हथियार डालने पर हर महीने दस हजार वजीफा

बलूचिस्तान में विद्रोह
Image caption बलूचिस्तान के सुरक्षा हालात संघीय सरकार के लिए बड़ी चुनौती हैं

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में गवर्नर राज लागू होने के बाद चरमपंथियों को हथियार छोड़ने पर हर महीने मुआवज़ा देने की पेशकश की गई है.

प्रांतीय सरकार की घोषणा के अनुसार जो भी हथियारबंद व्यक्ति हिंसा का रास्ता छोड़ेगा उसे हर महीने दस हज़ार रुपये का वज़ीफा दिया जाएगा.

अशांत बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है.

बलूचिस्तान के गवर्नर नवाब जुल्फिकार अली मगसी की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक में ये फैसला किया गया.

ये समिति पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के एक अंतरिम आदेश के बाद गठित की गई थी. इसमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री नवाब असलम रसानी के नेतृत्व में सरकार लोगों की जान-माल की हिफाज़त करने में नाकाम हो गई है और इसने अपनी वैधता खो दी है.

कई घोषणाएं

क्वेटा से पत्रकार मोहम्मद नाजिम के मुताबिक गवर्नर राज के बाद समिति की पहली बैठक में कमांडर सदर्न कमांड, लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आलिम खटक और बलूचिस्तान के मुख्य सचिव बाबर याकूब फतह मोहम्मद समेत प्रशासन और सेना के कई बड़े अधिकारियों ने हिस्सा लिया.

बैठक में फैसला किया गया कि पहाड़ों से उतर कर हथियार डालने वाले बलूच चरमपंथियों को सरकार की तरफ से हर महीने दस हजार रुपये का वजीफा दिया जाएगा.

बैठक के बाद जारी होने वाले एक बयान में कहा गया है कि मासिक वजीफे के अलावा इन लोगों के कल्याण की योजनाएं भी चलाई जाएंगी.

गवर्नर राज लागू होने से पहले भी इस समिति ने बलूच चरमपंथियों को हिंसा छोडऩे पर आर्थिक मदद देने की बात कही थे लेकिन बलूच संगठनों ने इस पेशकश को खारिज कर दिया.

बैठक में बलूचिस्तान के गवर्नर ने आदेश दिया कि 10 जनवरी को क्वेटा में बम धमाके में मारे गए लोगों के परिजनों और घायलों को मुआवजे की राशि 31 जनवरी तक दे दी जाए.

इस बैठक में बलूचिस्तान में मौजूदा स्थिति की समीक्षा भी की गई और प्रशासनिक अधिकारियों को इसे बेहतर करने के निर्देश दिए गए.

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