सीरिया में हुए धमाकों में 80 से अधिक की मौत

 बुधवार, 16 जनवरी, 2013 को 03:09 IST तक के समाचार

धमाके के बाद अलेप्पो विश्वविद्यालय

सीरिया में कार्यकर्ताओं और अधिकारियों का कहना है कि दक्षिणी सीरियाई नगर अलेप्पो में हुए दो विस्फोटों में 80 से अधिक लोग मारे गए हैं.

यह विस्फोट अलेप्पो विश्वविद्यालय में हो रही परीक्षाओं के पहले दिन हुआ. सीरिया की मानवाधिकार ऑबज़र्वेटरी के अनुसार इस विस्फोट में मरने वालों की संख्या 83 है जबकि अलेप्पो के गवर्नर ने मरने वालों की तादाद 82 बताई है.

सरकारी टेलिविजन का कहना है कि ‘आतंकवादियों’ ने विश्वविद्यालय परिसर पर रॉकेट चलाए जबकि कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसा युद्धक विमानों द्वारा मिसाइल चलाए जाने के कारण हुआ.

अलेप्पो मुख्य केंद्र

सीरिया में दो सालों से चल रही लड़ाई के दौरान अलेप्पो, सरकारी और विपक्षी बलों के बीच संघर्ष का मुख्य केंद्र रहा है.

तुर्की में मौजूद बीबीसी संवाददाता जेम्स रेनॉड्स का कहना है कि दोनो पक्ष एक दूसरे को हमेशा के लिए पीछे हटा पाने में असफल रहे हैं.

धमाकों के बाद लिए गए वीडियो फ़ुटेज में जले हुए वाहन और क्षत विक्षत शव दिखाई दे रहे थे और लोग बचे हुए लोग पड़ोस की इमारत में शरण लेने की कोशिश कर रहे थे.

एक सैनिक सूत्र ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया कि सतह से हवा में मार करने वाली एक भटकी हुई मिसाइल परिसर से टकराई जो सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्र में आता है.

विरोधियों के नियंत्रण वाला सबसे नज़दीक इलाका वहां से करीब एक मील दूर है. लेकिन किसी भी विद्रोही संघटन ने यह नहीं कहा है कि इस हमले के पीछे उनका हाथ है.

'युद्धक विमानों का इस्तेमाल'

विपक्षी कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार ने परिसर पर हमला करने के लिए जेट युद्धक विमान भेजे थे. उन्होंने एक वीडियो लिंक भी जारी किया है जिसमें पहले धमाके के बाद छात्रों को तेजी से विश्वविद्यालय से बाहर जाते दिखाया गया है.

दूसरे धमाके के बाद कैमरा हिलता है और लोग भागना शुरू कर देते हैं. एक छात्र जिसने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को अपना नाम अबू तायम बताया, ने कहा, 'इस आपराधिक शासन के युद्धक विमान मस्जिद, गिरजाघर या विश्वविद्यालय का सम्मान करना नहीं जानते.’

विद्रोहियों ने इससे पहले भी अलेप्पो में सरकारी ठिकानों को अपना निशाना बनाया है. अक्तूबर में शहर के मुख्य चौक पर हुए धमाके में कम से कम 34 लोग मारे गए थे.

संयुक्त राष्ट्र संघ का कहना है कि मार्च 2011 से राष्ट्रपति बशर-अल- असद के खिलाफ शुरू हुए विद्रोह में 60,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

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