ओर एक और कदम होगा."

लेकिन उन्होंने कहा कि अमरीकी फ़ौजी अफगान फ़ौजियों की अगुवाई में सैन्य अभियानों में शामिल रहेंगे.

इससे पहले अमरीका ने कहा था कि वो साल 2013 के मध्य में अमरीकी सैनिक, अफ़गान की फौज को सुरक्षा ज़िम्मेदारियां सौंप देंगे.

क़ानून का दायरा

लेकिन एक अहम मुद्दे पर जिसपर अमरीकी और अफ़गानिस्तान सरकार के बीच तनातनी रही है उस पर सख्त रवैया अपनाते हुए अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अगर अफ़गानिस्तान में अमरीकी सैनिकों को साल 2014 के बाद अफ़गानिस्तान के कानून और उसकी अदालतों के तहत रखा गया तो अमरीका कोई फ़ौजी वहां तैनात नहीं करेगा.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यह बात अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई के साथ व्हाइट हाउस में हुई बातचीत के बाद कही.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, "अगर अमरीकी फ़ौजियों को अफ़गानिस्तान के कानून से बाहर नहीं रखा गया तो यह मेरे लिए नामुमकिन है कि मैं कोई भी अमरीकी फ़ौजी अफ़गानिस्तान में 2014 के बाद तैनात करूं."

अमरीकी राष्ट्रपति के साथ पत्रकार वार्ता में शामिल अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने इस बात पर मंज़ूरी देते हुए कहा कि वह अफ़गानी जनता को समझाने की कोशिश करेंगे कि अमरीकी फ़ौजियों को अफ़गानिस्तान के कानून के दायरे में न लाया जाए.

करज़ई का कहना था कि, "अमरीका ने अफ़गानिस्तान की संप्रभुता का सम्मान करते हुए अफ़गान कैदियों को अफ़गान हुकूमत के हवाले करने की मंज़ूरी दे दी है."

2014 के बाद अफ़गानिस्तान में कितने अमरीकी फ़ौजी रहेंगे इस सवाल पर अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि अभी वह अमरीकी फ़ौजी कमांडरों की राय ले रहे हैं और उसके बाद फ़ौजियों की संख्या पर फ़ैसला करेंगे.

तालिबान से बातचीत

Image caption अफ़गानिस्तान में अभी भी अमरीका के 66 हज़ार सैनिक तैनात हैं.

इसके अलावा अफ़गानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच सीधी बातचीत के बारे में भी जानकारी दी गई. इसके बारे में जानकारी देते हुए कहा गया कि कतर में अफ़गानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच सीधी बातचीत होगी जिसमें पाकिस्तान को भी शामिल किया जाएगा.

अमरीकी राष्ट्रपति ने यह ज़ोर देकर कहा कि अफ़गानिस्तान में अमरीकी फ़ौजी इसलिए गए थे क्योंकि 300 के करीब अमरीकियों को अल-कायदा ने मारा था.

उन्होंने अफ़गानिस्तान में अमरीकी मिशन के बारे में दोहराते हुए कहा कि अल कायदा को किसी भी सूरत में अफ़गानिस्तान में दोबारा पनाह नहीं लेने दिया जाएगा

और इसीलिए 2014 के बाद भी अमरीकी फ़ौजी अफ़गानिस्तान में अल-कायदा और अन्य चरमपंथी गुटों को निशाना बनाते रहेंगे.

इसके अलावा अफ़गानिस्तान के फ़ौजियों को प्रशिक्षण देना और उनकी मदद करना भी अमरीकी फ़ौजियों की ज़िम्मेदारी में शामिल होगा.

लेकिन जानकार अब भी अफ़गान फ़ौजियों की खुद के बलबूते सैन्य कारर्वाई करने की क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं.

हामिद करज़ई का कहना था कि वह 2014 के बाद तुर्की और जर्मनी की तर्ज़ पर अफ़गानिस्तान के अमरीका के साथ रिश्ते देखना चाहते हैं.

अफ़गानिस्तान में अभी अमरीका के 66 हज़ार के करीब फ़ौजी तैनात हैं और 2014 के आखिरी तक इनमें से अधिकतर फौजी वापस चले जाने की उम्मीद है.

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