क्या अमीरी से हो रहा है दुनिया का नुकसान?

 रविवार, 20 जनवरी, 2013 को 10:23 IST तक के समाचार
गरीबी

ऑक्सफैम ने दुनिया भर के नेताओं से गरीबी के खिलाफ जंग छेड़ने की अपील की है

गरीबी उन्मूलन के लिए काम करने वाली निजी संस्था ऑक्सफैम का कहना है कि पिछले एक साल में दुनिया भर के 100 सबसे अमीर लोगों ने जितनी दौलत कमाई है उसका एक चौथाई हिस्सा भी दुनिया भर की गरीबी मिटाने के लिए पर्याप्त है.

अगले हफ्ते स्विट्जरलैंड में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से ठीक पहले इस संस्था ने दुनिया भर के नेताओं से इस असमानता को दूर करने की मांग की है.

संस्था के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक तंत्र को इस सुधार पर काम करने की जरूरत है ताकि मानवता के लिए कुछ काम किया जा सके.

"हम बहुत दिनों तक खुद को इस भुलावे में नहीं रख सकते कि महज कुछ लोगों के धन के अर्जित कर लेने से इसका फायदा बहुत लोगों को मिल सकता है."

बारबरा स्टॉकिंग, सीईओ, ऑक्सफैम

बुधवार से स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में दुनिया भर के राजनीतिक नेताओं और आर्थिक विशेषज्ञों की चार दिवसीय बैठक होने वाली है.

“असमानता की कीमत” नाम से प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि धन के संकेंद्रण की वजह से ही गरीबी उन्मूलन के लिए की जाने वाली कोशिशें सफल नहीं हो पा रही हैं.

असमानता की क़ीमत

ऑक्सफैम के मुताबिक दुनिया भर की कुल आबादी के महज एक प्रतिशत अमीर लोगों की आमदनी में पिछले बीस सालों में साठ फीसद की वृद्धि हुई है.

रिपोर्ट का कहना है कि एक ओर जहां दुनिया के सौ सबसे अमीर लोगों ने पिछले साल 240 अरब डॉलर की कमाई की वहीं दुनिया भर के बेहद गरीब तबके के लोगों को महज सवा डॉलर में एक दिन गुज़ारना पड़ा.

ऑक्सफैम की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बारबरा स्टॉकिंग का कहना है, “हम बहुत दिनों तक खुद को इस भुलावे में नहीं रख सकते कि महज कुछ लोगों के धन के अर्जित कर लेने से इसका फायदा बहुत लोगों को मिल सकता है.”

उनके मुताबिक सिर्फ एक प्रतिशत लोगों के हाथों में धन का संकेंद्रण आर्थिक गतिविधियों को भी कमजोर करता है और इसका खामियाजा हर व्यक्ति को भुगतना पड़ता है.

संस्था ने इस असमानता को खत्म करने के उपायों पर विचार करने के लिए नई वैश्विक बहस की अपील की है.

संस्था ने अपनी तरह से इस बारे में कई सुझाव भी दिए हैं जिनमें करों में कई तरह के सुधार करने संबंधी सलाह भी शामिल है.

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