पाकिस्तानी मीडिया को देश में अस्थिरता की आशंका

 बुधवार, 16 जनवरी, 2013 को 21:47 IST तक के समाचार
पाकिस्तान में बड़ा प्रदर्शन

भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन सरकार के लिए चुनौती बन रहा है.

पाकिस्तान में प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ की गिरफ्तारी के आदेश और इस्लामाबाद में जारी भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों को देखते हुए वहां के मीडिया ने देश में 'अव्यवस्था' और 'अस्थिरता' बढ़ने की आशंका जताई है.

एक सुन्नी मौलवी ताहीरुल का़दरी के नेतृत्व में इस्लामाबाद में जारी प्रदर्शनों के बीच ही मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपों में प्रधानमंत्री अशरफ़ की गिरफ्तारी के आदेश दिए.

पाकिस्तान के कुछ अखबारों ने दोनों घटनाओं के बीच संबंध होने की बात कही जबकि कुछ का कहना है कि ये सिर्फ़ एक संयोगमात्र है.

लेकिन इस बात से सब सहमत हैं कि देश अव्यवस्था की तरफ बढ़ रहा है.

अस्थिरता

'पाकिस्तान ऑब्जर्वर' में आसिफ हारून लिखते हैं कि तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के कारण मौजूदा सरकार और आगामी आम चुनावों पर 'अनिश्चितता' और 'संदेह' के बादल मंडराने लगे हैं.

वहीं 'फ्रंटियर पोस्ट' का कहना है कि देश गहरे संकट और जबदस्त अव्यवस्था में दाखिल हो गया.

अखबार के अनुसार, “सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अंदेशा होना चाहिए था. लेकिन हैरानी की बात है कि उसे भनक भी नहीं लगी. और वो एक बड़े रायते में फंस गई है और देश का मुरब्बा बन रहा है.”

वहीं 'द न्यूज' ने अशरफ की गिरफ्तारी के आदेश को एक अनूठा घटनाक्रम बताया है और पाकिस्तान के इतिहास में शायद ही कभी देखने को मिला हो.

पाकिस्तान में कुछ ही महीनों में आम चुनाव होंगे लेकिन मंगलवार के राजनीतिक घटनाक्रम ने पाकिस्तान में लोकतंत्र को लेकर कई संदेह पैदा कर दिए हैं.

'किसका हाथ है'

राजा परवेज अशरफ

प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हैं.

'द नेशन' ने कहा है कि फिलहाल स्थिरता चक्रवात में फंसी दिखती है. अखबार के अनुसार, “गिरफ्तारी के आदेश के समय ने कुछ अहम सवाल उठाए हैं. क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था बनी रह पाएगी.”

'डेली टाइम्स' की भी यही राय है कि मंगलवार के घटनाक्रम ने राजनीतिक व्यवस्था और समूचे देश को अस्थिर किया है.

अखबार के संपादकीय में कहा गया है, “ये अभी साफ नहीं है कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए पीछे कौन से संभावित हाथ हैं. हालांकि आखिरकार तो ये पता ही चल जाएगा. इस बीच सभी नागरिकों को सलाह है कि अपनी सीट बेल्ट कस लें.”

वहीं उर्दू अखबार 'मशरिक' को उम्मीद है कि राजनेता देश की लोकतांत्रित व्यवस्था को किसी भी तरह के नुकसान से बचाने की हर संभव कोशिश करेंगे.

ऊर्दू अखबार 'उम्मत' महसूस करता है कि अगर पाकिस्तान में राजनीतिक संकट जारी रहता है तो इससे देश को “गंभीर नुकसान” उठाने होंगे.

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