कोका-कोला से ज़्यादा कमाते हैं मैच फ़िक्सर

Image caption फ़ीफ़ा और इंटरपोल मिलकर सट्टेबाज़ी को काबू करने की योजना पर काम कर रहे हैं.

इंटरपोल के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि पूरे विश्व भर में फुटबॉल में होने वाली मैच फ़िक्सिंग से हर साल अरबों यूरो की कमाई होती है.

इंटरपोल के महासचिव रॉनल्ड नोबेल ने फुटबॉल पर लगने वाले गैर कानूनी सट्टे के बारे में कहा,“ये कमाई उस स्तर की है जैसी कोको-कोला कंपनी का मुनाफा.”

उन्होंने ये बयान ‘सट्टेबाज़ी की समस्या पर नियंत्रण कैसे किया जाए’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में दिया. इस सम्मेलन का आयोजन अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल फेडरेशन फ़ीफ़ा ने किया था.

फ़ीफ़ा और इंटरपोल दोनों ने लोगों को सट्टेबाज़ी के बारे में शिक्षित करने के बारे में चर्चा की ताकि लोगों को सट्टेबाज़ों के दबाव से बचाया जा सके.

इंटरपोल महासचिव नोबेल ने कहा कि आपराधिक गुट ना सिर्फ मैच फ़िक्सिंग से ख़ूब पैसा कमा रहे हैं बल्कि पैसे का अन्य देशों में गैर-कानूनी निवेश कर रहे हैं.

कनाडा का उदहारण देते हुए उन्होंने कहा कि इस समस्या से कोई देश अछूता नहीं है. उन्होंने बताया कि उत्तर अमेरिकी देशों में फुटबॉल कोई बड़ा खेल नहीं है और इसका आयोजन भी छोटे स्तर पर स्वयंसेवक ही करते हैं. वहां भी खिलाड़ियों से अक्सर मैच फ़िक्सिंग के लिए संपर्क किया जाता है.

कई मुंह वाला दानव

इंटरपोल महासचिव नोबेल कहते हैं, “मैच फ़िक्सिंग एक कई मुंह वाला दानव है जिसे सुनियोजित राष्ट्रीय और अतंरराष्ट्रीय सहयोग से मारा जा सकता है.”

इस मौके पर फ़ीफ़ा महासचिव जेरोम वाल्के ने ज़ोर दिया कि इस समस्या का समाधान शुरुआती स्तर पर होगा जहां युवा खिलाड़ियों को इस समस्या के बारे में जागरूक किया जाए.

जेरोम वाल्के ने कहा, “इस बात की कोई संभावना नहीं है कि खिलाड़ियों को सट्टेबाज़ी के बारे में जागरूक किए बगैर इस समस्या से पार पाया जा सके.”

ये पहली बार है जब इंटरपोल और फ़ीफ़ा ने साथ मिलकर मैच फिक्सिंग पर एक सम्मेलन का आयोजन किया है. इस सम्मेलन में 50 देशों से आए 200 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

पिछले साल ही फ़ीफ़ा ने गैर कानूनी सट्टेबाज़ी को काबू करने के लिए इंटरपोल के साथ मिलकर 280 लाख डॉलर की एक योजना बनाई थी. ये पैसा अगले दस साल में भ्रष्टाचार विरोधी परियोजना में खर्च किया जाएगा जिसके तहत खिलाड़ियों, रेफरियों और अधिकारियों को शिक्षित किया जाएगा.

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