चीन के लहसुन पर तस्करों की नज़र

लहसुन
Image caption यूरोपीय संघ ने चीन से आयातित विदेशी लहसुन पर 9.6 फीसदी शुल्क लगाया है

स्वीडन ने अवैध तरीके से करीब 73 करोड़ रुपए के लहसुन का आयात करने के मामले में दो संदिग्ध ब्रितानी नागरिकों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया है.

स्वीडन के सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इसने यूरोप में तस्करी के सबसे हैरतअंगेज़ कारनामे का खुलासा किया है. लेकिन लहसुन की तस्करी का ये पहला मामला नहीं है.

दरअसल ईयू के सदस्य देशों में लहसुन आयात करने पर 9.6 फीसदी ड्यूटी देनी पड़ती है, इसलिए लहसुन की अवैध तस्करी की जाने लगी है.

दुनिया का 80 फीसदी लहसुन चीन में उगाया जाता है और ईयू देशों में अवैध तरीके से लाया जा रहा ज़्यादातर लहसुन भी वहीं से आता है.

नार्वे में लहसुन पर कोई आयात कर नहीं लगता है. ऐसे में यहां से बड़े ट्रकों में भरकर लहसुन की तस्करी पड़ोसी देश स्वीडन और ईयू के अन्य देशों में धड़ल्ले से की जाती है.

करोड़ों की तस्करी

पिछले साल भी लहसुन की तस्करी से जुड़े कुछ ऐसे मामले हुए हैं जिसमें तस्करों को सज़ा दी गई.

यूरोपीयन एंटी फ्रॉड ऑफिस (ओएलएएफ) के पवेल बोरकोवेक का कहना है, “1990 के दशक से ही चीन के लहसुन की आयात से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आने लगी थीं.”

उनका कहना है कि वर्ष 2001 में ईयू के बजट पर भी इसका असर दिखने लगा जब विदेशी लहसुन पर 9.6 फीसदी कस्टम ड्यूटी लगाए जाने के साथ ही 1,200 यूरो प्रति टन का अतिरिक्त शुल्क भी इसमें शामिल किया गया.

दरअसल आयात शुल्क लगाकर ईयू अपने सदस्य देशों में लहसुन उत्पादकों के हितों की रक्षा करना चाहता था ताकि चीन का लहसुन उनके घरेलू लहसुन के मुकाबले महंगा हो जाए.

दुनिया भर के बाजारों में चीन के किसानों द्वारा उगाए गया लहसुन छाया हुआ है जिसे बेहद कम क़ीमत पर बेचा जाता है.

ईयू के बजट पर असर

Image caption लहसुन उत्पादन में चीन का योगदान 80 फीसदी है

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के मुताबिक चीन में साल 2010 में 1 करोड़ 85 लाख टन लहसुन का उत्पादन हुआ और दुनिया भर के लहसुन उत्पादन में इसका योगदान तकरीबन 80 फीसदी तक रहा.

ईयू में लहसुन का उत्पादन मुख्य तौर पर स्पेन में होता है और इसके अलावा इटली, फ्रांस, पोलैंड, हंगरी, रोमानिया और बुल्गारिया में भी इसकी खेती होती है.

बोरकोवेक का कहना है कि तस्करी से ईयू को अच्छी-खासी रकम गंवानी पड़ती है. उनका कहना है, “सीमा शुल्क के लिहाज से ताजा लहसुन के एक डब्बे से करीब 30,000 यूरो के नुकसान का जोखिम बना रहता है.”

उनका कहना है कि कई सालों से चीन से लहसुन की तस्करी की जा रही है. बोरकोवेक की मानें तो ईयू के कई सदस्य देशों पर लहसुन की तस्करी का असर देखा गया है. लेकिन ब्रिटेन, पोलैंड और इटली लहसुन की तस्करी के लिहाज से विशेषतौर पर निशाने पर रहे हैं.

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