पाकिस्तान में प्रधानमंत्री मामले पर तकरार

राजा परवेज अशरफ
Image caption भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे अशरफ

पाकिस्तान में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करने के लिए बनी संस्था के प्रमुख ने प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ़ की गिरफ्तारी के बारे में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कहा है कि उनके खिलाफ इस बारे में पर्याप्त सबूत नहीं हैं.

पाकिस्तान में सरकार और न्यायापालिका के बीच पिछले एक साल से लगातार टकराव हो रहा है.

मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी के नेतृत्व में एक खंडपीठ ने भ्रष्टाचार के आरोपों में प्रधानमंत्री अशरफ को गिरफ्तार करने के आदेश दिए, जिससे पाकिस्तान में नया राजनीतिक संकट पैदा हो गया है.

लेकिन पाकिस्तान के राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (नैब) के प्रमुख फसीह बुखारी ने सुप्रीम कोर्ट बताया है कि अशरफ से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की शुरुआती जांच में खामी रही हैं और उन्हें ये तय करने के लिए कुछ समय चाहिए कि प्रधानमंत्री को गिरफ्तार किया जा सकता है या नहीं.

अदालत की फटकार

अशरफ पर आरोप है कि उन्होंने जल और ऊर्जा मंत्री रहते हुए निजी कंपनी से रिश्वत ली. इस मामले में कई वरिष्ठ अधिकारी भी अभियुक्त हैं.

आरोप है कि ये रिश्वत निजी बिजली घर बनाने के सिलसिले में दी गई थी. हालांकि प्रधानमंत्री अशरफ इन आरोपों से इनकार करते हैं.

बुखारी का कहना है कि जांच अधिकारी आरोप साबित करने वाले सबूत नहीं जुटा पाए, बल्कि उन्होंने मौखिक बयानों पर भरोसा किया जो अदालत में मान्य नहीं हैं.

इस पर एक जज ने बुखारी से कहा कि वो सरकारी अभियोजक की बजाय बचाव पक्ष के वकील की तरह बात कर रहे हैं.

मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि नैब के प्रमुख को क्यों और समय चाहिए जबकि अशरफ के खिलाफ मामला एक साल से लंबित है.

Image caption फसीह बुखारी ने अपने ही संगठन की रिपोर्ट को गलत बताया

उन्होंने बुखारी को आदेश दिया कि मामले की फाइलों को जजों के सामने पेश किया जाए ताकि ये तय किया जा सके कि सबूत कितने पुख्ता हैं.

'कानून से ऊपर कोई नहीं'

नैब की रिपोर्ट के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट ने अशरफ की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे.

जस्टिस चौधरी ने कहा, “कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझ सकते हैं, लेकिन मैं ये साफ कर देना चाहता हूं कि कानून से ऊपर कोई नहीं है.”

राजा परवेज अशरफ के खिलाफ गिरफ्तार के वारंट ऐसे समय में जारी किए गए हैं जब राजधानी इस्लामाबाद में बड़ा भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शन हो रहा है जिसका नेतृत्व एक धार्मिक गुरु ताहिरुल कादरी कर रहे हैं.

कादरी सरकार का इस्तीफा चाहते हैं और उन्होंने देश की सभी असेंबलियों को भंग करने की भी मांग की है.

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